
अपनी कलीसिया में देखभाल करने वाले लोगों का समर्थन कैसे करें
11 सितम्बर 2025
मुझे अपने विद्रोही बच्चे से कैसे व्यवहार करना चाहिए?
18 सितम्बर 2025अपने बच्चों को क्षमा के विषय में सिखाना
माता-पिता दृष्टान्त हैं। हमारे जीवन हमारे बच्चों को कहानियाँ सिखाते हैं। हम आशा करते हैं कि हमारा जीवन सुसमाचार की वह महान कहानी सुनाएगा जो क्षमा की है। परमेश्वर हमें ख्रीष्ट में क्षमा करता है, परमेश्वर की क्षमा का एक जीवित साक्षी हमारे अन्दर का पश्चतापी हृदय है—एक ऐसा हृदय जो न केवल लेता है, परन्तु देता है। हमें सुसमाचार से अपने बच्चों को क्षमा के विषय में सिखाना प्रारम्भ करना चाहिए, परन्तु हमें अपने जीवनों से उनके लिए क्षमा का दृष्टान्त भी बनना चाहिए।
क्षमा के विषय में एक सबसे प्रभावशाली दृष्टान्त नकारात्मक रूप में बताया गया है: निर्दयी सेवक का दृष्टान्त। दृष्टान्त में, एक दास का, जो अधिक ऋृणी, अधिक क्षमा किया जाता है, और तुरन्त पलटकर किसी दूसरे दास से बलपूर्वक माँग करता है जो उसके तुलना में थोड़ा ही ऋृणी था (देखें मत्ती 18:21-35)। यह दृष्टान्त इस बात पर बल देता है कि क्षमा किए गए व्यक्ति के लिए क्षमा न करना कितना असंगत बात है, परन्तु यह तथ्य कि यीशु इस प्रकार के असंगती पर बल देता है हमें सिखाता है कि हम पहले क्षमा किए जाने के द्वारा क्षमा करने वाले बनते हैं। इसलिए हम अपने बच्चों को क्षमा करना सिखाने के लिए इस शुभ-सन्देश से प्रारम्भ करते हैं कि हम ख्रीष्ट के देहधारण, मृत्यु, पुनरूत्थान, और स्वर्गारोहण के कारण क्षमा किए गए हैं।
हायडेलबर्ग प्रश्नोत्तरी में प्रेरितों के विश्वास वचन की व्याख्या सुमसमाचार में क्षमा की सीमा को समझने में हमारी सहायता करती है:
प्रश्न. “पापो की क्षमा” के विषय में आप क्या विश्वास करते हैं?
उत्तर. मैं विश्वास करता हूँ कि परमेश्वर, ख्रीष्ट के सन्तुष्टि के कारण, मेरे किसी भी पापों को या पापपूर्ण स्वभाव को स्मरण नहीं करेगा जिससे मुझे अपने सम्पूर्ण जीवन के विरोध संघर्ष करना है। इसके अपेक्षा, अपने अनग्रह के द्वारा परमेश्वर ख्रीष्ट की धार्मिकता मुझे देता है जिससे कि मैं कभी भी न्याय में न आऊँ। (प्रश्न और उत्तर 56)
जैसा यहाँ बताया गया है, हमारी क्षमा उदार है— ख्रीष्ट में सर्वदा के लिए सुरक्षित। हमारे बच्चों के लिए सीखने के लिए दूसरी बात यह है कि यदि सुसमाचार में यह हमारी क्षमा है, तो दूसरों के साथ भी यही हमारी क्षमा होनी चाहिए।
हम अपने बच्चों को सिखाते हैं कि दूसरों के लिए उनकी क्षमा अपनी क्षमा के जैसी दिखनी चाहिए:
- हमारी क्षमा ख्रीष्ट के कारण, उसके सम्मान में होनी चाहिए, जैसे परमेश्वर हमे क्षमा करता है “ख्रीष्ट की सन्तुष्टि के कारण।”
- हमारी क्षमा को भूलना चाहिए, जैसे-जैसे हम भूतकाल की बातों को स्मरण करना बन्द कर देते हैं, जिस प्रकार से परमेश्वर हमारे पापों को “अब स्मरण नहीं करेगा।”
- हमारी क्षमा निरन्तर होनी चाहिए, जैसे परमेश्वर क्षमा करता है “मेरे पापपूर्ण स्वभाव को जिसके विरूद्ध मुझे जीवन भर संघर्ष करना है।”
- हमारी क्षमा अनुग्रहकारी होना चाहिए, जैसे-जैसे हम अपनी माँगों को छोड़ देते हैं, जिस प्रकार से परमेश्वर “अपने अनुग्रह के द्वारा” हमें ख्रीष्ट की धार्मिकता प्रदान करता है।
- हमारी क्षमा दूसरों को हमारे न्याय के भय से स्वतन्त्र करना चाहिए, जैसे-जैसे हम भूतकाल के पापों को उनके ऊपर नहीं रखते हैं, जिस प्रकार से हम पुनः परमेश्वर के समक्ष “न्याय में कभी नहीं आएँगे।”
