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अपनी कलीसिया में देखभाल करने वाले लोगों का समर्थन कैसे करें

How-to-Support-the-Caregivers-in-Your-Church

वर्षों पहले, जवानों का एक समूह हमारी कलीसिया में आया, जो उत्साह और ऊर्जा से भरा हुआ था। उस समय हमारे पास कोई औपचारिक सेवकाईयाँ नहीं थी इसलिए वे अनिश्चित थे कि वे कैसे हमारी कलीसिया में सेवा करे। हमारे पास्टर ने कलीसियाई आराधना से पहले इस बात पर कहा: “यदि कोई सेवा करना चाहता है, तो उसे कोई औपचारिक समूह या पदवी की आवश्यकता नहीं है। हमारे पास बहुत सारे अवसर हैं। आप वृद्ध लोगों, अस्वस्थ लोगों, या शारीरिक या मानसिक स्थितियों से पीड़ित लोगों से मिल सकते हैं।”

कुछ ही दिनों में, एक युवा व्यक्ति मेरे बेटे से, जो गम्भीर मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति से ग्रसित था, मिलने आया । एक और युवा भी बाद में जुड़ा, और वे तीनों मित्र बन गए। यह मेरे प्राण के लिए औषधि थी। मेरे बेटे की स्थिति, भावनाओं को दबाने और सामाजिक आदान -प्रदान में बाधा बनती थी। बहुत सारे लोगों ने बातचीत करने की उसकी अनिच्छा को एक चिह्न के रूप में माना कि वह अकेला रहना चाहता है। वह बात सत्य नहीं थी।

मुझे उस समय से पहले की अपनी असहज भावनाएँ स्मरण है, जब मैं अपने बीस साल के बेटे के लिए मित्र की खोज़ में अत्यधिक चिन्दित माँ जैसी थी। मेरे पास्टर की घोषणा ने इस समस्या का समाधान कर दिया।

मेरी कहानी देखभाल करने वाले लोगों की कई सारी कहानियों में से केवल एक है जो अपनी कलीसियाओं में समर्थन की खोज में हैं। उनकी आवश्यकताएँ उनकी परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग है, परन्तु वे सब स्थायी प्रोत्साहन और सच्ची समझ की इच्छा करते हैं।

स्थायी प्रोत्साहन

बहुत सारी कलीसियाएँ अपनी तात्कालिक आवश्यताओं को पूरा करने के लिए शीघ्रता करती है। वे उन लोगों को भौतिक और भावनात्मक समर्थन का प्रावधान करने के लिए तैयार है जिन्होंने चिन्तित करने वाले रोग-निदान प्राप्त किए हैं, जिन्होंने नौकरी या घर को खो दिया है, जिनको अपने प्रिय जन को खोना पड़ा हो। परन्तु देखभाल करना प्रायः दीर्घ-कालिक बुलाहट है, और कलीसिया की आरम्भिक तीव्र उत्साही सहायता के बाद भी चुनौतियाँ लम्बे समय तक बनी रहती हैं।

पास्टर इस समर्थन को बनाए रखने के लिए बहुत कुछ कर सकते है। देखभाल करने वाले और अपने प्रियजनों को उनके निजी और सार्वजनिक प्रार्थनाओं में रखने के साथ-साथ, वे कलीसिया को लोगों से मिलने, पत्र, कॉल, सहायता के वास्तविक कार्यों में उपस्थित होने के लिए लगातार उत्साहित कर सकते हैं।

मेरे पास्टर ने प्रायः हमें स्मरण दिलाया कि प्रेम हमें अपने सहजता के क्षेत्र से बाहर निकलने के लिए बुला सकता है। उसने कहा, “आपको असुविधा होनी चाहिए।” और उसके जीवन ने उसके शब्दों का समर्थन किया। जहाँ कहीं आवश्यकता थी, वह वहाँ थे—बिना कभी-भी बाहरी तनाव लिये—मानो कि आवश्यकताओं में पड़े लोगों से मिलना उसके दिन का मुख्य आकर्षण था।

एमी ने अपने नौ वर्ष के बेटे के ल्यूकीमिया (रक्त का कैंसर) के संघर्ष को साझा करने के महीनों बाद मुझे बताया, “एक ऐसे परिवार को जो दीर्घ-कालिक देखभाल की स्थिति में है, लोगों के द्वारा केवल यात्रा के आरम्भ में प्रोत्साहन से अधिक की आवश्यकता है। एक अल्ट्रा-मैराथन धावक के समान, हमें मार्ग में पानी और रस के लिए रुकने की आवश्यकता है। हमें ऐसे लोगों की आवश्यकता है जो हमें मार्ग में बीच-बीच में उत्साहित करें और स्मरण दिलाएँ कि वे हमारे साथ हैं। यह एक लम्बी, थका देने वाली यात्रा है। हमें मत भूलिए।”

भूलना सरल है क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति व्यस्त है, और सहायता करने वाले दूसरों को परेशान करने या अपने प्रत्येक दिन की देखभाल करने को प्रकट करके अपने प्रियजनों को ठेस पहुँचाने के डर से प्रायः अपने संघर्षों को अपने पास रखना पसन्द करते हैं। यह हमारी कलीसिया में प्रत्येक व्यक्ति के ऊपर निर्भर है कि वह देखभाल करने वालों और उनके प्रियजनों को स्मरण रखे, कलीसिया में उनसे मिले, और उनकी अनुपस्थिति में उनकी खोज़ करे।

