लिग्निएर का ब्लॉग

हम डॉ. आर. सी. स्प्रोल का शिक्षण संघ हैं। हम इसलिए अस्तित्व में हैं ताकि हम जितने अधिक लोगों तक सम्भव हो परमेश्वर की पवित्रता को उसकी सम्पूर्णता में घोषित करें, सिखाएं और रक्षा करें। हमारा कार्य, उत्साह, और उद्देश्य है कि हम लोगों को परमेश्वर के ज्ञान और उसकी पवित्रता में बढ़ने में सहायता करें।

 
11 दिसम्बर 2025

तीर्थयात्री प्रजा

परमेश्वर के लोग हमेशा से वे रहे हैं जिन्हें हम “तीर्थयात्री प्रजा” कह सकते हैं। निर्गमन में पुराने वाचा की कलीसिया की व्यवस्था ने प्राचीन इस्राएलियों को “तीर्थयात्री” और “परदेशी” जैसे नाम दिये।
10 दिसम्बर 2025

जीवन के लिये सच्चा पश्चात्ताप

पश्चात्ताप की धारणा पवित्रशास्त्र में व्यापक रूप से विद्यमान है, फिर भी उसे परिभाषित करना कठिन हो सकता है। एक ओर तो पश्चात्ताप वह सर्वथा स्वाभाविक कार्य है जिसे पापी कर सकते हैं; दूसरी ओर, पश्चात्ताप अत्यन्त आत्मिक कार्य भी है।
4 दिसम्बर 2025

भय एवं अनिश्चितता

मृत्यु वह सबसे बड़ी समस्या है जिसका सामना मनुष्य करता है। हम उसके विचारों को अपने मन के दूरस्थ कोणों में दबाने का प्रयत्न कर सकते हैं, किन्तु हम अपनी नश्वरता के बोध को पूर्णतः मिटा नहीं सकते। हमें ज्ञात है कि मृत्यु का छाया हमारी प्रतीक्षा कर रही है।
3 दिसम्बर 2025

प्रचार और शिक्षा

एक दशक से भी अधिक समय पहले मुझे प्रचार के विषय में मार्टिन लूथर के दृष्टिकोण पर एक व्याख्यान देने के लिए आमन्त्रित किया गया था, और मैंने पाया कि उसकी तैयारी ने एक प्रचारक के रूप में मेरे अपने कार्य के लिए बहुत मूल्यवान सिद्ध हुई।
27 नवम्बर 2025

यीशु के समान सोचना

कुछ वर्ष पहले मुझे अमेरिका के एक प्रमुख ईश्वरविज्ञानिय सेमिनरी के दीक्षान्त समारोह में भाषण देने हेतु आमन्त्रित किया गया था। उस भाषण में मैंने बाइबलिय व्याख्या में तर्कशास्त्र की महत्वपूर्ण भूमिका के विषय पर बोला और मैंने सेमिनरियों से यह आग्रह किया कि वे अपने अनिवार्य पाठ्यक्रमों में तर्कशास्त्र के पाठ सम्मिलित करें।
20 नवम्बर 2025

प्रेम जो कि धैर्यवान और कृपालु है

1 कुरिन्थियों 13 पवित्रशास्त्र के सबसे प्रसिद्ध खण्डों में से एक है, क्योंकि इसमें प्रेरित पौलुस हमें ईश्वरीय प्रेम के स्वभाव का एक अद्भुत अर्थप्रकाशन देता है।
18 नवम्बर 2025

हृदय पर एक धर्मप्रश्नोत्तरी

कभी-कभी लोग लेखकों से पूछते हैं, “आपकी लिखी हुई पुस्तकों में से आपको सबसे अच्छी कौन सी लगती हैै?” जब पहली बार यह प्रश्न पूछा जाता है, तो उत्तर प्रायः होता है, “मैं नहीं जानता; मैंने वास्तव में इस पर कभी विचार ही नहीं किया।”
13 नवम्बर 2025

धर्मसुधारवादी परमेश्वर का धर्मसिद्धान्त

ईश्वरविज्ञान, निस्सन्देह, परमेश्वर, उसके चरित्र और उसकी कार्यप्रणाली का अध्ययन करता है; इसलिए यह उचित है कि उद्धार, कलीसिया, अन्तिम बातें और विधिवत ईश्वरविज्ञान की अन्य शाखाओं पर विचार करने से पहले हम परमेश्वर के स्वभाव और उसके गुणों पर दृष्टि डालें।
11 नवम्बर 2025

वेस्टमिन्स्टर ईश्वरविज्ञानी कौन थे?

वेस्टमिन्स्टर सभा (1643–53) इंग्लैण्ड में गहन धार्मिक और राष्ट्रीय उथल-पुथल के समय में बुलाई गई थी और उसने कुछ महत्त्वपूर्ण ईश्वरविज्ञानिय मानक तैयार किए—विशेष रूप से वेस्टमिन्स्टर अंगीकार-वचन और दीर्घ तथा लघु प्रश्नोत्तरी (Catechisms)—जिनका प्रभाव और महत्त्व आज भी विश्वभर में बना हुआ है।