What Is Self-Discipline?

आत्म-अनुशासन क्या है?

13 अगस्त 2026
What Is Self-Discipline?

आत्म-अनुशासन क्या है?

13 अगस्त 2026

मैं बुद्धि में कैसे बढ़ सकता हूँ?

How Can I Grow in Wisdom?

qयह विचार करना उपयोगी होगा कि हम किसी भी कौशल में कैसे बढ़ते हैं। जब हम किसी कार्य को अच्छी तरह करना सीखना चाहते हैं, तो उसके लिए जानबूझकर किया गया प्रयत्न प्रयास, शिक्षा और उसके कार्यान्वयन की आवश्यकता होती है। बुद्धि के कौशल में बढ़ना भी इससे भिन्न नहीं है। 

जानबूझकर प्रयत्न

बुद्धि की कुशलता ऐसी वस्तु है जिसे हम माँगते भी हैं और खोजते भी हैं। अन्ततः, बुद्धि वह वरदान है जो हमें यीशु ख्रीष्ट में दिया गया है। प्रेरित पौलुस कहता है कि यीशु में “बुद्धि और ज्ञान के समस्त भण्डार छिपे हुए हैं” (कुलुस्सियों 2:3)। हमारा प्रभु अपने चुने हुओं के लिए उस बुद्धि का अधिकार रखता है। जैसा कि पौलुस अन्य स्थान पर कहता है, वह “हमारे लिये परमेश्वर की ओर से बुद्धि ठहरा” (1 कुरिन्थियों 1:30)। परमेश्वर के परिवार में हमें गोद लिया, हमें यीशु में बुद्धि का वचन दिया गया है, जो हमें माँगने का साहस और यह आश्वासन देता है कि हमारा उदार परमेश्वर उसे देगा (याकूब 1:5)। परन्तु बुद्धि का दिया जाना उन साधनों से अलग नहीं है जिनके द्वारा परमेश्वर उसे देता है। 

बाइबल यह भी सिखाती है कि बुद्धि में वृद्धि जानबूझकर किए गए प्रयत्न के द्वारा आती है। बुद्धि कोई जन्मजात गुण नहीं है, और न ही वह केवल आयु बढ़ने के साथ अपने आप आ जाती है। फिर से, बुद्धिमान राजा निर्देश देता है कि हमें उसका पीछा करना चाहिए:

यदि तू उसे चाँदी के समान ढूँढ़े,
और गुप्त धन के समान उसकी खोज में लगा रहे,
तब तू यहोवा के भय को पहचान सकेगा,
और तुझे परमेश्वर का ज्ञान प्राप्त होगा। (नीतिवचन 2:4–5)

हम बुद्धि में माँगने और खोजने के द्वारा बढ़ते हैं: “माँगो, तो तुम्हें दिया जाएगा, ढूँढ़ो, तो तुम पाओगे” (मत्ती 7:7)।

परमेश्वर की शिक्षा द्वारा प्राप्त

किसी भी कौशल में बढ़ने के लिए शिक्षा की भी आवश्यकता होती है, और बुद्धि के विषय में भी यही सत्य है। हम बुद्धि के विषय में परमेश्वर के वचन और उसकी सृष्टि से सीखते हैं। बाइबल कहती है,

क्योंकि यहोवा ही बुद्धि देता है;
उसके मुख से ज्ञान और समझ प्राप्त होती है। (नीतिवचन 2:6)

पवित्रशास्त्र से मिलने वाली शिक्षा अनेक प्रकार से आती है, परन्तु बाइबल निरन्तर इस बात पर बल देती है कि माता-पिता अपने बच्चों को बुद्धि की शिक्षा दें। इसका स्पष्ट उदाहरण सुलैमान के जीवन में मिलता है, क्योंकि नीतिवचन का प्रारम्भिक भाग एक पिता के द्वारा अपने पुत्र को शिक्षा देने के रूप में लिखा गया है। वह कहता है:

