
बाइबल बहुविवाह के विषय में क्या कहती है?
14 जुलाई 2026क्या मुझे सेमिनरी जाना चाहिए?
बहुत से सम्भावित विद्यार्थी जिनसे मैं मिलता हूँ, इस प्रश्न से जूझ रहे होते हैं, “क्या मुझे सेमिनरी जाना चाहिए?” उनमे से कुछ लोग इस प्रश्न को दिशा-निर्देशन के संदर्भ में देखते हैं। वे यह समझने का प्रयास कर रहे होते हैं कि क्या परमेश्वर चाहता है कि वे सेमिनरी जाएँ या कोई अन्य कार्य करें। वहीं कुछ लोग यह सोचते हैं कि डिग्री पूरी करने में लगने वाले समय, धन और अन्य संसाधनों का लाभ वास्तव में मिलेगा या नहीं। वे यह प्रश्न इस रूप में पूछते हैं: “सेमिनरी मेरे लिए क्या करेगी? मुझे इससे क्या प्राप्त होगा?”
इस लेख में मैं पहले प्रकार के विद्यार्थियों को सम्बोधित करूँगा—अर्थात् उन लोगों को, जो यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि परमेश्वर उनसे क्या चाहता है। दूसरे प्रकार के विद्यार्थियों के विषय में मैं किसी अन्य लेख में चर्चा करूँगा। अतः इस लेख का मेरा उद्देश्य उन लोगों से सीधे बात करना है जो यह पूछ रहे हैं कि क्या उन्हें सेमिनरी जाना चाहिए। यदि आप मुझसे व्यक्तिगत रूप से मिल पाते, तो मैं आपको यही सलाह देता।
सबसे पहले, मैं आपको अपनी अभिलाषाओं पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ। क्या आप वास्तव में सेमिनरी जाना चाहते हैं? क्या आपके भीतर बाइबल, ईश्वरविज्ञान और कलीसिया के इतिहास का अध्ययन करने तथा उनमें बढ़ने की इच्छा है? क्या आप अपने शेष जीवन को विश्वास से सम्बन्धित विषयों का शिक्षण देने या उनके विषय में लिखने में लगाने की अभिलाषा रखते हैं? क्या आप परमेश्वर की प्रजा को मसीही जीवन के उतार-चढ़ावों में चरवाही करने तथा उनके साथ “मृत्यु की छाया की तराई” (भजन संहिता 23:4) से होकर चलने की इच्छा रखते हैं?
कई वर्ष पहले, जब मैं स्वयं यह जानने का प्रयास कर रहा था कि परमेश्वर मुझसे क्या चाहता है, तब मैं भी ऐसे ही प्रश्न अपने आप से पूछ रहा था। मुझे स्मरण है कि एक सुबह बाइबल पढ़ते समय मुझे यह एहसास हुआ कि मैं अपना पूरा जीवन परमेश्वर के वचन का अध्ययन करने और उसे उसके लोगों को सिखाने में बिताना चाहता हूँ। यदि आप भी अपने भीतर ऐसी ही अभिलाषाएँ अनुभव करते हैं, तो आपको सेमिनरी जाने पर गम्भीरतापूर्वक विचार करना चाहिए। ऐसी अभिलाषाओं का होना इस बात का मूल्यांकन करने का आवश्यक प्रथम चरण है कि परमेश्वर आपसे क्या करवाना चाहता है।
परन्तु यदि आपको अपनी मन की स्थिति ही स्पष्ट न हो तो क्या करें? ऐसी स्थिति में मैं आपको प्रोत्साहित करूँगा कि आप सेमिनरी का एक पाठ्यक्रम लेकर देखें कि आपको वह वास्तव में रुचिकर लगता है या नहीं। यदि सम्भव हो, तो कक्षा में प्रत्यक्ष उपस्थित होकर अध्ययन करें और उसे औपचारिक शैक्षणिक श्रेय (credit) के साथ लें। इससे आपको विद्यार्थी होने का अनुभव और डिग्री पूरी करने के लिए क्या अपेक्षित होगा, यह समझ में आएगा। क्या आपको निर्धारित पुस्तकें पढ़ना और शोध करना अच्छा लगता है? क्या आप व्याख्यानों की उत्सुकता से प्रतीक्षा करते हैं? क्या अपने सहपाठियों, मित्रों या परिवार के साथ कक्षा में पढ़ी गई बातों पर चर्चा करते समय आप विशेष उत्साह का अनुभव करते हैं? और सम्भवतः सबसे महत्त्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या वह पाठ्यक्रम आपको अगला पाठ्यक्रम लेने की इच्छा उत्पन्न करता है?
