9 जून 2026

सोलहवीं शताब्दी में उद्धारविज्ञान की पुनर्खोज

जब हम अपनी पापमय अवस्था की गंभीरता को समझते हैं, तब हमें और भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि उद्धार केवल हमारे प्रयासों से नहीं, बल्कि यीशु मसीह के अनुग्रह और पूर्ण कार्य से मिलता है। उसी पर विश्वास रखें, क्योंकि वही हमारा धर्मीकरण, पवित्रीकरण और अनन्त आशा है।
4 जून 2026

रोमन कैथोलिक संस्कार-केन्द्रित उद्धारविज्ञान का विकास

उद्धार हमारी योग्यताओं से नहीं, बल्कि परमेश्वर के अनुग्रह से मिलता है। इसलिए अपने जीवन में हर दिन मसीह पर भरोसा रखें, क्योंकि उसी में सच्ची शान्ति, आशा और निश्चितता पाई जाती है।
2 जून 2026

मसीही उद्धारविज्ञान के समकालीन चुनौतियाँ

परमेश्वर का वचन कभी नहीं बदलता। इसलिए अपने विश्वास में दृढ़ बने रहें और सत्य सुसमाचार को थामे रखें।
28 मई 2026

पहला विवाद: ऑगस्टीन बनाम पेलेजियस

हम अक्सर अपनी सामर्थ्य, अनुशासन, या अच्छे कार्यों पर भरोसा करने लगते हैं, परन्तु यह लेख हमें स्मरण दिलाता है कि सच्चा परिवर्तन केवल परमेश्वर के अनुग्रह से आता है।
26 मई 2026

धर्मसुधारवादी उद्धारविज्ञान क्यों महत्व रखता है

उद्धार केवल परमेश्वर के अनुग्रह से मिलता है, इसलिए हर परिस्थिति में यीशु मसीह पर भरोसा रखें। उसका सुसमाचार हमें आशा, शांति और स्थिर विश्वास देता है।
21 मई 2026

पवित्रशास्त्र में उद्धार

यीशु ख्रीष्ट में हमें केवल उद्धार ही नहीं, बल्कि नई सृष्टि में अनन्त आशा और परमेश्वर के साथ सच्ची सहभागिता मिलती है। इसलिए प्रतिदिन उसकी महिमा के लिए जीवन बिताएँ और उसी में अपना आनन्द खोजें।
7 अक्टूबर 2025

प्रेम का बन्ध

हम प्रभु-भोज की विधि से बहुत अधिक लाभान्वित होंगे यदि यह विचार हमारे मस्तिष्क पर अंकित हो जाए: कि जब भी कोई भाई हमारे द्वारा आहत, घृणित, तिरस्कृत, अपमानित, या किसी रीति से दुःखी किया जाता है, हम अपने द्वारा किए गए कार्यों से ख्रीष्ट को चोट पहुँचाते हैं, तिरस्कार करते हैं और उसका दुरुपयोग करते हैं; कि जब भी हम अपने भाइयों से असहमत होते हैं, तो हम ख्रीष्ट से असहमत होते हैं; कि हम भाइयों में होकर ख्रीष्ट से बिना प्रेम किए ख्रीष्ट से प्रेम नहीं कर सकते; कि हमें अपने भाइयों के शरीर की उतनी ही देखभाल करनी चाहिए जितनी हम अपनी करते हैं; क्योंकि वे हमारे शरीर के अंग हैं; और कि जैसे हमारे शरीर का कोई भी अंग पीड़ा की ऐसी भावना से प्रभावित नहीं होता जो शेष सभी में न फैले, वैसे ही हमें अपने भाई को किसी भी बुराई से प्रभावित नहीं होने देना चाहिए, बिना उसके प्रति करुणा के।