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मैं अपने कार्यस्थल पर ख्रीष्टीय कैसे हो सकता हूँ?

Working-as-a-Christian

“जानते हो, ऐलेक्स, आय के स्रोत के अतिरिक्त, मेरा कार्य लगभग निरर्थक है।” यह बात एक सफल ख्रीष्टीय व्यवसायी ने मुझे मेरी पच्चीस वर्ष की आयु में कही थी। वह विनम्र व्यक्ति थे, और उनका कहना यह था कि काम प्रायः एक आवश्यक बुराई जैसा लगता है।

यह प्रशंसनीय है कि मेरे बड़े मित्र ने अपनी पहचान अपने कार्य में नहीं खोजी—यह ऐसा प्रलोभन जिससे हम सबको बचना चाहिए है। केवल ख्रीष्ट ही वह महत्व दे सकता है जिसे लोग अपने कार्य से खोजते हैं। परन्तु क्या हमें अपने कार्य को निरर्थक ही मानना चाहिए? या क्या पवित्रशास्त्र हमें उन गतिविधियों का अधिक गहन और आशापूर्ण दृष्टिकोण देता है, जिनमें हम अपने जागृत जीवन का आधा समय व्यतीत करते हैं? ख्रीष्टीय के रूप में कार्य करने का क्या अर्थ है?

कार्य करना आराधना का भाग है

हम प्रायः सुनते हैं कि लोग ख्रीष्टीय कार्य और सांसारिक कार्य में अन्तर करते हैं। पूर्णकालिक सेवकाई एक विशेष और महत्वपूर्ण बुलाहट है, जो दुगुने आदर के योग्य है (इब्रानियों 13:7; 1 तीमुथियुस 5:17)। परन्तु ख्रीष्टीय के लिए, सम्पूर्ण जीवन परमेश्वर के सम्मुख जीया जाना चाहिए। इसलिए, कोई भी कार्य जो दूसरों के भले की सेवा करता है और परमेश्वर को विश्वास-आधारित आज्ञाकारिता में अर्पित किया जाता है, वही ख्रीष्टीय कार्य है।

रोमियों 12:1 हमें निर्देश देता है कि हम स्वयं को परमेश्वर के लिए “एक जीवित बलिदान के रूप में अर्पित करें, जो पवित्र और परमेश्वर को स्वीकार्य हो, यही तुम्हारी आत्मिक आराधना है।” यह एक बार का कार्य नहीं, वरन् निरन्तर किया जाने वाला बलिदान है। हमारा सम्पूर्ण जीवन उसी को समर्पित होना चाहिए, जो हमारे लिए जीया और मरा जिससे कि “जो जीवित हैं वे अब अपने लिए न जीएँ, परन्तु उसके लिए जो उनके लिए मरा और जिलाया गया” (2 कुरिन्थियों 5:15)। हम यह परमेश्वर की कृपा पाने के लिए नहीं करते हैं, वरन् इसलिए कि हमने उसे पहले से ही उसे पाया और अनुभव किया है।

हमारा हर कार्य महत्व रखता है, क्योंकि हमारा हर कार्य, भावना और प्रेरणा उस आत्मिक आराधना का भाग है, जिसके लिए हमें बुलाया गया है। कार्यस्थल पर, हमें वस्तुएँ और सेवाएँ इस प्रकार उत्पन्न करनी और बाँटनी हैं मानो उन्हें परम स्वामी को ही अर्पित किया जा रहा हो। हमें मनुष्यों के लिए नहीं, वरन् प्रभु के लिए तन मन से कार्य करना है (कुलुस्सियों 3:23)। हम अपने कार्य में उत्कृष्टताका लक्ष्य इसीलिए रखते हैं कि परमेश्वर प्रसन्न हो, न कि सांसारिक प्रतिफल प्राप्त करने के लिए।

कार्य करना पड़ोसी-प्रेम को प्रकट करता है

मार्टिन लूथर प्रायः कहा करते थे, “परमेश्वर को नहीं, परन्तु हमारे पड़ोसी को हमारे भले कार्यों की आवश्यकता है।” हमारे कार्य ठोस रीति से अपने पड़ोसी से प्रेम प्रकट करने का साधन हैं। प्रायः हम “अच्छा कार्य” को केवल वेतन के सम्बन्ध में  उपयोग करते हैं। पारिश्रम के लिए उचित वेतन प्राप्त करना अच्छी ही बात हैं—वित्तीय स्वावलम्बन और सन्तोष को पवित्रशास्त्र में प्रोत्साहित किया गया है (1 थिस्सलुनीकियों 4:11–12; 1 तीमुथियुस 5:8; इब्रानियों 13:5)—परन्तु न तो धन और न ही प्रतिष्ठा को हमारा मुख्य प्रेरक होना चाहिए। तो क्या होना चाहिए? परमेश्वर और पड़ोसी के प्रति प्रेम।

