What Is Christian Maturity?

 मसीही परिपक्वता क्या है?

24 सितम्बर 2026
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 मसीही परिपक्वता क्या है?

24 सितम्बर 2026

दैनिक जीवन में परमेश्वर की पवित्रता की रूपान्तरणकारी सामर्थ्य

The Transforming Power of God’s Holiness in Everyday Life

 ख्रीष्ट में मेरे हृदय परिवर्तन के कुछ ही सप्ताह बाद, मेरे बहुत-से मित्रों ने मुझसे अनेक प्रश्न पूछे, विशेषकर इस विषय में कि अब मेरे रात्रिकालीन जीवन का क्या होगा। क्या मैं अब भी बाहर जाया करूँगा? क्या मुझे शराब पीने की “अनुमति” होगी? उन  आरम्भिक दिनों में एक प्रश्न विशेष रूप से मेरे मन में बस गया। मेरे एक मित्र के पिता मेरे पास आए और उन्होंने पूछा, “यह जानकर कैसा लगता है कि अब जीवन भर सब लोग बाहर जाकर मौज-मस्ती करेंगे और जीवन का आनन्द उठाएँगे, जबकि तुम चर्च जाने में ही लगे रहोगे?” आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ तो इस प्रश्न पर मुस्कुरा देता हूँ, परन्तु उस समय इसने मुझे भीतर ही भीतर यह पूछने पर विवश कर दिया: क्या मैं अपने “पार्टी” वाले जीवन को छोड़ने के लिए तैयार (और समर्थ) था? क्या मैं रविवार का दिन कलीसिया में बिताने के लिए तैयार था? क्या मैं, प्रेरित पौलुस के शब्दों में कहें तो, “पीछे की बातों को भूलकर आगे की बातों की ओर बढ़ने” के लिए तैयार था? (फिलिप्पियों 3:13)।

उपर्युक्त जैसी बातचीत  ख्रीष्ट का अनुसरण करने के मेरे तीस से अधिक वर्षों के दौरान बार-बार होती रही है, और ऐसे प्रश्नों का केन्द्र हमेशा सांसारिक ही रहा है। विषय हमेशा मैं और मेरी इच्छाएँ, मैं कौन हूँ, और मैं क्या चाहता हूँ—यही रहा है। यह कभी भी परमेश्वर और उसकी इच्छाओं, वह कौन है, और वह क्या चाहता है—इस विषय में नहीं रहा। यह आश्चर्य की बात नहीं है; हमें कभी भी किसी अविश्वासी से यह अपेक्षा नहीं करनी चाहिए कि वह भौतिक संसार से परे सोच सके। इन बातों को केवल वही समझ सकते हैं जो  ख्रीष्ट के साथ एक किए गए हैं। जैसा कि पौलुस कहता है, “शारीरिक मनुष्य परमेश्वर के आत्मा की बातें ग्रहण नहीं करता, क्योंकि वे उसकी दृष्टि में मूर्खता की बातें हैं; और न वह उन्हें समझ सकता है, क्योंकि उनका निर्णय आत्मिक रीति से होता है” (1 कुरिन्थियों 2:14)।

यही बात हमें इस लेख के विषय तक ले आती है: परमेश्वर की पवित्रता की रूपान्तरणकारी सामर्थ्य। मसीही बनने के कुछ महीनों बाद यह बात मेरे लिए यह स्पष्ट हो गई कि इस संसार की बातों को पीछे छोड़कर पवित्रता का अनुसरण करने की मेरी इच्छा,  ख्रीष्ट में परमेश्वर के अनुभवात्मक ज्ञान पर निर्भर थी। जितना गहरा मेरा ज्ञान इस बात का होता गया कि परमेश्वर कौन है, उतनी ही अधिक मेरी लालसा उसके समान बनने की होती गई। यह बात विशेष रूप से परमेश्वर की पवित्रता के संदर्भ में सत्य है।

परमेश्वर की पवित्रता केवल उसका एक गुण नहीं है—वह उसके स्वरूप की नींव और उसका वास्तविक सार है। यह उसकी पूर्ण पवित्रता, नैतिक सिद्धता, और हर सामान्य अथवा अपवित्र वस्तु से उसका पूर्ण पृथक्करण है। धर्मशास्त्री लुई बर्खोफ़ के शब्दों में, पवित्र परमेश्वर “अपनी सारी सृष्टि से सर्वथा भिन्न है, और अनन्त महिमा में उन सबसे अति उच्च है।”¹ पवित्रता परमेश्वर का एकमात्र ऐसा गुण है जिस पर तीन बार दोहराकर बल दिया गया है: “पवित्र, पवित्र, पवित्र” (यशायाह 6:3; प्रकाशितवाक्य 4:8)। यह त्रिगुण घोषणा इस बात पर बल देती है कि परमेश्वर पूर्णतः सबसे अलग है—उसके समान कोई नहीं। जोएल बीकी इसे इस प्रकार वर्णित करते हैं: “वह अपनी महिमा के कारण और अपनी महिमा के लिए सबसे अलग है… वह इसलिए पवित्र है क्योंकि वह परमेश्वर है, और वह इसलिए भी पवित्र है क्योंकि वह अपने प्रत्येक कार्य में अपने स्वरूप को प्रकट करने के लिए उत्सुकता से समर्पित है।”²

