लिग्निएर का ब्लॉग

हम डॉ. आर. सी. स्प्रोल का शिक्षण संघ हैं। हम इसलिए अस्तित्व में हैं ताकि हम जितने अधिक लोगों तक सम्भव हो परमेश्वर की पवित्रता को उसकी सम्पूर्णता में घोषित करें, सिखाएं और रक्षा करें। हमारा कार्य, उत्साह, और उद्देश्य है कि हम लोगों को परमेश्वर के ज्ञान और उसकी पवित्रता में बढ़ने में सहायता करें।

 
5 फ़रवरी 2026

मसीही सिद्धान्त में ऑगस्टीन के सकारात्मक योगदान

ऑगस्टीन का जीवन और शिक्षाएँ हमें दिखाती हैं कि परमेश्वर का अनुग्रह जीवन बदल सकता है और विश्वासियों को सत्य, नम्रता और आत्मिक विकास की ओर मार्गदर्शन देता है।
3 फ़रवरी 2026

पवित्र आत्मा के वरदान

पवित्र आत्मा आज भी विश्वासियों के जीवन में फल उत्पन्न करता है और उन्हें ख्रीष्ट के समान बनाता है।
29 जनवरी 2026

जोनाथन एडवर्ड्स के संकल्प

अपने सम्पूर्ण जीवन में, परमेश्वर के साथ चलो और एक छोटे, निर्धन, लाचार बच्चे के समान ख्रीष्ट का अनुसरण करो, ख्रीष्ट का हाथ पकड़ो, और अपनी दृष्टि को उसके हाथ और पंजर पर लगे चोट के निशान पर रखो।
27 जनवरी 2026

पवित्र आत्मा का फल

पवित्र आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, शान्ति, धीरज, दयालुता, भलाई, विश्वासयोग्यता, नम्रता और संयम है—ये सब मिलकर ख्रीष्ट-सदृश जीवन का चिन्ह हैं, जो हमें परमेश्वर के समान बनने की ओर अग्रसर करते हैं।
22 जनवरी 2026

छुटकारे में पवित्र आत्मा का कार्य

हवा की तरह पवित्र आत्मा अदृश्य होकर भी सामर्थ्य से कार्य करता है। यह लेख सृष्टि, छुटकारे और विश्वासी के जीवन में पवित्र आत्मा के महान और संप्रभु कार्यों को स्पष्ट करता है, जो हमें स्तुति और आज्ञाकारिता की ओर ले जाते हैं।
20 जनवरी 2026

इतिहास में पवित्र-आत्मा का कार्य

सृष्टिकर्ता के रूप में  पवित्र आत्मा के कार्य बाइबल के दूसरे पद में प्रकट होता है। अविकसित सृष्टि को “बेडौल और वीरान” और “अन्धियारे में” बताते हुए, लेखक परमेश्वर की आत्मा को “जल की सतह पर मण्डराते हुए” बताता है (उत्पत्ति 1:2)।
15 जनवरी 2026

कलीसिया में अगुवाई

भक्ति-पूर्ण सेवकाई और अगुवाई का पहला सिद्धान्त यही होना चाहिए—कि हम हमारे बोलने में,  हमारे आचरण में, या हमारे दृष्टिकोण में, अपने आप को ऊँचा मानने के भाव को न अपनाएँ।
13 जनवरी 2026

कार्यों की वाचा

जब हम नये नियम में ख्रीष्ट के छुटकारे के कार्य को समझते हैं, तो हम मुख्यतः उसके दो पक्षों पर ध्यान केन्द्रित करते हैं। एक ओर, हम प्रायश्चित को देखते हैं। नया नियम स्पष्ट करता है कि प्रायश्चित्त में यीशु अपने लोगों के पापों को उठाता है और हमारे स्थान पर उनके लिए दण्ड भोगता है।
8 जनवरी 2026

परमेश्वर-मनुष्य क्यों?

जब कलीसिया यह अंगीकार करती है कि परमेश्वर की धार्मिकता के सन्तुष्ट होने की आवश्यकता है, तो यह आवश्यकता कोई ऐसी बात नहीं है जो परमेश्वर पर बाहर से लादी गई हो, वरन् यह आवश्यकता उसके अपने ही चरित्र और स्वभाव से उत्पन्न होती है।