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16 जुलाई 2026हम ख्रीष्टजन्मोत्सव (क्रिसमस) पर गीत क्यों गाते हैं?
सम्पूर्ण इतिहास में लोगों कों गीत गाना प्रिय रहा है। भले क्रिकेट का खेल हो या जन्मदिन का उत्सव हो, हम उत्साह के साथ गाते हैं , कभी कभी सार्वजनिक रूप से अपनी स्वाभाविक संगीत प्रतिभा की कमी को उजागर करते हुए। विशेषकर ख्रीष्टजन्मोत्सव (क्रिसमस) के अवसर पर सामूहिक रूप से गीत गाना हमारी संस्कृति का एक अभिन्न अंग बन चुका है। परन्तु ऐसा क्यों है कि क्रिसमस के कैरल और भजन गाना, भले ही हम उन्हें केवल औपचारिक रीति से गा रहे हों और उनके शब्दों के अर्थ में हमारी कोई रूचि न हो, फिर भी हमारे ऊपर इतना गहरा प्रभाव क्यों डालता है?
आराधना-सभा के समय गीत गाने को लेकर सर्वदा से यह बहस होती रही है कि गीत कैसे और क्यों गाए जाएँ। 1861 में, जॉन वेस्ली ने मेथोडिस्ट समुदाय को इस विषय में निर्देश देने के लिए “गीत गाने के लिए निर्देश” लिखे थे। जब से ये निर्देश छपे हैं, तब से इन्होंने केवल मेथोडिस्ट समुदाय पर ही नहीं, वरन् और लोगों पर भी प्रभाव डाला है। इनमें से दो निर्देश नीचे दिए गए हैं:
उत्साह और साहस के साथ गाइए – ऐसे मत गाइए मानो आप आधे मरे हुए या आधे सोए हुए हों; किन्तु अपनी आवाज़ को सामर्थ के साथ ऊँचा उठाइए। अपनी आवाज़ से अब उतना भयभीत या उसे सुनाए जाने में उतना लज्जित न हों, जितने आप तब नहीं थे जब आप शैतान के गीत गाया करते थे।
विनम्रता के साथ गाइए – इस प्रकार, इतने उँचे स्वर में न गाइए कि आपकी आवाज़ पूरी मण्डली से अलग या उनसे अधिक सुनाई दे, जिससे सामंजस्य नष्ट हो जाए। किन्तु प्रयास कीजिए कि आपके स्वर एक साथ मिलकर एक मधुर ध्वनि उत्पन्न करे।
अपनी सीमाओं के बाद भी, ख्रीष्टजन्मोत्सव के समय ही हम अपनी “आवाज़ को सामर्थ के साथ ऊँचा उठाते हैं।” सम्भवत: इसका कारण यह है कि हम इन गीतों को वास्तव में जानते हैं। वास्तव में, परिचित होना ही वह आधार है जो लोगों को सहभागिता के लिए प्रोत्साहित करता है। प्रेरित पौलुस ने मसीहियों को प्रोत्साहित किया कि वे अपनी योग्यता या संगीत-कौशल के स्तर की चिन्ता किए बिना, “अपने हृदयों में परमेश्वर के प्रति धन्यवाद के साथ” गीत गाएँ (कुलुस्सियों 3:16)।
गीत गाना सीखने का सबसे उत्तम स्थान कलीसिया है। हम जीवन भर भजनों, स्तुति-गीतों और आत्मिक गीतों को सरलता से स्मरण रखते हैं। जैसे-जैसे हमारी आयु बढ़ती है, हम उन्हें नहीं भूलते, क्योंकि विशेषज्ञों के अनुसार, गीत गाने की क्रिया हमारे मस्तिष्क में स्मरण किए गए शब्दों और सुरों से जुड़ी तन्त्रिकाओं को सक्रिय कर देती है। ख्रीष्टजन्मोत्सव के समय वृद्धाश्रमों में वे निवासी भी, जो सामान्यतः किसी गतिविधि में भाग नहीं लेते, “संसार के लिए आनन्द” (Joy to the World) और “पवित्र रात्रि” (Silent Night) जैसे गीतों को गाने के लिए उत्साहित हो उठते हैं।
हमें आनन्द प्रदान करने के अतिरिक्त, ख्रीष्टजन्मोत्सव के कई गीत हमें सिखाते भी हैं। ये गीत धर्मसैद्धान्तिक रूप से अत्यन्त समृद्ध होते हैं। मार्टिन लूथर ने 1520 के दशक और उसके बाद स्थापित नई लूथरन कलीसियाओं की आत्मिक उन्नति के लिए गीतों को एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में उपयोग किया। वे कैरल गीतों और प्रश्नोत्तरी (catechism) को गाते थे, और इसके पीछे उचित कारण यह था कि नवस्थापित कलीसियाएँ के लिए गीत शिक्षा देने का एक प्रमुख माध्यम बन गया था।
संगीत आज भी हमें मसीही संगति में आकार देता है। सेंट एण्ड्रूज़ चैपल (Saint Andrew’s Chapel) में, आर.सी. स्प्रोल प्रायः केवल आदतन आराधना करने के स्थान पर आराधना के “क्यों” को समझाने के लिए समय निकालते थे। किसी गीत के बाद वे पूछते थे, “क्या आप समझते हैं कि आप अभी क्या गा रहे थे?” उनके लिए, गायन परमेश्वर के वचन को आत्मसात करने का एक महत्वपूर्ण साधन था।
