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यीशु की मृत्यु कब हुई?

7 जुलाई 2026
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बाइबल बहुविवाह के विषय में क्या कहती है?

What Does the Bible Say About Polygamy?

पुराने नियम में कुछ ऐसी प्रथाएँ हैं जिनकी ओर बाइबल की नैतिकता के आलोचक नियमित रूप से ध्यान दिलाते हैं। उनमें से एक है बहुविवाह। यह तो स्पष्ट है कि पुराने नियम के समय में बहुविवाह प्रचलित थी। इसका पहला उल्लेख उत्पत्ति 4:19 में मिलता है: “लेमेक ने दो पत्नियाँ ब्याह लीं।” बाद में, अब्राम का विवाह सारै से हुआ था, परन्तु सारै ने “अपने पति अब्राम को अपनी मिस्रि दासी हाजिरा सौंप दी कि वह उसकी पत्नि हो जाए” (उत्पत्ति 16:3)। याकूब की चार पत्नियाँ थीं—दो उसकी विधिवत् पत्नियाँ थीं, और दो दासियाँ, जिन्होंने अपनी स्वामिनियों के लिए सन्तान उत्पन्न करने के उद्देश्य से स्थानापन्न पत्नियों की भूमिका निभाई (उत्पत्ति 29–30)। परन्तु, बहुविवाह की प्रथा केवल पितृपुरुषों के समय तक सीमित नहीं थी। इस्राएल के इतिहास में अन्य प्रमुख पुरुष बहुविवाही थे, जिनमें दाऊद और विशेष रूप से सुलैमान सम्मिलित हैं (1 राजा 11:3)। प्राचीन निकट पूर्व में बहुविवाह कोई असामान्य बात नहीं थी, यद्यपि इसकी सीमा इस बात पर निर्भर करती थी कि कोई पुरुष इतनी बड़ी गृहस्थी का भरण-पोषण करने में कितना समर्थ था, जो अनेक पत्नियाँ होने के कारण उत्पन्न होती थी। राजाओं के मामले में, ये विवाह प्रायः राजनीतिक उद्देश्य से किए जाते थे, विशेष रूप से उनका मुख्य उद्देश्य विभिन्न राज्यों के बीच सम्बन्धों को स्थिर और सुरक्षित बनाए रखना होता था। इस प्रकार, इस्राएल में बहुविवाह की प्रथा उस प्रथा के अनुरूप थी जो प्राचीन संसार के अधिकाँश भागों में प्रचलित थी।

ये तथ्य कई प्रश्न उत्पन्न करते हैं। पहला, क्या पुराना नियम बहुविवाह की अनुमति देता है? यद्यपि पुराने नियम में वर्णित विभिन्न पुरुषों ने बहुविवाह किए, फिर भी ऐसा प्रतीत नहीं होता है कि बहुविवाह प्राचीन इस्राएलियों या सामान्यतः प्राचीन संसार में व्यापक रूप से प्रचलित था। अधिकाँश पुरुष इतने बड़े परिवार का व्यय वहन नहीं कर सकते थे। उदाहरण के लिए, सम्भव है कि रूत 4 में में जिस दूसरे छुड़ानेवाले सम्बन्धी का उल्लेख है, सम्भव है कि रूत से विवाह करने पर उसके संसाधनों पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार ने उसके निर्णय को प्रभावित किया हो (रूत 4:6 की एक सम्भावित व्याख्या यही है)। इस प्रकार, बहुविवाह मुख्यतः उसी वर्ग तक सीमित था जिसे आज की भाषा में हम “एक प्रतिशत” (अति सम्पन्न और प्रभावशाली वर्ग) कह सकते हैं। यद्यपि पुराना नियम बहुविवाह के इन उदाहरणों का उल्लेख करता है, फिर भी वह कहीं भी इस प्रथा का अनुमोदन नहीं करता।