माता-पिता होने के नाते डरावनी बात यह है: एक बार जब हमारे बच्चे सुसमाचार और क्षमा को जान जाते हैं, वे हमारे अन्दर असंगति को देखने के योग्य हो जाएँगे जब हम निर्दयी सेवक के जैसे कार्य करेंगे। माता-पिता के रूप में हमें इसमें गिर जाने की एक रीति है अपने बच्चों के सामने अतीत को लाना। हम इस प्रकार की बातें कहते हैं “तुम हर बार यह करते हो…” दोषी ठहराने, अपनी कुँठा को दिखाने, या उनसे आज्ञाकारीता निकलवाने के लिए। जब हम इस प्रकार बोलते हैं, तो हम अनजाने में निर्दयी सेवक का दृष्टान्त बन जाते हैं।
परन्तु हमें आशा नहीं छोड़नी चाहिए। हम क्षमा का साकारात्मक दृष्टान्त बन सकते हैं। माता-पिता जो दयीलु सेवकों का दृष्टान्त हैं क्षमा के विषय में खुले हुए हैं, और हमारे बच्चें क्षमा के विषय में सबसे अधीक तब सिखते हैं जब हम एक दूसरे को क्षमा करते हैं।
हे माता-पिताओ, अपने बच्चों को प्रतिदिन क्षमा माँगे। आपके जैसे, उनके पास भी हृदय है पाप और अन्याय के प्रति प्रतिक्रिया करते हैं। अपश्चातापी पापों को अपने और उनके बीच न आने दें और जब आपके बच्चे आपके विरुद्ध पाप करते हैं, उनको उत्साहित करें कि वे भी क्षमा माँगे। इसमें उनके साथ कठोर न होना सम्मिलित है जिससे कि वे बदले में अपने पापों के विषय बात करने में सहज अनुभव कर सकें। जब वे छोटे हैं, उनके लिए उनके पापों का नाम लीजिए और उनको सिखाएँ कि कैसे क्षमा माँगना है केवल “मुझे क्षमा कीजिए” कहने से बढ़कर। पाप और मेल-मिलाप के विषय में इससे भी बढ़कर दृढ़ बातें कि जाती हैं जब हम उन्हें यह कहने के लिए शिक्षा देते हैं, “क्या आप मुझे क्षमा करेंगे?”
जब आपके बच्चे किसी को क्षमा करने में संघर्ष करते हैं, तो इसके विषय में उनके साथ प्रार्थना कीजिए। यद्यपि जब आपके बच्चे छोटे हों और और उन्हें किसी से द्वेष करने पर आभास न हो, फिर भी उनके साथ प्रतिदिन प्रार्थना करें जिससे उनमें क्षमा का भाव विकसित हो। प्रार्थना एक उत्तम माध्ययम है उनके हृदय से बात करने का। यह विशेष रूप से तब सहायक होती है जब वे आपके सीधे निर्देश सुनने के लिए तैयार न हों। प्रार्थना को एक मार्ग के रूप में प्रयोग करें जिससे उनके हृदय आत्मा द्वारा कोमल हो सकें।
परिवार अद्भुत है। यह कभी-कभी, विस्फोटक भी हो सकता है। परिवार के रूप में साथ मिलकर प्रार्थना की एक नियमित लय स्थापित कीजिए। यह उतना ही सरल हो सकता है जितना भोजन के समय प्रार्थना करना । यह नियमित लय, भले ही यह दिन में केवल एक बार भोजन के समय ही क्यों न हो, हमें अटल तनावों के समय प्रभु के सामने जाने का अवसर देती है। जब कोई झगड़ा आरम्भ हो जाता है, तो यीशु हमें मेल-मिलाप के लिए बुलाता है। समस्या को दूर करने का एक माध्यम है प्रार्थना में सहायता माँगना। कभी-कभी भोजन के समय धन्यवाद की प्रार्थना की साधारणता ऐसी प्रार्थनाओं को आश्चर्यजनक तो बनाती है, परन्तु सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि, यह साधारण है।
हमें अपने बच्चों के साथ क्षमा के विषय में खुला होना चाहिए, और एक जब इस प्रकार का खुला स्थान हमारे घरों में बन जाता है, तो मेल-मिलाप से आने वाली शान्ति को परिश्रमपूर्वक सुरक्षा करनी चाहिए और एक दूसरे के प्रति पाप नहीं करना चाहिए। परन्तु जब हम करते हैं, हम क्षमा करते हैं।
यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

