त्रिएकता में हर्षित होना- लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़
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त्रिएकता में हर्षित होना

सम्पादक की टिप्पणी: यह टेबलटॉक पत्रिका श्रंखला का छठवां अध्याय है: त्रिएकता

“परमेश्वर प्रेम है” (1 यूहन्ना 4:8)। वे तीन शब्द इससे अधिक उत्साह से भरे नहीं हो सकते हैं। वे सजीव, मोहक लगते हैं, और एक अंगीठी के समान ऊष्मोत्पादग हैं। पर “परमेश्वर त्रिएकता है”? नहीं, वही प्रभाव नहीं है; वह केवल स्नेहहीन और उबाऊ लगता है। यह सब स्वाभाविक है, पर ख्रीष्टियों को प्रतीत होने वाली उबाऊ भाषा के पीछे की वास्तविकता को देखना चाहिए। हाँ, त्रिएकता को अप्रगतिशील और अप्रासंगिक सिद्धान्त के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है, पर सत्य यह है कि परमेश्वर प्रेम है क्योंकि परमेश्वर एक त्रिएकता है।

त्रिएकता में छलांग लगाना यह चखकर देखने के लिए एक अवसर है कि प्रभु भला है, जिससे आपका हृदय जीता जाए और आपके जी में जी भर आए। क्योंकि केवल जब आप समझेंगे कि परमेश्वर का एक त्रिएकता होने का अर्थ क्या है, तब ही आप वास्तव में परमेश्वर की सुन्दरता, उसकी उमड़ने वाली करुणा, और उसके हृदय को पकड़ने वाली मनोरमता को वास्तव में अनुभव कर पाएंगे। यदि त्रिएकता कुछ ऐसी बात होती जिसे हम परमेश्वर से घटा सकते थे, हम उसको किसी कष्टप्रद बोझ से मुक्त नहीं कर रहे होंगे; हम ठीक वहीं बात को कतर रहे होंगे जो उसके विषय में इतना हर्षजनक है। क्योंकि परमेश्वर त्रिएक है, और त्रिएक के रूप में वह इतना भला और मनोहर है।

मैं आपको दिखाना चाहता हूँ कि यह कैसे है।

यीशु से आरम्भ करना
हमारे विश्वास का मूल सिद्धान्त परमेश्वर से कम कुछ नहीं है, और सुसमाचार का प्रत्येक पहलू केवल उस सीमा तक ख्रीष्टिय है जहाँ तक वह इस परमेश्वर की, त्रिएक परमेश्वर की, अभिव्यक्ति तथा कार्य है। मैं यीशु नाम के पुरुष की मृत्यु पर विश्वास कर सकता हूँ; मैं उसके दैहिक पुनरुत्थान पर विश्वास कर सकता हूँ; मैं केवल अनुग्रह के द्वारा उद्धार पर भी विश्वास कर सकता हूँ; पर यदि मैं विश्वास न करूँ कि परमेश्वर त्रिएक है, तो, बहुत साधारण रीति से, मैं ख्रीष्टीय नहीं हूँ। आइए हम इसको पवित्रशास्त्र में देखें।

यूहन्ना ने अपना सुसमाचार लिखा, वह हमसे कहता है, ताकि, “तुम विश्वास करो कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र ख्रीष्ट है, और विश्वास करके उसके नाम से जीवन पाओ” (यूहन्ना 20:31)। यह किसी भी सुसमाचार प्रचारक के लिए एक प्रशंसनीय उद्देश्य कथन होगा: यह देखना कि व्यक्ति वास्तविक ख्रीष्टिय विश्वास में आए। परन्तु परमेश्वर के पुत्र पर विश्वास करने के लिए वह सबसे आधारभूत बुलाहट भी त्रिएक विश्वास के लिए निमंत्रण है। यीशु का वर्णन परमेश्वर के पुत्र के रूप में किया गया है। परमेश्वर उसका पिता है। और वह ख्रीष्ट है, आत्मा के द्वारा अभिषिक्त जन। जब आप बाइबल के यीशु के साथ आरम्भ करते हैं, आप त्रिएक परमेश्वर को प्राप्त करते हैं।

“यीशु ख्रीष्ट, परमेश्वर का पुत्र” का नाम हमारे परमेश्वर के सनातन, सारवत्त जीवन के लिए एक खिड़की के समान है। यूहन्ना 17:24 में यीशु प्रार्थना करता है, “हे पिता . . . तूने जगत की उत्पत्ति से पहले मुझ से प्रेम किया।” और यीशु ख्रीष्ट के द्वारा प्रकट किया गया परमेश्वर यही है। इससे पहले कि उसने सृष्टि की, इससे पहले कि उसने संसार पर राज्य किया, किसी भी बात से पहले, इस परमेश्वर में पिता अपने पवित्र आत्मा में अपने पुत्र से प्रेम कर रहा था।