हमारी पवित्रता के विपरीत, जो त्रुटिपूर्ण और असंगत है, परमेश्वर की पवित्रता सनातन और अपरिवर्तनीय है। वह उसके प्रत्येक कार्य को परिभाषित करती है। उदाहरण के लिए, उसका प्रेम पवित्र है; उसका न्याय पवित्र है; उसकी दया पवित्र है; उसकी सामर्थ्य पवित्र है; उसका सत्य पवित्र है। इसलिए, परमेश्वर की पवित्रता को समझना और उसे अपने जीवन में अपनाना हमारे सोचने, जीने और आराधना करने के तरीके को रूपांतरित कर देता है।

जब हम वास्तव में परमेश्वर की पवित्रता का सामना करते हैं, तो हमारा जीवन परिवर्तित हो जाता है। यशायाह 6 पर विचार कीजिए। यशायाह परमेश्वर की पवित्रता के दर्शन से अभिभूत हो जाता है। वह पूरी तरह टूट जाता है और पुकार उठता है, “हाय मुझ पर!” (यशायाह 6:5)। परमेश्वर की पवित्रता का सामना हमें नम्र बनाता है, हमारे पाप को प्रकट करता है, और हमारे मन तथा हृदय को नया आकार देता है, जिससे हम अपनी इच्छाओं और अपनी इच्छा को उसकी इच्छाओं और उसकी इच्छा के अनुसार करने लगते हैं। और हमारे लिए परमेश्वर की इच्छा यही है कि हम पवित्र हों, क्योंकि वह स्वयं पवित्र है: “पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ” (लैव्यव्यवस्था 11:44; 1 पतरस 1:16)। जब हम उसकी आवश्यकता को पहचानते हैं, तब हम उसके उद्देश्यों के लिए अलग किए जाते हैं और उसके स्वरूप में रूपान्तरित किए जाते हैं।

इस विषय को विस्तार से समझाना इस संक्षिप्त चिंतन के दायरे से बाहर है, परन्तु शिक्षा अत्यन्त सरल है: यदि आप  ख्रीष्ट के अधिक समान बनना चाहते हैं, तो अपने पवित्र परमेश्वर—पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा—को जानने का हर सम्भव प्रयास कीजिए। आर. सी. स्प्रौल की पुस्तक द होलीनेस ऑफ गॉड (The Holiness of God), या जे. आई. पैकर की नोइंग गॉड (Knowing God), अथवा स्टीफ़न चार्नॉक की द एग्ज़िस्टेन्स ऐंड एट्रिब्यूट्स ऑफ गॉड (The Existence and Attributes of God) पढ़िए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रार्थनापूर्वक पवित्रशास्त्र का अध्ययन इस उद्देश्य से कीजिए कि  ख्रीष्ट का आपका ज्ञान बढ़े। जैसा कि डी. ए. कार्सन ने कहा है:

“लोग स्वतः पवित्रता की ओर नहीं बढ़ते। अनुग्रह से प्रेरित प्रयत्न के बिना लोग ईश्वरभक्ति, प्रार्थना, पवित्रशास्त्र की आज्ञाकारिता, विश्वास और प्रभु में आनन्द की ओर स्वाभाविक रूप से नहीं बढ़ते। हम तो समझौते की ओर बहटे चले जाते हैं; … हम अनाज्ञाकारिता की ओर बहते चले जाते हैं; … हम अन्धविश्वास की ओर बहते चले जाते हैं।”³

 ख्रीष्ट में और उसके द्वारा हमारे पवित्र परमेश्वर का बढ़ता हुआ ज्ञान इस बहाव को रोक देता है, हमें पवित्रता के मार्ग पर स्थापित करता है, और हमें स्थायी आनन्द तथा सच्चे सुख से भरे जीवन का आश्वासन देता है। इसलिए, अगली बार जब कोई आपसे पूछे, “यह जानकर कैसा लगता है कि अब जीवन भर सब लोग आहार जा कर मौज-मस्ती करेंगे और जीवन का आनंद उठाएँगे, जबकि तुम चर्च जाने में ही लगे रहोगे?” तो मुस्कुराकर कहिए: “यदि तुम मेरे पवित्र परमेश्वर को जानते, यदि तुम केवल यीशु को जानते, तो तुम ऐसा प्रश्न कभी न पूछते। उसकी आराधना करने के लिए कलीसिया में जाना ही मेरा आनन्द है, क्योंकि केवल वही मेरे हृदय को हर्ष और अत्यन्त आनन्द से भर सकता है!” (भजन संहिता 16:11; यशायाह 35:10; यूहन्ना 16:24)।

 यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

ड्रू डिनार्डो

ड्रू डिनार्डो

³ डी. ए. कार्सन, फॉर द लव ऑफ गॉड: अ डेली कम्पैनियन फॉर डिस्कवरिंग द रिचेस ऑफ गॉड्स वर्ड (For the Love of God: A Daily Companion for Discovering the Riches of God’s Word), खण्ड 2 (गुड न्यूज पुब्लिशर्स Good News Publishers, 2006), जैसा कि गुडरीडस. कॉम Goodreads.com पर उद्धृत किया गया है।