
मैं बुद्धि में कैसे बढ़ सकता हूँ?
13 अगस्त 2026यीशु नया दाऊद है
क्या आपने कभी किसी बाइबल-अध्ययन समूह में बैठकर उसके अगुवे की बाइबल सम्बन्धी गहन समझ पर आश्चर्य किया है? कल्पना कीजिए कि जब वे दोनों निराश शिष्य इम्माऊस के मार्ग पर पुनरुत्थित यीशु से मिले, तब उन्होंने कैसा अनुभव किया होगा। लूका हमें बताता है कि “मूसा से प्रारम्भ करके सब नबियों और समस्त पवित्रशास्त्र में से अपने सम्बन्ध की बातों का अर्थ उन्हें समझा दिया” (लूका 24:27)। मैं केवल अनुमान ही लगा सकता हूँ कि जब वे उसकी बातें सुन रहे थे, तो उन्हें कितना अधिक आश्चर्य हो रहा होगा। उसी दिन बाद में यीशु अन्य शिष्यों के सामने भी प्रकट हुआ और “उसने उनकी बुद्धि खोल दी कि वे पवित्रशास्त्र को समझें” (लूका 24:45)। मैं प्रायः सोचता हूँ कि जब उनके पुनरुत्थित प्रभु ने पहली बार यह समझने में सहायाता की कि सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र उसी के विषय में है, तब उनके मन में क्या चल रहा होगा। मुझे लगता है कि यीशु जब उन्हें व्यक्तिगत रूप से यह दिखा रहा था कि मूसा, नबियों और भजनों ने उसके विषय में क्या शिक्षा दी है (लूका 24:44), तब वे सब सम्भवतः स्तब्ध होकर मौन बैठे रहे होंगे।
निस्सन्देह, पुराने नियम में ऐसे अनेक खण्ड हैं जो स्पष्ट और अद्भुत रीति से यीशु की ओर संकेत करते हैं (उदाहरण के लिए , यशायाह 53)। परन्तु जब यीशु ने अपने शिष्यों से कहा कि “समस्त पवित्रशास्त्र” उसी के विषय में कहता है, तो उसका क्या अभिप्राय था?
पवित्रशास्त्र में प्रारूप-विज्ञान
क्या आपने कभी प्रारूप-विज्ञान (Typology) शब्द सुना है? प्रेरित पौलुस इस शब्द का उपयोग यीशु और परमेश्वर के प्रथम मनुष्य, आदम, के मध्य सम्बन्ध को स्पष्ट करने के लिए करता है। वह आदम को “उसका प्रारूप जो आने वाला था” अर्थात् यीशु कहता है (रोमियों 5:14)। प्रारूप (type) का अर्थ है—एक नमूना, एक पूर्वरूप या एक ऐसा प्रतिमान जो आगे आने वाली किसी बड़ी वास्तविकता की ओर संकेत करता है। आदम परमेश्वर का सृजा हुआ सेवक-पुत्र था (लूका 3:38)। यीशु परमेश्वर का अजन्मा, आज्ञाकारी सेवक-पुत्र है। आदम पूरी रीति से असफल हुआ, परन्तु यीशु ने महिमामय विजय प्राप्त की।
यद्यपि पवित्रशास्त्र में कहीं भी राजा दाऊद को आदम की तरह “उसका प्रारूप जो आने वाला था” नहीं कहा गया है, फिर भी जब हम पवित्रशास्त्र को उसके वास्तविक स्वरूप—अर्थात् परमेश्वर के उद्धार के प्रगतिशील इतिहास—के रूप में पढ़ते हैं, तब हम देखते हैं कि नया नियम प्रारूपात्मक रूप से यीशु को “नया दाऊद” प्रस्तुत करता है; वह राजा जो आया और जिसने सम्पूर्ण धार्मिकता को पूरा किया। आइए, इसे संक्षेप में समझें।
2 शमूएल 23:1 में दाऊद अपने विषय में कहता है कि वह “याकूब के परमेश्वर का अभिषिक्त” है। पुराने नियम में तीन प्रकार के महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों का परमेश्वर द्वारा अभिषेक किया जाता था जिससे कि वे उसकी और उसकी प्रजा की सेवा करें—नबी, याजक और राजा। नबियों का अभिषेक परमेश्वर का वचन सुनाने के लिए होता था। याजकों का अभिषेक लोगों की ओर से परमेश्वर के सामने बलिदान चढ़ाने और उनके लिए मध्यस्थता करने के लिए होता था। राजाओं का अभिषेक परमेश्वर के वचन के अनुसार उसकी प्रजा का नेतृत्व करने और उस पर शासन करने के लिए होता था।