पिता अपने पुत्र से एक विशेष रीति से प्रेम करता है, एक ऐसी बात जिसे हम देख सकते हैं यदि हम यीशु के बपतिस्मा को देखें:

बपतिस्मा लेने के पश्चात यीशु तुरन्त पानी से बाहर आया, और देखो, आकाश खुल गया और उसने परमेश्वर के आत्मा को कबूतर की भांति उतरते और अपने ऊपर आते देखा। और देखो, यह आकाशवाणी हुई: “यह मेरा प्रिय पुत्र है जिस से मैं अति प्रसन्न हूँ।” (मत्ती 3:16-17)

यहाँ, पिता अपने पुत्र के लिए अपने प्रेम और अपनी प्रसन्नता की उद्घोषणा करता है, और वह ऐसा तब करता है जब आत्मा यीशु के ऊपर आता है। रोमियों 5:5 में, उदाहरण के लिए, पौलुस लिखता है कि पिता कैसे अपने प्रेम को पवित्र आत्मा के द्वारा हमारे हृदयों में उण्डेलता है। तो, पिता पुत्र के लिए अपने प्रेम को उसे आत्मा देने के द्वारा उद्घोषित करता है।

दूसरे शब्दों में, “त्रिएकता” के विषय में बात करना केवल एक माध्यम है उस परमेश्वर के विषय में बात करने का जो यीशु में प्रकट किया जाता है, जिस परमेश्वर से हम सुसमाचार में मिलते हैं। त्रिएकता अमूर्त अनुमान का परिणाम नहीं है, क्योंकि जब आप आत्मा द्वारा अभिषिक्त पिता के पुत्र, यीशु का प्रचार करते हैं, आप त्रिएक परमेश्वर का प्रचार करते हैं।

उन बातों का आनन्द उठाना जो पुत्र के हैं
पिता ने पुत्र को हमारे पास क्यों भेजा? उत्तर का कुछ अंश हमारी पतित स्थिति और पाप है। उत्तर का कुछ अंश है कि परमेश्वर ने जगत से प्रेम किया, हमारे विद्रोह में भी (यूहन्ना 3:16)। इतना ही अद्भुत है, पर यूहन्ना के सुसमाचार में बाद में, यीशु एक इससे भी अधिक मौलिक और प्रबल कारण की बात करता है। अपने पिता से प्रार्थना करते हुए, यीशु कहता है:

हे धार्मिक पिता, यद्यपि संसार ने तुझे नहीं जाना, फिर भी मैंने तुझे जाना, और इन्होंने भी जाना है कि तूने ही मुझे भेजा है, और मैंने तेरा नाम इनको बताया और बताता रहूँगा, कि जिस प्रेम से तू ने मुझ से प्रेम किया वह उनमें रहे, और मैं उनमें। (17:25-26)

अर्थात, पिता ने पुत्र को भेजा अपने आप को प्रकट करने के लिए—जिसका अर्थ यह नहीं  है कि वह अपने विषय में कुछ जानकारी को केवल डाउनलोड करना चाहता था, पर यह कि सनातन काल से पुत्र के लिए पिता का प्रेम उन लोगों में हो जो उस पर विश्वास करते हैं, और कि हम पुत्र का आनन्द उस रीति से उठाएं जैसे पिता सदा करता आया है। यहाँ, ऐसा उद्धार है जिसे कोई एक-व्यक्ति परमेश्वर नहीं दे सकता था चाहे वह ऐसा करना चाहता भी: पिता पुत्र के लिए अपने सनातन प्रेम में इतना हर्षित होता है कि उसकी इच्छा है कि उसे उन सब के साथ साझा करें जो विश्वास करेंगे। अन्ततः, पिता ने पुत्र को भेजा क्योंकि पिता ने पुत्र से प्रेम किया और वह उस प्रेम और सहभागिता को पवित्र आत्मा के द्वारा साझा करना चाहता था। जगत के लिए पिता का प्रेम अपने पुत्र के लिए उसके सर्वशक्तिशाली प्रेम का अतिप्रवाह है।