अपने कार्य में हमें उपयोगी बनने का लक्ष्य रखना चाहिए: जीवन को सुधारना, व्यवस्था को बढ़ाना, और पीड़ा को घटाना। यह एक बड़े सिद्धान्त का भाग है: ख्रीष्टीयता समाज के लिए भला है। यह हमें उत्तम पति-पत्नी, माता-पिता, नागरिक और कर्मचारी बनाता है। ख्रीष्टीयता हमें ख्रीष्टियों और अ-ख्रीष्टियों दोनों के लिए उपयोगी बनाता है। सभी भले कार्यों का वेतन अच्छा नहीं होता। सभी भले कार्यों की प्रशंसा बार-बार नहीं होती। परन्तु सभी भले कार्य उपयोगी अवश्य होते हैं।

कार्य करना बुलाहट है

दूसरों के भले के लिए हमें किसी विशेष कार्य में बुलाने में परमेश्वर के हाथ को पहचानना, भले ही वह क्या हो, हमें अधिक आनन्द और अर्थ प्रदान कर सकता है। क्या आपका स्वामि कृतघ्न है? क्या आपके सहकर्मी कठिन हैं? क्या आपके ग्राहकों को सन्तुष्ट करना कठिन है? तो भी ठीक है। आपका कार्य परमेश्वर की ओर से एक बुलाहट है। यदि विश्वासयोग्यता हमारा लक्ष्य है, और परमेश्वर की स्तुति हमारी अभिलाषा है, तो निराशाओं को सहना सरल हो जाता है। यीशु हमारा उदाहरण है—जिसने अपमान सहते समय, “अपने आप को उस पर सौंप दिया जो धर्म से न्याय करता है” (1 पतरस 2:23)।

यह अच्छा है बहुत रीतियों में हमें उस कार्य को चुनने की स्वतन्त्रता मिली है जिसके लिए हम सबसे उपयुक्त हैं। जहाँ तक सम्भव हो, हमें ऐसे कार्य की खोज करनी चाहिए जो हमारे वरदानों, स्वभाव, योग्यताओं और रुचियों को अधिकतम रूप से उपयोग में लाए। इस प्रकार हमारा कार्य बोझ नहीं वरन्, जैसा डोरोथी सेयर्स ने कहा है, ऐसा कार्य होगा जिसमें हम “आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक सन्तुष्टि” पाएँगे, और जो “माध्यम होगा जिसमें हम स्वयं को परमेश्वर को अर्पित करते हैं।”

यदि आप कार्य की खोज में हैं, तो कौशल-विकास और जीवन-वृत्त (बायोटेटा) तैयार करने में परमेश्वर की ईश्वरीय-प्रावधान पर भरोसा रखें, जिससे आप अपनी वांछित भूमिका पा सकें। अपने कार्य को बुलाहट के रूप में देखना हमें यह स्मरण कराता है कि हम अपनी वर्तमान स्थिति में विश्वासयोग्य रहें, यह जानते हुए कि कम से कम अभी के लिए परमेश्वर ने हमें उसी में नियुक्त किया है।

कार्य एक सुसमाचार-प्रचार के लिए अवसर तैयार करता है

उन भले कार्यों के द्वारा जिन्हें हमारा व्यावसायिक कार्य सम्भव करता है, हम परमेश्वर के अनुग्रह के सुसमाचार को अलंकृत करते हैं (तीतुस 2:9–10)। अर्थात्, हम उसे दूसरों के लिए अधिक आकर्षक बनाते हैं। कार्यस्थल हमें उन अविश्वासियों के साथ मेलजोल का अवसर देता है जिन्हें हम अन्यथा कभी न जानते। अपने सहकर्मियों के प्रति दयालुता हमें यह अवसर देता है कि हम ख्रीष्ट के कार्य के विषय में बात करें—क्रूस पर और हमारे जीवनों में। जैसे ही द्वार खुलते हैं, हमें दूसरों से संवाद करना चाहिए, प्रेम में सत्य बोलना चाहिए, और परमेश्वर से यह प्रार्थना करनी चाहिए कि वह उन्हें मन फिराव प्रदान करे।

यीशु ने इसकी बात की थी, जब उसने हमें शिक्षा दी कि हम अपना प्रकाश मनुष्यों के सामने चमकाएँ, जिससे कि वे हमारे भले कार्यों को देखें और हमारे स्वर्गीय पिता की महिमा करें (मत्ती 5:16)।

कार्य पवित्रीकरण का साधन है

अन्ततः, जहाँ तक हमारा कार्य कठिनाइयों से जुड़ा है—और एक पतित संसार में यह निश्चित ही होगा—हमारा कार्य पवित्रीकरण का साधन है। इसे ध्यान में रखते हुए, हम हर प्रकार की परीक्षाओं का सामना करते समय उसे पूरा आनन्द मान सकते हैं, यह जानते हुए कि हमारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है (याकूब 1:2–3)। परमेश्वर का धन्यवाद हो कि जिसने हम में यह उत्तम कार्य आरम्भ किया, वह उसे पूरा करने में विश्वासयोग्य रहेगा (फिलिप्पियों 1:6)।

प्रिय ख्रीष्टीय, कार्यस्थल पर जो आप करते हैं, वह निरर्थक नहीं है। यह आपके जीवन पर परमेश्वर की बुलाहट का एक महत्वपूर्ण भाग है—एक ऐसा क्षेत्र जिसमें आप आत्मिक आराधना अर्पित कर सकते हैं, सामूहिक भलाई में योगदान कर सकते हैं, और भले कार्यों के द्वारा अपने पड़ोसी से प्रेम कर सकते हैं।                

 यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।