जब हम अपनी पापमय अवस्था की गंभीरता को समझते हैं, तब हमें और भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि उद्धार केवल हमारे प्रयासों से नहीं, बल्कि यीशु मसीह के अनुग्रह और पूर्ण कार्य से मिलता है। उसी पर विश्वास रखें, क्योंकि वही हमारा धर्मीकरण, पवित्रीकरण और अनन्त आशा है।