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हमारा त्रिएक परमेश्वर

सम्पादक की टिप्पणी: यह टेबलटॉक पत्रिका श्रंखला का पहलाअध्याय है: त्रिएकता

यह बढ़ते हुए प्रचलित हो रहा है कि लोग अपने संस्करण के सत्य के सन्दर्भ में बात करते हैं। वे “मेरा सत्य” और “आपका सत्य” जैसे वाक्यांशों को उपयोग करते हैं, मानो कि सत्य के अलग-अलग संस्करण हैं। मैंने लोगों को “मेरे सत्य” की बात करते हुए सुना है विभिन्न विषयों के सन्दर्भ में, जिनमें इतिहास, नैतिकता, विज्ञान, और धर्म सम्मिलित हैं। यद्यपि हमें अपने विचार रखने का अधिकार है, हमारे पास स्वयं के सत्य के संस्करण रखने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि यह असम्भव है कि सत्य के एक से अधिक संस्करण अस्तित्व में हों।

इस प्रकार की सोच केवल भूतकाल का सापेक्षवाद या उत्तर-आधुनिक अनेकवाद या धार्मिक समन्वयता नहीं है। यह नई प्रकार की सोच प्रत्ययवाद को मूर्त रूप देती है। प्रत्ययवाद की दार्शनिक मानसिकता उत्तर-आधुनिक युग चेतना (युग की आत्मा) के आवश्यक परिणामस्वरूप उभरा है, जिसके द्वारा हम अन्य लोगों से सम्बन्ध रख सकते हैं जिनसे हम असहमत हैं किन्तु जिनके साथ फिर भी सामंजस्य स्थापित कर पाएं। प्रत्ययवाद लोगों को अपने स्वयं द्वारा निर्मित सत्य की वास्तविकताओं को उत्पन्न करने के लिए एक मार्ग देता है ताकि वे जो विश्वास करना चाहें, विश्वास करें और अपने सत्य के संस्करण के अनुसार जो खण्डन करना चाहें, उसे खण्डन करें—तब भी जब उनके द्वारा निर्मित वास्तविकता तथ्यात्मक वास्तविकता पर आधारित न हो। अब लोगों के पास अपने स्व-निर्मित वास्तविकताएं हो सकती हैं जिन में वे अधिकार से कहते हैं कि उनके पास स्वयं का सत्य है जबकि अन्य लोगों (जिनसे वे असहमत हैं) के पास स्वयं का सत्य है, और दोनों सत्य सब लोगों के लिए सच नहीं हैं। यह सब इसलिए किया जाता है ताकि वे कक्षा, कार्यस्थल, इन्टरनेट, और कलीसिया के साझे के वातावरण में सामंजस्य स्थापित कर पाएं।

जबकि प्रत्ययवाद संसार में विनाशकारी रीति से अपने आप को प्रकट कर रहा है, यह कलीसिया में पूर्ण रीति से घातक प्रमाणित हो रहा है। हम इस प्रकार की सोच को सर्वाधिक देखते हैं परमेश्वर के विषय में लोगों की बातों में। यह सामान्य हो गया है कि लोग “मेरे परमेश्वर” और “आपके परमेश्वर” की बात करते हैं, जब वे अपने दृष्टिकोण की रक्षा करते हैं कि उनका परमेश्वर कौन है और उनका परमेश्वर क्या कर सकता या नहीं कर सकता है, जैसे कि “मेरा परमेश्वर प्रकोप का परमेश्वर नहीं है; मेरा परमेश्वर केवल प्रेम का परमेश्वर है।” या “मेरा परमेश्वर वैसा नहीं करता . . आपका परमेश्वर सम्भवतः करे, पर मेरा परमेश्वर नहीं।” पर क्योंकि हमें सत्य के विषय में अपने स्वयं के संस्करण रखने का अधिकार नहीं है, हमारे पास परमेश्वर के विषय में अपने स्वयं के संस्करण रखने का अधिकार नहीं है। हमारे पास अधिकार नहीं है कि इस विषय में अपने स्वयं के संस्करण रखें कि परमेश्वर क्या करता है या परमेश्वर कौन है। हमें एक सच्चे परमेश्वर के पीछे चलना है, जो पिता, पुत्र, और पवित्र आत्मा है, और इसलिए यदि हमें इस परमेश्वर को जानना है और इसकी आराधना करना है, और स्वयं द्वारा निर्मित परमेश्वर की नहीं, हमें अपने त्रिएक परमेश्वर के विषय में जानना होगा। हमें जानना चाहिए कि हम परमेश्वर के सम्बन्ध में क्या पुष्टि करते हैं और क्या खण्डन करते हैं। क्योंकि एक त्रिएक परमेश्वर है, और हम उसे अपने स्वरूप में या हमारे द्वारा निर्मित वास्तविकता के अनुसार नहीं बना सकते हैं जो हम सोचते हैं कि उसे होना चाहिए। एक ही परमेश्वर है, और हम वह नहीं हैं, और अन्य कोई नहीं है।

यह लेख मूलतः टेबलटॉक पत्रिका में प्रकाशित किया गया।
बर्क पार्सन्स
बर्क पार्सन्स
डॉ. बर्क पार्सन्स टेबलटॉक पत्रिका के सम्पादक हैं और सैनफोर्ड फ्ला. में सेंट ऐंड्रूज़ चैपल के वरिष्ठ पास्टर के रूप में सेवा करते हैं। वेअश्योर्ड बाइ गॉड : लिविंग इन द फुलनेस ऑफ गॉड्स ग्रेस के सम्पादक हैं। वे ट्विटर पर हैं @BurkParsons.