धर्मीकरण का रोमन कैथोलिक दृष्टिकोण (भाग 2)

 
 

क्या आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि वर्तमान रोमन कैथोलिक शिक्षा सभी प्रोटेस्टेन्टों को शापित ठहराती है? आश्चर्य की बात यह है कि यदि इस विषय में अधिकतर प्रोटेस्टेन्टों से गहराई से पूछा जाए, तो वे इस कथन पर अविश्वास प्रकट करेंगे। फिर भी, यह सत्य है। रोमन चर्च आज भी वही दृष्टिकोण बनाए रखती है, जिसे उसने सोलहवीं शताब्दी में ट्रेंट की सभा में अपनाया था।

उस सभा में विवाद का प्रमुख विषय धर्मीकरण का सिद्धान्त था, विशेष रूप से उसमें विश्वास की भूमिका। ऐतिहासिक प्रोटेस्टेन्टवाद और रोमन कैथोलिकवाद के बीच के भेदों को ठीक प्रकार से समझने के लिए धर्मीकरण की स्पष्ट और गहन समझ आज भी अनिवार्य है। आज के पाठ में, डॉ. स्प्रॉल इसी विषय पर स्पष्टता प्रदान करते हैं।