ये तीनों पद राजा दाऊद के जीवन में एक साथ दिखाई देते हैं। दाऊद “यहोवा का अभिषिक्त” था, परन्तु दुःखद वास्तविकता यह है कि वह अपने इस दायित्व में असफल रहा। उसने पाप किया, जैसे अन्य सभी नबियों, याजकों और राजाओं ने किया। वह वह प्रतिज्ञात पुरुष नहीं था जो सर्प के सिर को कुचलता और परमेश्वर के पापमय संसार के लिए उद्धार लाता (उत्पत्ति 3:15)।
नबी, याजक और राजा के रूप में यीशु
यही पृष्ठभूमि हमें यीशु को “नया और श्रेष्ठ दाऊद” समझने में सहायता करती है। यीशु वह अभिषिक्त नबी है जिसने न केवल परमेश्वर का वचन विश्वासयोग्यता से सुनाया, वरन् वह स्वयं देहधारी परमेश्वर का वचन था (यूहन्ना 1:1–18; इब्रानियों 1:1–4)। यीशु वह सिद्ध अभिषिक्त याजक है जो बलिदान चढ़ाने नहीं, परंतु स्वयं वह बलिदान बनने आया जिसने उस पाप का पूर्ण, अन्तिम और सदा के लिए प्रायश्चित्त किया जो हमें परमेश्वर से अलग करता है (इब्रानियों की पत्री देखें)। यीशु वह अभिषिक्त राजा भी है जो अपनी प्रजा पर सिद्ध बुद्धि, अनुग्रह और सामर्थ्य के साथ शासन करता है, उनका मार्गदर्शन करता है और उन्हें उनके सभी शत्रुओं से सुरक्षित रखता है।
इसी कारण यीशु को मसीह, मसीहा, अर्थात् अभिषिक्त कहा जाता है। राजा दाऊद जिस बात का एक अत्यन्त त्रुटिपूर्ण प्रतिरूप था, यीशु उसी बात की सिद्ध और पूर्ण परिपूर्ति है। समग्र रूप से नया नियम यीशु को दाऊद से श्रेष्ठ नबी, श्रेष्ठ याजक और श्रेष्ठ राजा के रूप में प्रस्तुत करता है, जैसे वह आदम से श्रेष्ठ सेवक-पुत्र भी है।
दाऊद से आगे यीशु की ओर संकेत
आरम्भिक कलीसिया के कुछ पिताओं ने कभी-कभी प्रारूप-विज्ञान का कल्पनाशील ढंग से उपयोग किया, परन्तु यह इस बात का कारण नहीं है कि हम परमेश्वर के वचन में विद्यमान उन प्रातिरूपों की उपेक्षा करें जिनका उद्देश्य हमें यीशु की ओर संकेत करना है। यीशु ही वह एकमात्र व्यक्ति है जिसके विषय में परमेश्वर ने कहा, “यह मेरा प्रिय पुत्र है; इसकी सुनो” (मरकुस 9:7; साथ ही देखें, मत्ती 3:17; 17:5; लूका 9:35)।
नए नियम में सत्रह पदों में यीशु को “दाऊद का पुत्र” कहा गया है। ये शब्द सबसे पहले उसके दाऊद के वंश से शारीरिक रूप से उत्पन्न होने पर बल नहीं देते, (यद्यपि यह सत्य है), अपितु यह उसका मसीही पदनाम है। जब यीशु का फरीसियों के साथ विवाद हुआ, तब उसने उनसे पूछा, यदि मसीह दाऊद का पुत्र है, तो दाऊद स्वयं उसे प्रभु क्यों कहता है? (मरकुस 12:35–37; भजन 110:1)। यीशु जानता था कि दाऊद उसकी ओर संकेत कर रहा था। इसलिए हमें पवित्रशास्त्र को प्रभु यीशु ख्रीष्ट के दृष्टिकोण से पढ़ना सीखना चाहिए। सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र उसी के विषय में है।
यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