हे पुत्रों, पिता की शिक्षा सुनो,
और ध्यान दो, ताकि तुम समझ प्राप्त करो,
क्योंकि मैं तुम्हें उत्तम उपदेश देता हूँ;
मेरी शिक्षा को मत छोड़ना।
जब मैं अपने पिता का पुत्र था,
कोमल था, और अपनी माता की दृष्टि में इकलौता था,
तब उसने मुझे शिक्षा दी और मुझसे कहा,
“तेरा हृदय मेरे वचनों को दृढ़ता से थामे रहे।” (नीतिवचन 4:1–4)

तीमुथियुस का उदाहरण भी हमें प्रोत्साहित करता है, जो बचपन से ही पवित्रशास्त्र को जानता था, जो उसे उद्धार के लिए बुद्धिमान बना सकता था (2 तीमुथियुस 3:15)। यह मानने का अच्छा कारण है कि उसने अपनी माता और नानी की शिक्षा पर ध्यान दिया था, जब वे उसे वही बुद्धि सिखा रही थीं (देखें 2 तीमुथियुस 1:5)।

सृष्टि भी एक ऐसी पुस्तक है जो हमें परमेश्वर की बुद्धि के विषय में शिक्षा दे सकती है। इसका कारण यह है कि बुद्धि का सृष्टि में भी एक भाग था, और इसलिए बुद्धि की छाप हर स्थान पर दिखाई देती है (नीतिवचन 8:22–31)। स्मरणीय रूप से, नीतिवचन के अन्तिम भाग के निकट आगूर कहता है,

पृथ्वी पर चार वस्तुएँ छोटी हैं,
परन्तु वे अत्यन्त बुद्धिमान हैं। (नीतिवचन 30:24–28)

इसके बाद वह चींटी, शापान (बदजर), टिड्डी और छिपकली की बुद्धि का उल्लेख करता है। यहाँ तक कि सृष्टि के छोटे और महत्वहीन भाग भी हमें कुशल और ईश्वरभक्त जीवन जीने के सिद्धान्तों की शिक्षा देते हैं।

बुद्धि का प्रयोग

कोई भी कौशल तब तक प्राप्त या विकसित नहीं होता जब तक हम उसे प्रयोग करने के लिए प्रतिबद्ध न हों। सुलैमान ने कहा,

हे मेरे पुत्र, मेरी शिक्षा को मत भूल,
परन्तु तेरा हृदय मेरी आज्ञाओं को मानता रहे। (नीतिवचन 3:1)

इसी कारण बुद्धि और मूर्खता की तुलना एक मार्ग से की गई है—मार्ग का पूरा उद्देश्य यही है कि हम उस पर अपने पाँव रखें और चलें। यदि हम बुद्धि में बढ़ना चाहते हैं, तो हमें बुद्धि का अभ्यास करना होगा, केवल उसके सुनने वाले ही नहीं, करने वाले भी बनना होगा। ऐसा करते हुए हमारी प्रगति धीमी हो सकती है, परन्तु हमारी उन्नति की प्रतिज्ञा की गई है :

धर्मियों का मार्ग भोर के प्रकाश के समान है,
जो पूर्ण दिन होने तक अधिक से अधिक चमकता जाता है।
दुष्टों का मार्ग घोर अन्धकार के समान है;
वे नहीं जानते कि वे किस बात से ठोकर खाते हैं। (नीतिवचन 4:18–19)

बुद्धि में बढ़ना किसी अन्य कौशल को सीखने और उसमें बढ़ने से भिन्न नहीं है। एक बहुत ही साधारण रीति से, हम जानबूझकर किए गए प्रयत्न के द्वारा इसकि खोज करते हैं, वचन और सृष्टि से निरन्तर शिक्षा प्राप्त करते हैं, और इसके सिद्धान्तों को प्रयोग में लाते हुए कुशलतापूर्वक ईश्वरभक्त जीवन जीते हैं, जब तक कि यीशु के अनुग्रह के द्वारा आने वाले युग में हमें सिद्ध न कर दिया जाए।

 यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

काय्ल बोर्ग

काय्ल बोर्ग

रेव्ह काय्ल बोर्ग विन्चेस्टर, कैन्ज़स में विन्चेस्टर रिफॉर्मड् प्रेसबिटेरियन चर्च के वरिष्ठ पास्टर हैं।