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11 अगस्त 2026विधिवादी बने बिना पवित्रता का अनुसरण कैसे करें
अपनी पुस्तक द होल क्राइस्ट (The Whole Christ) में डॉ. सिन्क्लेयर फर्ग्यूसन विधिवाद (Legalism) की एक अत्यन्त सहायक परिभाषा देते हैं: “विधिवाद का सरल अर्थ है परमेश्वर की व्यवस्था को परमेश्वर के व्यक्ति से अलग कर देना . . . अर्थात् उसकी व्यवस्था को उसके प्रेमपूर्ण और उदार व्यक्ति से पृथक कर देना।”
यदि हम परमेश्वर की व्यवस्था और उसकी अपेक्षाओं को उस प्रेममय और उदार परमेश्वर से अलग कर दें, जिसकी वह व्यवस्था है, तो पवित्रता की हमारी खोज अनिवार्य रूप से एक अनुचित, विधिवादी दिशा में मुड़ जाएगी। इसलिए, हमें सदैव यह स्मरण रखते हुए पवित्रता का अनुसरण करना चाहिए कि परमेश्वर कौन है और वह हमें पवित्र होने के लिए क्यों बुलाता है।
2 कुरिन्थियों 1:3–4 में, पौलुस परमेश्वर की स्तुति करता है और हमें उसके स्वरूप का अद्भुत परिचय देता है:
“हमारे प्रभु यीशु ख्रीष्ट के परमेश्वर और पिता का, जो दया का पिता और सब प्रकार की शान्ति का परमेश्वर है, धन्यवाद हो। वही हमारे सब क्लेशों में हमें शान्ति देता है।”
दया के पिता ने पापियों का उद्धार करने के लिए अपने पुत्र को संसार में भेजकर हमारे क्लेश में हमें शान्ति प्रदान की। अपने महान् प्रेम के कारण पिता ने यीशु ख्रीष्ट को भेजा, जिससे कि वह हमें उस अपवित्रता से छुड़ाए, जिसमें हम अपने पाप के कारण स्वयं गिर पड़े थे। हमारे पिता ने हमारे लिए उद्धारकर्ता, प्रभु यीशु ख्रीष्ट को भेजा, जिससे कि वह हमें अपने सामने धर्मी ठहराए। केवल अनुग्रह से, केवल विश्वास के द्वारा, और केवल ख्रीष्ट के उद्धारकारी कार्य के आधार पर परमेश्वर के साथ हमारा मेल हुआ है (रोमियों 5:1–2)।
परन्तु हमारा दयालु पिता केवल हमें धर्मी ठहराकर अपने साथ सही सम्बन्ध में स्थापित करने से ही सन्तुष्ट नहीं है। उसकी इच्छा यह भी है कि जैसे वह पवित्र है, वैसे ही हम भी पवित्र हों (1 पतरस 1:15–16)। इसलिए, परमेश्वर हमें हमारे प्रभु यीशु ख्रीष्ट के स्वरूप के अनुसार नया भी बनाता है। इस प्रकार, सुसमाचार का शुभ सन्देश यह है कि—
ख्रीष्ट, जिसने अपने लहू के द्वारा हमारा छुटकारा किया है,
वही अपने आत्मा के द्वारा हमें अपने स्वरूप में नया भी बना रहा है।
(हाइडेलबर्ग कैटेकिज़्म, प्रश्न 86)
अतः हमें इस निश्चित और सान्त्वनापूर्ण आश्वासन के साथ पवित्रता का अनुसरण करने के लिए बुलाया गया है कि पवित्रता हमारे स्वर्गीय पिता की हमारे लिए योजना है, और पवित्र आत्मा की सामर्थ्य के द्वारा ख्रीष्ट स्वयं इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए कार्य कर रहा है। हमें उसके इस कार्य में सहभागी होना और उसके साथ सहयोग करना है। तथापि, परमेश्वर के इस नवीकरण के कार्य की सफलता हम पर निर्भर नहीं करती, वरन् हमारे त्रिएक परमेश्वर पर निर्भर करती है, जिसका यह कार्य है। पवित्र आत्मा 1 थिस्सलुनीकियों 5:23–24 में हमें इस सत्य का आश्वासन देता है: “शान्ति का परमेश्वर स्वयं तुम्हें पूर्ण रीति से पवित्र करे; और तुम्हारी आत्मा, प्राण और शरीर हमारे प्रभु यीशु ख्रीष्ट के आने तक निर्दोष सुरक्षित रखे जाएँ। जिसने तुम्हें बुलाया है, वह विश्वासयोग्य है, और वही यह कार्य अवश्य पूरा करेगा।” परमेश्वर चाहता है कि हम पवित्र हों, इसलिए वह प्रतिज्ञा करता है कि वह स्वयं कार्य करेगा, जिससे कि उसकी यह इच्छा हमारे जीवन में पूरी हो।
