लिग्निएर का ब्लॉग

हम डॉ. आर. सी. स्प्रोल का शिक्षण संघ हैं। हम इसलिए अस्तित्व में हैं ताकि हम जितने अधिक लोगों तक सम्भव हो परमेश्वर की पवित्रता को उसकी सम्पूर्णता में घोषित करें, सिखाएं और रक्षा करें। हमारा कार्य, उत्साह, और उद्देश्य है कि हम लोगों को परमेश्वर के ज्ञान और उसकी पवित्रता में बढ़ने में सहायता करें।

 
28 जून 2022

1 यूहन्ना 4:8

प्रेरित यूहन्ना कभी भी मसीहियों को एक दूसरे से प्रेम करने के लिए प्रेरित करते हुए नहीं थके, और अभी हमारे सामने का खण्ड उनके द्वारा प्रदान किए गए सबसे सामर्थी उपदेशों में से एक है।
24 जून 2022

1 यूहन्ना 2:27

जब फर्स्ट रिमॉर्मड कलीसिया के प्राचीनों ने सुना कि लम्बी अवधि से गृह बाइबल अध्ययन के का एक शिक्षकों अपने अध्ययन प्रतिभागियों को यह बता रहा था कि यीशु एक परमेश्वरीय प्राणी तो था परन्तु सामर्थ्य, महिमा और अधिकार में पिता के समान नहीं था, तो उन्होंने उसे उसके विचारों पर बात करने के लिए सत्र बैठक के लिए बुलाया।
21 जून 2022

फिलिप्पियों 4:13

पिछली बार आपने किसी खिलाड़ी को एक हार के पश्चात् कब यह कहते सुना था, “जो मुझे सामर्थ प्रदान करता है उसके द्वारा मैं सब कुछ कर सकता हूँ?” अमरीकी खेल-कूद में, एक खेल के पश्चात् किसी विजेता का फिलिप्पियों 4:13 को उद्धृत करना असाधारण बात नहीं है, परन्तु हम दुर्लभ ही हारने वाले पक्ष की ओर से इसे सुनते हैं।
16 जून 2022

गलातियों 3:28

गलातियों 3:28 में पौलुस के कथन को विभिन्न त्रुटिपूर्ण विचारों का समर्थन करने के लिए उद्धृत किया गया है, परन्तु सामान्यतः दो रीतियों में इसका त्रुटिपूर्ण अर्थ निकाला जाता है।
14 जून 2022

1 कुरिन्थियों 13:13

स्पष्ट बाइबलीय शिक्षा को क्षीण करने के लिए प्रायः यह आपत्ति उठायी जाती है: “परन्तु यह प्रेममय नहीं है।”
9 जून 2022

1 कुरिन्थियों 2:4

सेवकाई करने की रीति महत्व रखती है। पहला कुरिन्थियों 2:4 हमें बताता है कि पौलुस ने अपनी पूरी सेवकाई के लिए एक ऐसी प्रणाली को निश्चित किया जिसका उसके सन्देश के साथ सामन्जस्य हो।
7 जून 2022

मत्ती 18:20

कितनी बार हमने एक पास्टर को आराधना सभा, संगति सभा या प्रार्थना सभा में प्रभु की उपस्थिति की पुष्टि करने के लिए इस पद को उद्धृत करते हुए सुना है? “क्योंकि जहाँ दो या तीन मेरे नाम से एकत्रित होते हैं, वहाँ मैं उनके बीच में हूँ” (मत्ती 18:20)।
2 जून 2022

मत्ती 7:1

हमारे दिनों में कुछ ही स्थलों को मत्ती 7:1 से अधिक त्रुटिपूर्वक समझा गया है: “दोष न लगाओ जिससे तुम पर भी दोष न लगाया जाए।” यह वार्तालाप में प्रायः तब सामने आता है जब कोई किसी दूसरे व्यक्ति का नैतिक मूल्यांकन करने का साहस करता है जो कि सुनने वाले में क्रोध ले आता है।
31 मई 2022

यिर्मयाह 29:11

यिर्मयाह 29:11 में एक बहुमूल्य प्रतिज्ञा है जो संसार भर के मसीहियों को प्रिय है। साथ ही साथ यह पूरे पवित्रशास्त्र के सबसे अधिक त्रुटिपूर्ण रीति से लागू किए गए पदों में से एक है।