
सेवकाई में चरित्र क्यों महत्वपूर्ण है?
10 सितम्बर 2026अनुग्रह के साथ मातृत्व की चुनौतियों का सामना करना
इस वसन्त ऋतु में मेरे मातृत्व जीवन में एक बड़ा परिवर्तन आने वाला है: मेरा सबसे छोटा बेटा हाई स्कूल पूरा करने वाला है। यह एक ऐसा गंतव्य है जो पालन-पोषण के इस चरण के समाप्त होने का संकेत देता है। मैं कुछ समय से इस क्षण को आते हुए देख रही थी, और मेरा हृदय में अनेक भावनाएँ उमड़ रही हैं — एक ओर मेरे मन में अपने बेटे के लिए आनन्द है, क्योंकि वह जीवन के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है; दूसरी ओर मुझे यह सोचकर दुःख होता है कि अब मैं उसे प्रतिदिन घर में नहीं देख पाऊँगी। मैं उस गंतव्य तक पहुँच गई हूँ जिसकी ओर हम सभी माता-पिता यात्रा करते हैं, फिर भी इस यात्रा के अगले पड़ाव को लेकर मेरे मन में अनिश्चितता है।
जब मैंने पहली बार इस यात्रा को आरम्भ किया था, तब मैं उन सभी बातों से अभिभूत थी जिन्हें मैं नहीं जानती थी। इतनी सारी नई और अपरिचित बातों के सामने मुझे लगता था कि मैं पर्याप्त रूप से योग्य नहीं हूँ। पालन-पोषण से जुड़े कठिन निर्णयों के लिए मुझमें बुद्धि का अभाव था, और मुझे डर रहता था कि कहीं मैं गलत निर्णय न ले बैठूँ। तब से लेकर आज तक मैंने मातृत्व में अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना किया है, और मुझे विश्वास है कि आगे भी चुनौतियाँ आएँगी। फिर भी जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो स्पष्ट रूप से परमेश्वर के अनुग्रह और उसकी विश्वासयोग्यता को अपने जीवन में कार्य करते हुए देखती हूँ। उसने हर संकट में मेरा साथ दिया है।
आप अपने मातृत्व की यात्रा में जहाँ कहीं भी हों—आरम्भिक वर्ष हों, बीच के वर्ष हों, या वे वर्ष जब बच्चे घर छोड़ चुके हों—परमेश्वर आपको वहीं आकर मिलता है जहाँ आप हैं। वह अपना अनुग्रह प्रदान करता है। बाइबल में वर्णित तीन माताओं के जीवन में हम इस सत्य को स्पष्ट रूप से देखते हैं। उनकी प्रत्येक परिस्थिति में परमेश्वर ने उन्हें वह दिया जिसकी उन्हें आवश्यकता थी और अपना अनुग्रह प्रदान किया।
परमेश्वर देखता और जानता है
हाजिरा की कहानी में हम एक ऐसी स्त्री को देखते हैं जो शीघ्र ही माँ बनने वाली थी और और जिसकी कठिनाई में परमेश्वर ने उसे देखा। सारै की दासी के रूप में, वह सारै की उस योजना का भाग बन गई जिसके द्वारा वह परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को पूरा होते देखना चाहती थी (उत्पत्ति 16)। जब वह सारै के क्रोध से बचकर जंगल में भाग गई, तब परमेश्वर उससे मिला और उस पर अपना अनुग्रह प्रकट किया। वहीं उसने परमेश्वर का नाम एल रोई रखा और कहा, “तू ऐसा परमेश्वर है जो मुझे देखता है… क्या मैंने यहाँ भी उस परमेश्वर को नहीं देखा जो मेरी सुधि लेता है?” (उत्पत्ति 16:13) बाद में जब वह फिर से जंगल में थी और उसे लगा कि वह और उसका पुत्र मर जाएँगे, तब भी परमेश्वर ने उसे देखा। उसने उसकी पुकार सुनी। उसने एक बार फिर अपने अनुग्रह से उसकी आवश्यकता पूरी की: “मत डर, क्योंकि परमेश्वर ने बालक का शब्द सुन लिया है” (उत्पत्ति 21:17)।
जब हम माताएँ संघर्ष करती हैं, तब परमेश्वर अपने प्रचुर अनुग्रह के साथ हमसे वहीं मिलता है जहाँ हम हैं। वही एल रोई है अर्थात् वह परमेश्वर जो देखता है। वह हमारे भय, हमारे दुःख और हमारी अनिश्चितताओं को देखता है। वह हमारे बच्चों के लिए हमारी चिंताओं को जानता है। वह हमारी सहायता की पुकार सुनता है और हमें छुड़ाता है। इस सत्य का सबसे बड़ा प्रमाण परमेश्वर द्वारा हमें हमारे पाप से उस क्रूस पर छुड़ाने में मिलता है जहाँ उसने अपने ही पुत्र को हमारे लिए दिया, जिससे कि वह उस दण्ड को भोगे जिसके हम योग्य थे। ख्रीष्ट के हमारे लिए किए हुए कार्य पर विश्वास करने के द्वारा हम पाप से छुड़ाए जाते हैं और अब परमेश्वर के हो गए हैं। “यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारे विरुद्ध कौन हो सकता है? जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, वरन् उसे हम सब के लिये दे दिया, वह उसके साथ हमें सब कुछ अनुग्रह से क्यों न देगा?” (रोमियों 8:31–32)।