दूसरा, क्या बाइबल में ऐसे नियम या सिद्धान्त दिए गए हैं जो बहुविवाह की अनुचितता के विषय में कुछ कहते हैं? पहला, पुराने नियम में बहुविवाह का प्रथम उदाहरण, अर्थात् लेमेक, कैन के वंश में पाया जाता है, और उसके हिंसक गीत को देखते हुए उसका सम्बन्ध किसी उच्च नैतिक चरित्र वाले व्यक्ति से नहीं जोड़ा जा सकता। दूसरा, आदम के लिए हव्वा की सृष्टि इस सिद्धान्त को स्थापित करती है कि विवाह के लिए एक पुरुष और एक स्त्री परमेश्वर का आदर्श है। यही वह सिद्धान्त है जिसका सहारा यीशु ने तलाक के विषय में पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते समय लिया (मत्ती 19:3–6)। तीसरा, पुराने नियम में वर्णित बहुविवाही विवाहों के सभी उदाहरण वैवाहिक जीवन के भीतर बहुत अधिक संघर्ष दिखाता है। हम इसे उत्पत्ति 29–30 में देखते हैं, जहाँ लिआ और राहेल याकूब के प्रेम के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करती हैं। याकूब के लिए और अधिक सन्तान उत्पन्न करने के लिए बिल्हा और जिल्पा का परिचय भी राहेल और लिआ के बीच के संघर्ष को आगे बढ़ाता है। चौथा, एल्काना के विवाह में पनिन्ना को हन्ना की सौत कहा गया है (1 शमूएल 1:6)। जिस शब्द का अनुवाद “सौत” किया गया है, वह एक ऐसी क्रिया से निकला है जिसका अर्थ है “शत्रु के समान व्यवहार करना।” अन्त में, लैव्यव्यवस्था 18:18 कहती है, “तू अपनी पत्नी के जीते जी उसकि बहन से विवाह करके उसे उसकी सौत न बनाना कि उसके तन को भी उघाड़े।” शाब्दिक स्तर पर इस आज्ञा का अर्थ है कि कोई पुरुष वैसा न करे जैसा याकूब ने किया था, अर्थात् किसी स्त्री और उसकी बहन दोनों से विवाह करे। तथापि, “बहन” शब्द का उपयोग आलंकारिक अर्थ में किसी ऐसी दूसरी स्त्री के लिए भी किया जा सकता है जो आवश्यक नहीं कि जैविक रूप से उसकी बहन हो।

जब हम नए नियम में आते हैं, तो उसके पूरे शिक्षण में यह आधारभूत धारणा दिखाई देती है कि विवाह एक-पत्नी और एक-पति का होना चाहिए। 1 कुरिन्थियों 7 में विवाह के विषय में पौलुस की शिक्षा इसी धारणा पर आधारित है। 1 तीमुथियुस 3 और तीतुस 1 में कलीसिया के अगुवों के लिए दिए गए निर्देशों में यह स्पष्ट किया गया है कि प्राचीन “एक ही पत्नी का पति” हो। नए नियम में कहीं भी ऐसा कोई संकेत नहीं मिलता कि कलीसिया में बहुविवाह को स्वीकार्य माना जाता हो।

अन्तिम प्रश्न यह है कि बाइबल, विशेषकर पुराना नियम, बहुविवाह की प्रथा की स्पष्ट रूप से निन्दा क्यों नहीं करता? अथवा दूसरे शब्दों में कहें तो, पुराने नियम के समय में परमेश्वर ने बहुविवाह को क्यों सहन किया? अन्ततः, इसका निश्चित उत्तर हमारे पास नहीं है। फिर भी ऐसा प्रतीत होता है कि परमेश्वर ने अपनी प्रजा के बीच कुछ ऐसे पापों को सहन किया जो इस्राएल के चारों ओर की संस्कृतियों में गहराई से व्याप्त थे। दासप्रथा के विषय में भी यही बात कही जा सकती है। किन्तु यह तथ्य कि परमेश्वर ने याकूब, दाऊद या सुलैमान को उनके बहुविवाह के कारण तत्काल दण्डित नहीं किया, हमें उनके पदचिन्हों पर चलने का कोई बहाना नहीं देता। एक पुरुष और एक स्त्री के विवाह का सिद्धान्त पुराने नियम में भी स्पष्ट रूप से स्थापित है। फिर भी, यह विषय हमें स्वयं से यह प्रश्न पूछने के लिए अवश्य प्रेरित करना चाहिए कि हमारे युग में कौन-से ऐसे पाप हैं, जो हमारी संस्कृति में सामान्य माने जाते हैं और जिन्हें हम कलीसिया में सहन कर रहे हैं? और हमारे अपने जीवन में कौन-से ऐसे पाप हैं, जिन्हें परमेश्वर धैर्यपूर्वक सहन कर रहा है? आइए, हम उन्हें बाद के लिए न टालें, वरन् जितनी शीघ्र हो सके उन्हें त्याग दें।

 यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

बेन्जमिन शॉ

बेन्जमिन शॉ

डॉ. बेन्जामिन शॉ सैनफर्ड, फ्लॉरिडा में रेफर्मेशन बाइबल कॉलेज में पुराने नियम के प्राध्यापक हैं। वे एक्कलीज़िऐस्टीस: लाइफ इन अ फॉलन वर्ल्ड पुस्तक के लेखक हैं।