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एकेश्वरवाद क्या है?

What Is Monotheism?

मनुष्य स्वभावतः धार्मिक है, और इस प्रवृत्ति से कभी मुक्त नहीं हो सकता।  संसार भर  में लोग प्रमुख विश्व धर्मों में से किसी एक का अनुसरण करते हैं, या उन असंख्य सम्प्रदायों का जो इन धर्मों से निरन्तर निकलते रहे हैं,  या फिर ऐसी धार्मिक व्यवस्थाओं का पालन करते हैं जिनका अभी तक कोई व्यवस्थित अभिलेखन भी नहीं हुआ है। प्रत्येक धर्म उस सत्य के साथ किसी न किसी प्रकार के सामंजस्य या मेल की खोज करता है, जिसे हम “परम सत्य” कह सकते हैं, अर्थात् वह स्रोत जिससे समस्त अस्तित्व उत्पन्न हुआ है।  इस परम तत्त्व की कल्पना कभी अवैयक्तिक रूप में की जाती है, जैसा कि अनेक पूर्वीय धर्मों में पाया जाता है, और कभी वैयक्तिक रूप में, जैसा कि उन धर्मों में देखा जाता है जो एक व्यक्तिगत परमेश्वर अथवा अनेक पृथक् व्यक्तिगत देवताओं की आराधना करते हैं। 

जो धर्म किसी वैयक्तिक परम तत्त्व की आराधना करते हैं, उन्हें मुख्यतः तीन वर्गों में विभाजित किया जा  सकता है—एकेश्वरवाद का समर्थन करने वाले, एकप्रधानेश्वरवाद (हेनोथीवाद) को मानने वाले, तथा अनेकेश्वरवाद  को स्वीकार करने वाले।

ईश्वरवाद के विविध रूप 

एकेश्वरवाद को समझने के लिए उसके साथ-साथ ईश्वरवाद के अन्य रूपों की परिभाषाओं को भी जानना आवश्यक है। ‘एकेश्वरवाद’ शब्द यूनानी भाषा के दो शब्दों—मोनोस (monos; अर्थात् “एक, अकेला, एकमात्र”) और थियोस (theos; अर्थात् “ईश्वर”)—से बना है। इसका तात्पर्य यह है कि केवल एक ही सत्य परमेश्वर का अस्तित्व है और उसी की आराधना की जानी चाहिए। सम्भवतः सर्वाधिक प्रसिद्ध एकेश्वरवादी धर्म तथाकथित अब्राहमी धर्म हैं— मसीहत, यहूदी धर्म, और इस्लाम। 

अनेकेश्वरवाद शब्द यूनानी भाषा के दो शब्दों—पोलिस (polys; “अनेक”) और थियोस (theos; “ईश्वर”)—से बना है। अतः अनेकेश्वरवाद  को मानने वाला धर्म वह है जो एक से अधिक देवताओं की आराधना करता है। अनेक लोग प्राचीन यूनान और रोम के अनेकेश्वरवादी धर्मों से परिचित हैं, जिनमें ज़ीउस, एथेना और मार्स थे। आज भी हिन्दू धर्म की कुछ धाराओं तथा चर्च ऑफ़ जीसस क्राइस्ट ऑफ़ लैटर-डे सेंट्स, जिसे सामान्यतः मॉर्मनवाद (Mormonism) कहा जाता है, में बहुदेववाद के स्वरूप पाए जाते हैं। व्यवहार में अनेकेश्वरवादी  विश्वास-प्रणालियाँ प्रायः एकप्रधानेश्वरवाद  (हेनोथीवाद) का रूप धारण कर लेती हैं।

एकप्रधानेश्वरवाद का अनुयायी एक सर्वोच्च देवता की आराधना करता है, रन्तु अन्य निम्न श्रेणी के देवताओं के अस्तित्व का इन्कार नहीं करता। यह शब्द यूनानी भाषा के दो शब्दों—हेन (hen; “एक”) और थियोस (theos; “ईश्वर”)—से बना है। अनेकेश्वरवादी धर्म प्रायः अपने किसी एक देवता को अन्य देवताओं से ऊपर विशेष महत्त्व देकर व्यवहार में एकप्रधानेश्वरवाद का रूप धारण कर लेते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ हिन्दू अन्य देवताओं की अपेक्षा ब्रह्मा, शिव अथवा विष्णु के प्रति विशेष भक्ति रखते हैं । 

एकेश्वरवाद के विविध रूप 

यद्यपि सभी एकेश्वरवादी यह मानते हैं कि केवल एक ही सत्य परमेश्वर है, तथापि सभी एकेश्वरवादी इस बात पर सहमत नहीं हैं कि यह एक वैयक्तिक परमेश्वर किस प्रकार अस्तित्व में है और वह कौन है। मूलतः, एकेश्वरवाद के दो प्रमुख रूप हैं—एकलव्यक्तिईश्वरवाद और त्रिएकतावाद । 

