लिग्निएर का ब्लॉग

हम डॉ. आर. सी. स्प्रोल का शिक्षण संघ हैं। हम इसलिए अस्तित्व में हैं ताकि हम जितने अधिक लोगों तक सम्भव हो परमेश्वर की पवित्रता को उसकी सम्पूर्णता में घोषित करें, सिखाएं और रक्षा करें। हमारा कार्य, उत्साह, और उद्देश्य है कि हम लोगों को परमेश्वर के ज्ञान और उसकी पवित्रता में बढ़ने में सहायता करें।

 
14 मई 2026

क्या कलीसिया पाखण्डियों से भरी हुई है?

कलीसिया पूर्ण लोगों का स्थान नहीं, बल्कि टूटे हुए लोगों का घर है—जहाँ हम अपने पापों को छिपाने के लिए मुखौटे नहीं पहनते, बल्कि ख्रीष्ट की कृपा में सच्चाई और नम्रता के साथ नया जीवन पाते हैं।
12 मई 2026

आलस्य और परिश्रम

परिश्रम केवल काम नहीं—यह परमेश्वर की महिमा करने का एक माध्यम है। इसलिए आलस्य को त्यागें, लगन से कार्य करें, और हर दिन अपने जीवन को संतुलित रखते हुए परमेश्वर के लिए जिएँ।
7 मई 2026

प्रेम करने की प्रेरणा

परमेश्वर स्वयं प्रेम है, और उसका प्रेम क्रूस पर सबसे स्पष्ट दिखाई देता है। यही प्रेम हमारे हृदयों को बदलकर हमें परमेश्वर और दूसरों से प्रेम करने के लिए प्रेरित करता है। जब हम इस प्रेम को समझते हैं, तो हमारा जीवन और सेवा उसी के प्रति समर्पित हो जाते हैं।
5 मई 2026

ख्रीष्ट में होने का क्या अर्थ है?

“ख्रीष्ट में” होना आपकी सबसे बड़ी पहचान है। इसका अर्थ है कि आप चुने गए हैं, क्षमा पाए हैं, और परमेश्वर के प्रेम में सुरक्षित हैं (इफिसियों 1:3–14)।
30 अप्रैल 2026

यीशु ने अपने स्वर्गारोहण से पहले कौन-सी प्रतिज्ञा की थी?

स्वर्गारोहण से पहले यीशु ने प्रतिज्ञा की कि पवित्र आत्मा आएगा और उनके चेलों को सामर्थ देगा कि वे सुसमाचार को पृथ्वी के छोर तक ले जाएँ—जिसकी पूर्ति पिन्तेकुस्त के दिन हुई।
23 अप्रैल 2026

मसीही जीवन के लिए एक संकल्प

मसीही जीवन का एक ही संकल्प है—मसीह को जानना। उसी में जीवन की सच्ची दिशा और उद्देश्य मिलता है।
23 अप्रैल 2026

क्या परमेश्वर सभी धर्मों की आराधना को स्वीकार करता है?

पवित्रशास्त्र सिखाता है कि सच्ची आराधना केवल एक परमेश्वर के लिए है, और उद्धार का मार्ग केवल यीशु मसीह है
21 अप्रैल 2026

मसीही जीवन में आशा की भूमिका

मसीही जीवन में आशा केवल इच्छा नहीं, बल्कि परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर आधारित एक निश्चित विश्वास है, जो हमें स्थिरता और भविष्य के प्रति दृढ़ आश्वासन देता है।
16 अप्रैल 2026

गर्भपात से जुड़े दोषबोध की समस्या का समाधान

गर्भपात से जुड़ा दोषबोध गहरा और बोझिल हो सकता है, परन्तु इसका वास्तविक समाधान केवल परमेश्वर की सच्ची क्षमा में है—जो नम्र पश्चात्ताप करने वालों को पूर्ण रीति से शुद्ध और स्वतंत्र करती है।