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23 अप्रैल 2026मसीही जीवन में आशा की भूमिका
मसीही गुणों में तीन बातें अर्थात विश्वास, आशा तथा प्रेम तीनों ही अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं। यद्यपि प्रेम बहुत महत्वपूर्ण है (1 कुरिन्थियों 13:13), फिर भी हम जानते हैं कि विश्वास भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। समझते हैं और प्रेम के महत्व को भी जानते हैं, परन्तु प्राय: इन तीन गुणों में तीसरा गुण, अर्थात् आशा, मसीही अनुभव में प्रायः उपेक्षित रह जाता है।
यदि रोमियों 5 में कोई ऐसा शब्द है जिसे हम आसानी से गलत समझ सकते हैं, तो वह है आशा। सदैव हमारे मन में इस शब्द के साथ सन्देह का एक तत्व जुड़ा रहता है, जो पौलुस के इस शब्द के उपयोग को समझने में बाधा बनता है। जब हम “आशा” शब्द का प्रयोग करते हैं, तो सामान्यत: इसका अर्थ किसी इच्छा या अभिलाषा से होता है, ऐसी बात जिसकी हमें निश्चयता नहीं होती कि वह वास्तव में होगा कि नहीं। परन्तु नए नियम में यह शब्द इस प्रकार कार्य नहीं करता। जब हम पवित्र आत्मा के द्वारा नए जन्म को प्राप्त करते हैं, तब हम एक ऐसी आशा में नए सिरे से जन्म लेते हैं जो मसीही जीवन में जीने के लिए हमारे भरोसे का आधार बनती है। वास्तव में आशा और विश्वास के बीच केवल इतना ही भेद है कि विश्वास उस बात की ओर देखता है जो पहले ही घटित हो चुकी है और हम उस पर भरोसा रखते हैं। जबकि आशा वही विश्वास है जो भविष्य की ओर देखता है।
नए नियम में आशा के स्वभाव को समझाने के लिए जिस रूपक का उपयोग किया गया है वह एक लंगर का है। हमें बताया गया है कि आशा आत्मा का लंगर है। यह समुद्री चित्र नए नियम में बार-बार दिखाई देता है। अस्थिर लोगों की तुलना उन नावों से की जाती है जिनका कोई लंगर नहीं होता, जो हर प्रकार की शिक्षा की हवा से इधर- उधर उछाली जाती हैं। ऐसे लोग अस्थिरता और अनिश्चितता से भरे होते हैं। परन्तु वह आशा जो पवित्र आत्मा के द्वारा हमारे हृदय में स्थापित की जाती है, वह ऐसी नहीं होती। यह आशा हमें आधार, स्थिरता और निश्चय प्रदान करती है। यह वही लंगर है जो हमें इधर-उधर उड़ जाने से बचाए रखता है। यह आशा इस निश्चित विश्वास पर आधारित है कि परमेश्वर भविष्य में वह सब कुछ अवश्य पूरा करेगा जो उसने कहा है।
धर्मीकरण का फल इसी प्रकार की आशा है। एक अर्थ में, धर्मीकरण उन सब का अग्रिम भुगतान है जिसे परमेश्वर अपने उद्धार के कार्य में हमें देने की प्रतिज्ञा करते हैं। यह आशा पवित्र आत्मा के द्वारा हमारे भीतर उत्पन्न की जाती है। अन्य स्थानों पर पौलुस कहता है कि परमेश्वर ने हमें पवित्र आत्मा को “बयाना” या अग्रिम राशि के रूप में दिया है, जो हमें भविष्य के विषय में पूर्ण आश्वासन प्रदान करता है। इस प्रकार, आशा का अर्थ केवल गहरी श्वांस लेकर यह सोच लेना नहीं है कि सम्भवत: सब कुछ ठीक हो जाएगा। किन्तु यह दृढ़ निश्चय है कि परमेश्वर वही करेगा जो उसने करने की प्रतिज्ञा की है।
यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

