What Is the Wrath of God?

परमेश्वर का क्रोध क्या है?

14 अप्रैल 2026
The Role of Hope in the Christian Life

मसीही जीवन में आशा की भूमिका

21 अप्रैल 2026
What Is the Wrath of God?

परमेश्वर का क्रोध क्या है?

14 अप्रैल 2026
The Role of Hope in the Christian Life

मसीही जीवन में आशा की भूमिका

21 अप्रैल 2026

गर्भपात से जुड़े दोषबोध की समस्या का समाधान

Resolving Abortion's Guilt

हज़ारों लोग गर्भपात से जुड़े दोषबोध से संघर्ष करते हैं। यह उन स्त्रियों को सताता है जिन्होंने गर्भपात कराया है, उन पुरुषों को जिन्होंने इसके लिए प्रोत्साहित किया, और उन चिकित्सकों को जिन्होंने इसे किया है। एक महिला चिकित्सक ने द न्यूयॉर्क टाइम्स पत्रिका में बताया कि गर्भपात करने से पहले उसे स्वयं को भावनात्मक रूप से तैयार करना पड़ता था और प्राय: वह कई रातों तक सो नहीं पाती थी। उसने कहा, “एक स्त्रीरोग विशेषज्ञ के लिए यह करना बहुत कठिन है। यह इतनी तीव्र भावनाएँ उत्पन्न करता है . . . कि चिकित्सक आपस में इस विषय पर बात भी नहीं करते।” एक अवसर पर तो वह एक गर्भपात करने के बाद वह भावनाओं से अभिभूत होकर भूमि पर गिर पड़ी।

दोषबोध एक अत्यन्त सामर्थी भावना है, जिसमें लोगों को मानसिक रूप से अंपग बना देने की क्षमता होती है।  एक बार एक अभ्यासरत मनोचिकित्सक ने मुझसे सम्पर्क किया और अपने स्टाफ में सम्मिलित होने का प्रस्ताव दिया। उसने समझाया कि उसके बहुत से रोगी गहरे दोषबोध से  सम्बन्धित समस्याओं से पीड़ित थे। उसने कहा, “इन लोगों को चिकित्सकों की नहीं, एक पास्टर की आवश्यकता है। उन्हें किसी ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता है जो उन्हें बताए कि उन्हें क्षमा किया गया है।”

इस मनोचिकित्सक की मसीही विश्वास के प्रति कोई निष्ठा नहींथी; उसे केवल अपने रोगियों के मानसिक स्वास्थ्य की चिन्ता थी। वह अनसुलझे दोषबोध की विनाशकारी सामर्थ्य को समझता था, और उसने पहचाना कि नकारना और तर्क देना वास्तविक दोषबोध से निपटने के प्रभावी उपाय नहीं हैं। वास्तविक दोषबोध का एकमात्र प्रभावी उपचार वास्तविक क्षमा है। अपने हाथों पर लगे दाग को ढकने का प्रयास करना, उस दाग को वास्तव में  मिटा दिए जाने का कोई उचित विकल्प नहीं है। 

परमेश्वर की क्षमा का अनुभव करना

क्षमा की गहन स्वतंत्रता का अनुभव करने के लिए, मनुष्य को अवश्य परमेश्वर के पास जाना चाहिए और नम्र हृदय तथा टूटे हुए मन से अपने पापों का अंगीकार करना चाहिए। खेद का अर्थ है परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन करने के कारण सच्चा और ईश्वरीय शोक का होना। यह अपूर्ण पश्चात्ताप से भिन्न है, जो केवल दण्ड के भय से उत्पन्न होने वाला झूठा पश्चाताप है। ऐसा झूठा और अपूर्ण पश्चात्ताप उस बच्चे में दिखाई देता है जो जब अपनी माँ के हाथ में छड़ी देखता है तो इस बात से दुःखी होता है कि वह बिस्किट चोरी करते हुए पकड़ा गया है।  सच्चा पश्चाताप अपने दोष की वास्तविकता को स्वीकार करता है और उसे उचित ठहराने का प्रयास नहीं करता। जो कोई भी सच्ची नम्रता, खेद और फिर से वही पाप न करने के सच्चे निश्चय के साथ परमेश्वर के पास आता है, वह निश्चय ही परमेश्वर की क्षमा प्राप्त करेगा। 

यद्यपि जो मैंने किया है उसे परिवर्तित नहीं किया जा सकता, फिर भी मुझे क्षमा मिल सकती है। क्षमा परमेश्वर के अनुग्रह के अद्भुत कार्यों में से एक है। इसकी चंगाई देने वाली सामर्थ्य महान् है। यदि कोई स्त्री गर्भपात में सम्मिलित रही हो, तो परमेश्वर यह नहीं चाहता कि वह अपने जीवन भर पापदोष को लेकर घूमती रहे। परन्तु वह यह अवश्य चाहता है कि वह अपने पाप से मन फिराए और क्षमा के द्वारा शुद्ध होने के लिए उसके पास आए। जब परमेश्वर हमें क्षमा करता है, तब हम वास्तविक रीति से क्षमा किए जाते हैं। जब परमेश्वर हमें शुद्ध करता है, तो हम वास्तव में शुद्ध हो जाते हैं। यही महान् आनन्द और उत्सव का कारण है।

 यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

आर.सी. स्प्रोल

आर.सी. स्प्रोल

डॉ. आर.सी. स्प्रोल लिग्नेएर मिनिस्ट्रीज़ के संस्थापक, सैनफर्ड फ्लॉरिडा में सेंट ऐन्ड्रूज़ चैपल के पहले प्रचार और शिक्षण के सेवक, तथा रेफर्मेशन बाइबल कॉलेज के पहले कुलाधिपति थे। वह सौ से अधिक पुस्तकों के लेखक थे, जिसमें द होलीनेस ऑफ गॉड भी सम्मिलित है।