परमेश्वर हमारे पवित्रीकरण और नवीकरण की इतनी चिन्ता इसलिए करता है क्योंकि वह चाहता है कि हम उसके राज्य में उसके साथ जीवन बिताने के योग्य बनें। हम जानते हैं कि परमेश्वर का राज्य “धार्मिकता, शान्ति और आनन्द” का राज्य है (रोमियों 14:17)। परमेश्वर जानता है कि धार्मिकता के बिना उसकी प्रजा उसके राज्य की शान्ति और आनन्द का अनुभव नहीं कर सकती।
मनुष्य के पतन के समय जो हुआ, उसे स्मरण कीजिए। हमने धार्मिकता को छोड़कर अधार्मिकता को अपना लिया। ऐसा करके हमने परमेश्वर के साथ उस शान्ति को नष्ट कर दिया जिसका कभी हम आनन्द लेते थे, और उसके स्थान पर उसके साथ बैर उत्पन्न कर लिया। हमने उसके साथ संगति के आनन्द को त्यागकर उससे पृथक होने की दुःखद अवस्था को अपना लिया। परन्तु परमेश्वर जीवन देने वाला परमेश्वर है। उसने हमें अपने साथ धार्मिकता, शान्ति और आनन्द में जीवन बिताने के लिए बनाया था। इसलिए, उसने हमारे साथ उस सम्बन्ध को पुनः स्थापित करने का निश्चय किया (उत्पत्ति 3:15)।
हमारा दयालु स्वर्गीय पिता चाहता है कि हम भजन संहिता 1 के उस मनुष्य के समान हों, जो यहोवा की व्यवस्था में आनन्दित रहता है और दिन-रात उसी पर मनन करता है। क्यों? क्योंकि ऐसा मनुष्य—
बहते जल की धाराओं के किनारे लगाए गए वृक्ष के समान है,
जो अपने समय पर फल देता है,
जिसकी पत्तियाँ कभी नहीं मुरझातीं;
और जो कुछ वह करता है, उसमें सफल होता है।
(भजन संहिता 1:3)
जब हम परमेश्वर की व्यवस्था को जीवन देने वाले परमेश्वर की जीवन-आशीष देने वाली व्यवस्था के रूप में समझते हैं, तभी हम उसमें आनन्दित होते हैं। परमेश्वर चाहता है कि हम पवित्रता का अनुसरण करें, क्योंकि उसकी इच्छा है कि हम स्थिर, फलवन्त, दृढ़ और अब तथा सदा के लिए समृद्ध हों। हमारे लिए पिता की इच्छा यह है—
ख्रीष्ट के द्वारा परमेश्वर में पूरे मन से आनन्दित होना,
और परमेश्वर की इच्छा के अनुसार
हर प्रकार के भले कार्य करते हुए
जीवन व्यतीत करने में प्रेम और आनन्द पाना।
(हाइडेलबर्ग कैटेकिज़्म, प्रश्न 90)
पवित्रता के हमारे अनुसरण में, ख्रीष्ट के प्रति कृतज्ञता विधिवाद का सबसे प्रभावी प्रतिरोधक है। हम पवित्रता का अनुसरण इसलिए नहीं करते कि स्वयं को परमेश्वर के योग्य सिद्ध करें। हम पवित्रता का अनुसरण इसलिए करते हैं क्योंकि ख्रीष्ट के लहू के द्वारा हमें छुटकारा मिला है, और ख्रीष्ट का आत्मा हमारे भीतर नवीकरण का कार्य कर रहा है। हम आनन्द के साथ पवित्रता का अनुसरण करते हैं, क्योंकि इसी उद्देश्य के लिए हमें रचा गया था और इसी उद्देश्य के लिए हमें नया बनाया गया है।
“क्योंकि अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार विश्वास के द्वारा हुआ है; और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्वर का दान है। और न कर्मों के कारण, ताकि कोई घमण्ड न करे। क्योंकि हम उसी की रचना हैं, और ख्रीष्ट यीशु में उन भले कार्यों के लिए सृजे गए हैं, जिन्हें परमेश्वर ने पहले से तैयार किया, ताकि हम उनमें चलते रहें।”
(इफिसियों 2:8–10)
परमेश्वर हमें विधिवाद से सुरक्षित रखे और जब हम पवित्रता का अनुसरण करें, तब अपने अनुग्रह और पवित्र आत्मा के द्वारा हमारा मार्गदर्शन करे।
यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