क्रिसमस के गीतों में ईश्वरविज्ञान किस प्रकार कार्य करता है? आइए कुछ उदाहरणों पर दृष्टि डालें।
“Joy to the World, the Lord Is Come” (आनन्द मनाओ, प्रभु आ गया है )
इसे एंटीओक (ANTIOCH) धुन पर गाया जाता है, जिसे लोवेल मेसन ने हैंडेल के धुन से व्यवस्थित किया था। आइज़क वाट्स के लिखे हुए इस गीत के शब्द परमेश्वर की महिमा, प्रभुता, पवित्रता, सत्य और अनुग्रह जैसे विषयों का वर्णन करता है। यह परमेश्वर के गुणों का ऐसा संकलन है, जिसे कोई भी प्रचारक उद्धृत कर सकता है।
“O Come, O Come, Emmanuel” ( आओ, आओ इम्मानुएल)
इसे ‘वेनी इमैनुएल’ (VENI EMMANUEL) धुन पर गाया जाता है, जो एक प्राचीन भजन-धुन (plainsong) है। यह गीत इम्मानुएल के आगमन के लिए एक उत्सुक और भावपूर्ण प्रार्थना है, जो यशायाह की भविष्यवाणी से आरम्भ होकर बालक यीशु के स्वभाव और उद्देश्य से सम्बन्धित अनेक सन्दर्भों की ओर बढ़ता है।
“Comfort, Comfort Ye My People” (मेरी प्रजा को शान्ति दो, शान्ति दो)
इसे लुईस बुर्जुआ (जिनेवन साल्टर के संगीतकार) द्वारा रचित ‘थर्स्टिंग’ (THIRSTING) धुन पर गाया जाता है, जो यशायाह 40:1-2 पर आधारित है। योहान्स ओलेरियस द्वारा लिखित यह सत्रहवीं शताब्दी का गीत परमेश्वर के वचन की भविष्यद्वाणी करने वाली सामर्थ्य तथा उद्धारकर्ता को भेजने में परमेश्वर के उद्देश्य की शिक्षा देता है।
“O Little Town of Bethlehem” (हे बेतलेहेम के छोटे नगर)
इसे एल.एच. रेडनर द्वारा रचित ‘सेंट लुइस’ (ST. LOUIS) धुन पर गाया जाता है। यह उन्नीसवीं शताब्दी का गीत मीका 5:2 की भविष्यवाणी की स्पष्ट पूर्ति को दर्शाती है। फिलिप्स ब्रूक्स द्वारा 1868 में लिखित इस गीत का पाठ यीशु के जन्म के लूका के विवरण का भावानुवाद है, और इसके चौथे पद में एक स्पष्ट सुसमाचार-सम्बन्धी प्रार्थना पाई जाती है:
हे बेतलेहेम के पवित्र बालक,
हम प्रार्थना करते हैं, हमारे पास उतर आ;
हमारे पाप को दूर कर, और हमारे भीतर आ;
आज ही हमारे भीतर जन्म ले।
हम क्रिसमस के स्वर्गदूतों को
महान् आनन्द के समाचार सुनाते हुए सुनते हैं;
हे हमारे पास आ, हमारे साथ निवास कर,
हे हमारे प्रभु इम्मानुएल।
“Thou Who Wast Rich” (तू जो असीम वैभव से सम्पन्न था)
इसे ‘क्वेल एस्ट सेट ओड्यूर एग्रीएबल’ (QUELLE EST CETTE ODEUR AGRÉABLE) धुन पर गाया जाता है, जो चार्ल्स एच. किटसन द्वारा तैयार किया गया एक फ्रांसीसी कैरोल है, और इसके शब्द फ्रैंक हॉटन द्वारा लिखे गए हैं।
तू जो समस्त वैभव से परिपूर्ण था,
प्रेम के कारण निर्धन बन गया;
तूने सिंहासन को चरनी के लिए छोड़ दिया,
नीलम-जड़े महलों को अस्तबल के फर्श के लिए त्याग दिया।
तू जो समस्त स्तुति से परे परमेश्वर है,
प्रेम के कारण मनुष्य बन गया;
इतना नीचे झुककर भी, पापियों को ऊपर उठाता है,
अपनी अनन्त योजना के अनुसार उन्हें स्वर्ग की ओर ले जाता है।
तू जो अवर्णनीय प्रेम है,
हे उद्धारकर्ता और राजा, हम तेरी आराधना करते हैं।
हे इम्मानुएल, जो हमारे भीतर निवास करता है,
हमें वैसा बना जैसा तू हमें बनाना चाहता है।
तो फिर, `हम क्रिसमस के गीत क्यों गाते हैं? निस्सन्देह, वे हमें आनन्द देते हैं, यीशु के जन्म और जीवन को स्मरण करने में सहायता करते हैं, और आत्मिक रूप से हमारा निर्माण करते हैं। क्रिसमस के समय हम परिचित भजनों और कैरल्स के माध्यम से सृष्टि, महिमा, देहधारण और प्रायश्चित (केवल कुछ धर्मसिद्धान्तों का नाम लें तो) जैसे धर्म सिद्धान्तों को दोहराते हैं। इस प्रक्रिया में हमें प्रतिदिन ख्रीष्ट के सुसमाचार के अनुसार जीवन जीने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