जिस परमेश्वर ने जंगल में हाजिरा को देखा था, वही आज भी हमारी सहायता की पुकार को देखता और सुनता है।
परमेश्वर अपनी वाचाई प्रेम के कारण छुड़ाता है
रूत की पुस्तक में हमारी भेंट नाओमी से होती है, जिसने मोआब देश में अपना सब कुछ खो दिया था। पहले उसके पति की मृत्यु हुई और फिर उसके दोनों पुत्र भी मर गए। उसका शोक इतना गहरा था कि उसे विश्वास ही नहीं होता था कि उसके जीवन में फिर कभी आनंद लौट सकता है। परमेश्वर ने उसकी आवश्यकता की पूर्ति उसकी पुत्रवधू रूत के द्वारा की, जिसने अपने लोगों को छोड़कर नाओमी के साथ बेतलेहेम लौटने का निर्णय लिया। बाद में परमेश्वर ने अनाज के खेतों में रूत के लिए एक प्रेमी पति और नाओमी के लिए एक पौत्र प्रदान किया। उनकी कहानी में बार-बार आने वाला एक प्रमुख विषय परमेश्वर का हेसेद (hesed) प्रेम है। यह प्रेम केवल दयालुता नहीं है; यह अपने लोगों के प्रति परमेश्वर की वाचा के प्रति अटल और विश्वासयोग्य प्रतिबद्धता है।
परमेश्वर कठिन परिस्थितियों में फँसी माताओं से अपने हेसेद प्रेम के साथ मिलता है। कठिन परिस्थितियों में रहने वाली माताओं के लिए, और हममें से उन लोगों के लिए जो पालन-पोषण के कठिन समय से गुजर रहे हैं, हम अपने प्रति परमेश्वर के अटल प्रेम पर भरोसा रख सकते हैं। ऐसा प्रेम जो विश्वासयोग्य है। ऐसा प्रेम जो छुड़ाता और प्रबन्ध करता है। ऐसा प्रेम जो अपनी प्रतिज्ञाओं को पूरा करता है। ऐसा प्रेम जो कभी असफल नहीं होता।
जिस परमेश्वर ने नाओमी को उसके शोक में उद्धार दिया और नाओमी तथा रूत पर अपना हेसेद प्रेम प्रकट किया, वही आज भी अपने प्रेम में हमारे प्रति विश्वासयोग्य है।
परमेश्वर हमें हमारी बुलाहट के लिए योग्य बनाता है
एक दिन किशोरावस्था में पहुँची मरियम के सामने स्वर्गदूत जिब्राएल प्रकट हुआ और उसने उसे बताया कि वह संसार के उद्धारकर्ता को जन्म देगी। एक नई माँ के रूप में मैंने जो अपर्याप्तता अनुभव की थी, उसे मैं अच्छी तरह स्मरण करती हूँ; मैं कल्पना भी नहीं कर सकती कि मरियम को ऐसी बात सुनकर कैसा लगा होगा। उसका स्तुति-गान हमें स्मरण कराता है कि परमेश्वर अपने अनुग्रह के द्वारा हमारे जीवन में कैसे कार्य करता है:
“क्योंकि उस शक्तिशाली ने मेरे लिये बड़े-बड़े काम किए हैं,
और उसका नाम पवित्र है।
उसकी दया उन पर पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है
जो उसका भय मानते हैं” (लूका 1:49–50)।
परमेश्वर हमें माताओं के रूप में इसलिए नहीं बुलाता कि हमें पहले से ही पता है कि हम क्या कर रहे हैं। वह हमें उन बच्चों का पालन-पोषण करने के लिए इसलिए नहीं चुनता जिन्हें उसने हमारी देखभाल में सौंपा है कि हम सक्षम या बुद्धिमान हैं। वरन्, वह अपने प्रचुर अनुग्रह से हमें मातृत्व के लिए योग्य बनाता है “उसकी ईश्वरीय सामर्थ्य ने हमें वे सब वस्तुएँ प्रदान की हैं जो जीवन और भक्ति से सम्बन्ध रखती हैं, उसके ज्ञान के द्वारा जिसने हमें अपनी महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया” (2 पतरस 1:3)। वह हमें अपने बच्चों के पालन-पोषण के लिए आवश्यक सब कुछ देता है। वह हमें बुद्धि, सामर्थ्य और धीरज देता है। माताओं के लिए यह वास्तव में अत्यन्त शुभ समाचार है।
जिस परमेश्वर ने मरियम पर अपना अनुग्रह उण्डेला, वही आज हम पर भी अनुग्रह उण्डेलता है।
पवित्रशास्त्र में वर्णित इन प्रत्येक माताओं ने अपने जीवन में परमेश्वर के अनुग्रह का अनुभव किया, जिससे उसकी विश्वासयोग्यता प्रकट होती है। इसलिए, हे माताओं, आज आप जहाँ कहीं भी हों, इस बात पर भरोसा रखें कि परमेश्वर वहीं अपने अनुग्रह के साथ आपसे मिलेगा।
यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