सच्ची समझ

यहाँ तक कि जब हम अपनी कलीसिया में देखभाल करने वालों की सहायता करने के लिए अपने सहजता के क्षेत्र से बाहर निकलते हैं, तो हमारा व्यस्त स्वभाव हमें उनकी आवश्यकताओं को समझने से बाधित करता है। ट्रिना को, जिसने अपने पति के डिमेन्शिया और कैंसर के संघर्ष के मध्य कई वर्ष देखभाल में व्यतीत किए, कई ऐसे लोग स्मरण हैं जिन्होंने अपनी प्रार्थनाओं को केवल कैंसर की चंगाई के लिए सीमित रखा, जबकि वह और उसके पति दोनों का सोचना था कि परमेश्वर ने उसके मानसिक पतन को एक दयापूर्ण अन्त की अनुमति दी थी। किसी ने भी उसके तथा उसके बच्चों के लिए उनके सामने प्रार्थना नहीं की।

उसने कहा, “हमें धैर्य की आवश्यकता थी और पीड़ा से छुटकारा, जीवन के अन्त के निर्णयों, और अन्य विषयों की चिन्ता थी। लोगों को प्रार्थना विनतियों को सुनने या पढ़ने की आवश्यकता है और उन बातों के लिए प्रार्थना करना चाहिए, विशेषकर रोगी और देखभाल करने वाले लोगों की उपस्थिति में। हमें यह अनुभूति होनी चाहिए कि जिनसे हम समर्थन की अपेक्षा करते हैं, वे हमारी बात को सुन रहे हैं। और उनकी प्रार्थनाओं को अवश्य ही वास्तविकता का समर्थन करना चाहिए, न की प्रार्थना करने वाले की इच्छाओं को।

गम्भीर मानसिक रोगों के कई माता-पिताओं ने मुझे बताया कि उनको मुख्यतः स्वीकृति, समझ, आशा और प्रेम की आवश्यकता है—जिसमें देखभाल की आवश्यकता वाले व्यक्ति के लिए प्रेम और सच्ची प्रशंसा सम्मिलित है। ट्रिना ने मुझे बताया, “देखभाल करने वाले अपने प्रिय जनों के केवल शारीरिक देखभाल के लिए उत्तरदायी नहीं बनते हैं परन्तु वे उनके जीवनों के उद्देश्य को भी निरन्तर देखने के लिए उनकी सहायता करते हैं। मुझे अपने पति को स्मरण दिलाने की आवश्यकता थी कि वह परमेश्वर के स्वरूप धारण करने वाला था जो अभी-भी अपने परिवार को आशीषित कर सकता था। हमारे प्रिय जनों को धन्यवाद देना महत्वपूर्ण है कि कैसे वे हमें आशीष देते हैं और हमारे आगे-आगे चलते हैं। मुझे बहुत अधिक आभास हो रहा है कि मेरे पति के दुख उठाने के उदाहरण का, मेरे लिए तथा जिन्होंने निकटता से इसे देखा, क्या अर्थ रखता है। कलीसिया इस प्रशंसा के कार्य में सहायता कर सकती है।

प्रेम, समझ और प्रशंसा के लिए समय के समर्पण की आवश्यकता होती है जो वर्तमान समाज में बहुत ही कम है जो शीघ्र समाधान चाहता है। यदि हम आवश्यकता में पड़े व्यक्ति से मिलने जाते हैं, तो हमें प्रायः लहता है कि हम उनकी समस्याओं को हल करने या कम से कम उपयोगी सुझावों को देने के लिए बाध्य हैं। फिर भी, यह सम्भवतः सबसे बुरी बात हो सकती है जिसे हम ऐसे लोगों के लिए कर सकते हैं जो बुद्धि के सावधानीपूर्वक अभ्यास करने और उत्तम सम्मत्ति पर ध्यान देने के द्वारा, अपनी स्थिति की जटिलता को दिशा-निर्देश देने का प्रयास कर रहे हैं।

सबसे अच्छी बात यह है कि विश्वासयोग्य मित्रों के रूप में उपस्थित हों, उनके आस-पास रहने के लिए, सुनने और सीखने के लिए तैयार रहें। देखभाल करने वालों और उनके प्रियजनों के जीवनों में जुड़ना सम्भवतः एक बलिदान जैसा प्रतीत हो सकता है, परन्तु यह इसमें सम्मिलित सभी लोगों के लिए अच्छा है। यदि हम आश्वस्त है कि “देह तो एक अंग का नहीं पर अनेक अंगो का समूह है” (1 कुरिन्थियों 12:14), और प्रत्येक अंग कलीसिया की बढ़ोत्तरी के लिए आवश्यक है, हम एक-दूसरे से इस प्रकार से व्यवहार करेंगे और—इस ऐसा करते हुए—परिपक्ववता, प्रेम, और बुद्धि में बढ़ेंगे।               

 यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

सिमोनेट्टा कार
सिमोनेट्टा कार
साइमोनेटा कैर कई किताबों और बायोग्राफी की लेखिका हैं, जिनमें फिलिस व्हीटली भी शामिल है, जो यंग रीडर्स के लिए क्रिश्चियन बायोग्राफी सीरीज़ का हिस्सा है, और क्वेश्चंस विमेन आस्क्ड भी।