एकलव्यक्तिईश्वरवाद (यूनिटेरियनवाद) यह प्रतिपादित करता है कि एक ही ईश्वरिय सारतत्त्व(अर्थात् वह तत्त्व है जिसके कारण परमेश्वर परमेश्वर है) तथा उस ईश्वरिय सारतत्त्वमें केवल एक ही ईश्वरीय व्यक्ति विद्यमान है। यहूदी धर्म और इस्लाम ऐसे धर्मों के उदाहरण हैं जो एकलव्यक्तिईश्वरवादी एकेश्वरवाद का समर्थन करते हैं। इन दोनों धर्मों के अनुसार, परमेश्वर एक अकेला व्यक्ति है, जो समस्त सृष्टि से पहले अकेला ही अस्तित्व में था। सृष्टि की रचना से पहले उसका किसी के साथ कोई सम्बन्ध नहीं था, क्योंकि उसके अतिरिक्त कुछ भी अस्तित्व में नहीं था जिससे वह सम्बन्ध स्थापित कर सकता। इसलिए, अन्य व्यक्तियों के साथ प्रेम और सहभागिता के सम्बन्ध में रहना परमेश्वर के स्वरूप का मूलभूत अंग नहीं माना जाता। परिणामस्वरूप, इस्लाम जैसे धर्म वास्तव में यह शिक्षा नहीं देते कि मनुष्य परमेश्वर के साथ व्यक्तिगत सम्बन्ध स्थापित कर सकता है। वहाँ प्रायः परमेश्वर को इतना परात्पर समझा जाता है कि वह अपनी सृष्टि के निकट किसी वास्तविक और अर्थपूर्ण रीति से कभी नहीं आता। 

इसके विपरीत, त्रिएकतावाद यह सिखाता है कि केवल एक ही ईश्वरीय सारतत्त्व है, परन्तु उसी एक ईश्वरीय सारतत्त्वमें तीन अनादि और परस्पर भिन्न व्यक्ति विद्यमान हैं।  एकेश्वरवाद का यह रूप केवल वास्तविक मसीही धर्म के लिए विशिष्ट है, जो यह अंगीकार करता है कि एक ही परमेश्वर तीन व्यक्तियों—पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा—में विद्यमान है। क्योंकि ये तीनों ही एकमात्र सत्य परमेश्वर हैं, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति ईश्वरीय सारतत्त्व को पूर्णतः धारण करता है। ऐसा नहीं है कि प्रत्येक व्यक्ति परमेश्वर का केवल एक-तिहाई भाग है और तीनों को मिलाकर एक परमेश्वर बनता है। इसके विपरीत, प्रत्येक व्यक्ति वास्तव में और पूर्णतः परमेश्वर है, और प्रत्येक अपने समस्त गुणों में अन्य दोनों के समान है। अतः पिता की सामर्थ्य वही है जो पुत्र की सामर्थ्य है, और वही पवित्र आत्मा की सामर्थ्य भी है। पिता का ज्ञान वही है जो पुत्र का ज्ञान है, और वही पवित्र आत्मा का ज्ञान भी है। यही बात परमेश्वर के समस्त ईश्वरीय गुणों के विषय में सत्य है।

यद्यपि एक परमेश्वर के तीनों व्यक्तित्व तत्त्वतः एक ही हैं, तथापि वे उन विशेषताओं के आधार पर एक-दूसरे से भिन्न हैं जिन्हें उनके व्यक्तिगत गुण अथवा उत्पत्ति-संबंध कहा जाता है; और यही वह एकमात्र पक्ष है जिसमें वे परस्पर भिन्न हैं। पिता अनादिकाल से अजन्मा है, पुत्र अनादिकाल से पिता से उत्पन्न है, और पवित्र आत्मा अनादिकाल से पिता और पुत्र से प्रवाहित होता है। ये विशेषताएँ ईश्वरीय स्वरूप को विभाजित किए बिना व्यक्तियों के भेद को प्रकट करती हैं।

अतः परमेश्वर अनादिकाल से एक ही सारतत्त्व में तीन व्यक्तियों के रूप में विद्यमान है, और पिता, पुत्र तथा पवित्र आत्मा अनादिकाल से एक-दूसरे से प्रेम करते आए हैं। परमेश्वर परात्पर है और इस कारण हमसे अत्यन्त भिन्न है, फिर भी वह अपने स्वभाव से सम्बन्ध स्थापित करने वाला परमेश्वर है और उसने अपनी स्वतंत्र इच्छा से हमारे समीप आने का निश्चय किया है। वह हमारे सबसे निकट तब आया जब पिता ने पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से अपने एकलौते उत्पन्न पुत्र को मानवीय स्वभाव धारण करने के लिए भेजा। यह पुत्र प्रभु यीशु ख्रीष्ट है—एक व्यक्ति जो पूर्णतः परमेश्वर और पूर्णतः मनुष्य है।

निष्कर्ष 

एकेश्वरवाद यह प्रतिपादित करता है कि केवल एक ही सत्य परमेश्वर है, परन्तु विभिन्न एकेश्वरवादी धर्म इस एक सत्य परमेश्वर के विषय में भिन्न-भिन्न समझ रखते हैं। हम जानते हैं कि एकमात्र सत्य परमेश्वर वास्तव में पवित्र त्रिएक है। सत्य परमेश्वर सारतत्त्व में एक और व्यक्तित्व में तीन है—पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा। मसीही इसी एक परमेश्वर के त्रिएक नाम में बपतिस्मा ग्रहण करते हैं, जिससे वे अनन्तकाल तक उसकी महिमा करें और उसी में आनन्दित रहें (मत्ती 28:18–20)।

 यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

रॉर्बट रॉथवेल

रॉर्बट रॉथवेल

रेव रॉबर्ट रोथवेल लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ के वरिष्ठ लेखक, टैबलेटटॉक पत्रिका के एसोसिएट एडिटर, रिफॉर्मेशन बाइबिल कॉलेज में रेजिडेंट एडजंक्ट प्रोफेसर और पोर्ट ऑरेंज, फ्लोरिडा में स्प्रूस क्रीक प्रेस्बिटेरियन चर्च के एसोसिएट पास्टर हैं।