लिग्निएर का ब्लॉग

हम डॉ. आर. सी. स्प्रोल का शिक्षण संघ हैं। हम इसलिए अस्तित्व में हैं ताकि हम जितने अधिक लोगों तक सम्भव हो परमेश्वर की पवित्रता को उसकी सम्पूर्णता में घोषित करें, सिखाएं और रक्षा करें। हमारा कार्य, उत्साह, और उद्देश्य है कि हम लोगों को परमेश्वर के ज्ञान और उसकी पवित्रता में बढ़ने में सहायता करें।

 
28 मई 2026

पहला विवाद: ऑगस्टीन बनाम पेलेजियस

हम अक्सर अपनी सामर्थ्य, अनुशासन, या अच्छे कार्यों पर भरोसा करने लगते हैं, परन्तु यह लेख हमें स्मरण दिलाता है कि सच्चा परिवर्तन केवल परमेश्वर के अनुग्रह से आता है।
26 मई 2026

धर्मसुधारवादी उद्धारविज्ञान क्यों महत्व रखता है

उद्धार केवल परमेश्वर के अनुग्रह से मिलता है, इसलिए हर परिस्थिति में यीशु मसीह पर भरोसा रखें। उसका सुसमाचार हमें आशा, शांति और स्थिर विश्वास देता है।
21 मई 2026

पवित्रशास्त्र में उद्धार

यीशु ख्रीष्ट में हमें केवल उद्धार ही नहीं, बल्कि नई सृष्टि में अनन्त आशा और परमेश्वर के साथ सच्ची सहभागिता मिलती है। इसलिए प्रतिदिन उसकी महिमा के लिए जीवन बिताएँ और उसी में अपना आनन्द खोजें।
19 मई 2026

महिला पास्टरों के विषय में बाइबल क्या कहती है?

महिला पास्टरों के विषय में बाइबल की शिक्षा के अनुसार, कलीसिया में अपनी भूमिका को नम्रता से स्वीकार कर विश्वासयोग्यता से निभाएँ।
14 मई 2026

क्या कलीसिया पाखण्डियों से भरी हुई है?

कलीसिया पूर्ण लोगों का स्थान नहीं, बल्कि टूटे हुए लोगों का घर है—जहाँ हम अपने पापों को छिपाने के लिए मुखौटे नहीं पहनते, बल्कि ख्रीष्ट की कृपा में सच्चाई और नम्रता के साथ नया जीवन पाते हैं।
12 मई 2026

आलस्य और परिश्रम

परिश्रम केवल काम नहीं—यह परमेश्वर की महिमा करने का एक माध्यम है। इसलिए आलस्य को त्यागें, लगन से कार्य करें, और हर दिन अपने जीवन को संतुलित रखते हुए परमेश्वर के लिए जिएँ।
7 मई 2026

प्रेम करने की प्रेरणा

परमेश्वर स्वयं प्रेम है, और उसका प्रेम क्रूस पर सबसे स्पष्ट दिखाई देता है। यही प्रेम हमारे हृदयों को बदलकर हमें परमेश्वर और दूसरों से प्रेम करने के लिए प्रेरित करता है। जब हम इस प्रेम को समझते हैं, तो हमारा जीवन और सेवा उसी के प्रति समर्पित हो जाते हैं।
5 मई 2026

ख्रीष्ट में होने का क्या अर्थ है?

“ख्रीष्ट में” होना आपकी सबसे बड़ी पहचान है। इसका अर्थ है कि आप चुने गए हैं, क्षमा पाए हैं, और परमेश्वर के प्रेम में सुरक्षित हैं (इफिसियों 1:3–14)।
30 अप्रैल 2026

यीशु ने अपने स्वर्गारोहण से पहले कौन-सी प्रतिज्ञा की थी?

स्वर्गारोहण से पहले यीशु ने प्रतिज्ञा की कि पवित्र आत्मा आएगा और उनके चेलों को सामर्थ देगा कि वे सुसमाचार को पृथ्वी के छोर तक ले जाएँ—जिसकी पूर्ति पिन्तेकुस्त के दिन हुई।