दूसरी बात, मैं आपको प्रोत्साहित करूँगा कि आप उन लोगों से बात करें जो आपको सबसे अच्छी तरह जानते हैं। उनसे पूछें कि वे आपके भीतर क्या देखते हैं। क्या वे आपके भीतर बाइबल का अध्ययन करने और उसे सिखाने की इच्छा देखते हैं? क्या उन्होंने आपके भीतर परमेश्वर के वचन को समझने, उसे लागू करने और उसे दूसरों तक पहुँचाने की असाधारण क्षमता देखी है? क्या वे कठिन बाइबिलीय अंशों को सरलता से समझाने का वरदान आपके भीतर देखते हैं? क्या उन्होंने आपके भीतर परमेश्वर के लोगों के प्रति कोमल हृदय देखा है?
मेरी अपनी यात्रा में यह बात मेरे लिए सबसे अधिक सहायक सिद्ध हुई। मेरी पत्नी और मेरे निकटतम मित्रों ने सभी ने मुझसे कहा कि मुझे सेमिनरी जाना चाहिए। जब भी मैं रविवार की कक्षा में शिक्षा देता था या बाइबल अध्ययन का संचालन करता था, तो प्रायः लोग बाद में मेरे पास आकर मुझे सेमिनरी जाने के लिए प्रोत्साहित करते थे। इस पूरी प्रक्रिया में मेरे पास्टर की भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। इन सभी लोगों की सामूहिक गवाही ने उस बात की पुष्टि की, जिसे मैं पहले से ही अपने भीतर अनुभव कर रहा था। इससे मुझे यह समझने में सहायता मिली कि एक उज्ज्वल भविष्य वाली, अच्छे वेतन वाली नौकरी छोड़कर पुनः पढ़ाई करने का विचार करना कोई मूर्खता नहीं थी।
यदि आप अपने भीतर सेमिनरी जाने की अभिलाषा अनुभव कर रहे हैं, और जो लोग आपको सबसे अच्छी तरह जानते हैं वे भी आपको इसी दिशा में प्रोत्साहित कर रहे हैं, तो मेरा विचार है कि आपको अवश्य जाना चाहिए। ऐसा करने से पहले यह आवश्यक नहीं है कि आपके पास प्रत्येक प्रश्न का उत्तर हो। परमेश्वर उचित समय पर आपके सभी प्रश्नों का उत्तर देगा, और वह ऐसा करने के लिए आपकी कक्षाओं, आपके सहपाठियों और आपके प्राध्यापकों का उपयोग करेगा। आरम्भ करने से पहले यह भी आवश्यक नहीं है कि आपके जीवन का प्रत्येक विवरण पूरी तरह से व्यवस्थित हो। जैसे-जैसे आप आगे बढ़ेंगे, परमेश्वर आपकी आवश्यकताओं की पूर्ति करेगा। प्रार्थना करें और विश्वास के साथ आगे बढ़ें। बड़ी-बड़ी याचनाएँ करें, या भजनकार के शब्दों में कहें, “तू अपना मुँह खोल,” क्योंकि प्रभु प्रतिज्ञा करता है, “मैं उसे भर दूँगा” (भजन 81:10)। उसके वचन पर विश्वास करें। दृष्टि से नहीं, वरन् विश्वास से चलें। और जब आप ऐसा करेंगे, तो मेरी प्रार्थना होगी कि हमारा महान् परमेश्वर और राजा आने वाले अनेक दशकों तक अपनी महिमामयी अनुग्रह की स्तुति के लिए आपका सामर्थ्यपूर्वक उपयोग करे।
यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

