हमारा मार्गदर्शन करने वाला सिद्धान्त:
सत्य की बहुमूल्यता


हमारी सेवा का मार्गदर्शन करने वाला प्रमुख सिद्धान्त सत्य की बहुमूल्यता है। यद्यपि हम लोगों को मनाने, समझाने, और प्रोत्साहित करने का प्रयास करते हैं, हम सावधानी से ऐसे तरीकों से बचते हैं जो तोड़ते-मरोड़ते हैं, जैसे कि झूठा दोष लगाना, या सेवकाई की आवश्यकताओं या लाभों को बढ़ा-चढ़ा कर बताना। इसलिए, हम निम्न मानकों के प्रति समर्पित होते हैं:

  • हम आर्थिक संकट के समय में भी “संकट निवेदन” नहीं करते हैं।
  • हम लोगों को आर्थिक सहयोग या बिक्री के लिए परेशान नहीं करते हैं।
  • हम बिक्री करने के लिए प्रलोभन युक्ति का प्रयोग नहीं करते हैं।
  • हम उत्पादों  की कीमत निर्धारित करने के लिए झूठे सस्ते दामों का उपयोग नहीं करेंगे।
  • हम ऐसे झूठे लाभों की प्रतिज्ञा नहीं करेंगे जिनकी निश्चयता हम नहीं दे सकते हैं।
  • हम दोषपूर्ण पदार्थों के विषय में विद्यार्थियों के आरोपों का प्रतिवाद नहीं करेंगे।
  • हम अपनी आवश्यक्ताओं के आगे अपने विद्यार्थियों की आवश्यक्ताओं को ध्यान देने का प्रयास करेंगे।
  • हम अपने सब विद्यार्थियों के साथ सुशील और विनम्र होंगे।
  • हम माँगों और आर्थिक सहयोग के लिए उत्तर देने में तत्पर रहेंगे।
  • हम नामाँकित धन को उनके नाम के अनुसार उपयोग करेंगे।
  • हम किसी परियोजना के लिए एकत्रित किए गए धन को उसी परियोजना के लिए प्रयोग करेंगे।

ऐसे भण्डारी होने के नाते जिन्हें प्रभु के सामने लेखा देना होगा, यह हमारा लक्ष्य है कि अपने कार्यकर्ताओं में इन व्यवहार की विधियों को विकसित करें:

एक सेवा भाव

  • हमारे सदस्यों की अपेक्षाओं को समझना और उनसे आगे बढ़ना।
  • संसार-भर में लोगों के जीवनों को सुधारने के लिए बाइबल पर आधारित शास्त्रसम्मत उत्पादों और सेवाओं को विकसित करना।
  • परमेश्वर के वचन द्वारा निर्देशित उत्तम नेतृत्व और व्यक्तिगत विकास का प्रावधान करना।

खराई के लिए एक उत्साह

  • सब नियामक स्तरों और माँगों का पालन करना।
  • सेवा और उत्पाद के सब पहलूओं का निरन्तर विश्लेषण और सुधार करने के द्वारा श्रेष्ठता के लिए प्रयत्नशील रहना।
  • पारदर्शिता, निष्ठा, और विश्वसनीयता के द्वारा पारस्परिक रीति से लाभदायक सम्बन्धों को बढ़ावा देना।

विश्वासयोग्यता की एक विरासत

  • संस्था को बाइबल की त्रुटिहीनता और सैद्धान्तिक परमनिष्ठा के प्रति समर्पित रखना।
  • डॉ. स्प्रोल के जीवन की सेवकाई के अनुरूप उत्पाद और सेवाएं तैयार करना।
  • संसाधनों के अच्छे प्रबन्धन को सुनिश्चित करना।