तो फिर पिता आशीषों को दूर से नहीं छिड़कता है, और उसका उद्धार दूर नहीं रखा जाता है। हम अपने सृष्टिकर्ता से केवल तरस और क्षमा नहीं प्राप्त करते हैं। इसके विपरीत, वह अपने सभी आशीषों को अपने पुत्र पर उण्डेलता है और फिर उसे भेजता है ताकि हम उसकी महिमामय परिपूर्णता में साझा कर सकें। पिता हमसे इतना प्रेम करता है कि वह चाहता है कि हम उस प्रेमपूर्ण संगति में जुड़ जाएं जिसका आनन्द वह पुत्र और आत्मा के साथ उठाता है। और इसका अर्थ है कि हम परमेश्वर को ठीक वैसे जान सकते हैं जैसा वह है: पिता के रूप में। वास्तव में, हम पिता को अपने पिता के रूप में जान सकते हैं।

यूहन्ना 1:18 परमेश्वर पुत्र का वर्णन करता है कि वह अनन्त काल से पिता के गोद में रहा है। यह कल्पना करने के लिए कठिन है, पर यीशु घोषणा करता है कि उसकी इच्छा है कि विश्वासी उसके साथ वहाँ हो सकें (7:24)। वास्तव में, पिता ने इसी कारण से उसको भेजा: कि हम जिन्होंने उसे तिरस्कारा है पुनः लौटाए जा सकें—और केवल सृष्टि के रूप में नहीं वरन सन्तानों के रूप में लौटाए जा सकें, उस भरपूर प्रेम का आनन्द उठाने के लिए जिसे पुत्र ने सर्वदा जाना है।

परमेश्वर में हर्षित होना
जे.आई. पैकर ने एक बार लिखा:
यदि आप परखना चाहते हैं कि एक व्यक्ति कितनी अच्छी रीति से ख्रीष्टियता को समझता है, यह पता लगाइए कि वह परमेश्वर की सन्तान होने, और परमेश्वर को अपने पिता के रूप होने के विचार को कितना महत्व देता है। यदि यह वह विचार नहीं है जो उसकी आराधना और प्रार्थनाएं और जीवन को देखने के दृष्टिकोण को उत्साहित करता है और नियंत्रित करता है, इसका अर्थ है कि वह ख्रीष्टियता को बहुत अच्छे से नहीं समझता है।

वास्तव में, जब एक व्यक्ति जानबूझकर और साहस के साथ सर्वशक्तिमान को “पिता” कहता है, यह दिखाता है कि उसने परमेश्वर के विषय में और अपने उद्धार के लक्ष्य के विषय में कुछ सुन्दर और आधारभूत पकड़ लिया है। और यह हमारे हृदयों को पुनः उसकी ओर कैसे आकर्षित करता है! क्योंकि यह तथ्य कि परमेश्वर पिता खुश है और पुत्र के लिए अपने प्रेम को साझा करने और इस प्रकार से हमारे पिता के रूप में जाने जाने के लिए हर्षित होता है प्रकट करता है कि वह कितने अगाध रीति से अनुग्रहकारी और कृपालु है।

परमेश्वर को हमारे पिता के रूप में जानना न केवल उसके विषय में हमारी दृष्टि को अद्भुत रीति से मग्न करता है, पर यह सबसे गहरी सान्त्वना और आनन्द प्रदान करता है। इस बात का आदर चौंका देने वाला है। किसी धनी राजा की सन्तान होना अच्छा होता; ब्रह्माण्ड के सम्राट का प्रिय होना शब्दों से परे है। स्पष्ट रीति से, इस परमेश्वर का उद्धार पापों की क्षमा से भी अच्छा है, और निश्चित रीति से अधिक सुरक्षित है। अन्य ईश्वर क्षमा दे सकते हैं, पर यह परमेश्वर हमें अपनी सन्तानों के रूप में स्वागत करता है और हमें अपनाता है, और हमें कभी दूर नहीं करेगा। वह उस प्रकार के सम्बन्ध को हमारे सामने नहीं रखता है जो “वह मुझसे प्रेम करता है,” से “वह मुझसे प्रेम नहीं करता है” में परिवर्तित होता रहता है, जिसमें मुझे त्रुटिहीन रीति से व्यवहार करने के द्वारा अपने आप को उसके पक्ष में रखने के लिए प्रयास करना है। नहीं, “जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर की सन्तान होने का अधिकार दिया” (यूहन्ना 1:12)। परमेश्वर के प्रेम का सर्वदा आनन्द उठाने के लिए यीशु हमें सुरक्षा प्रदान करता है।

उत्तेजित हृदय
आपका ख्रीष्टिय जीवन कैसा है? आपके विश्वास का आकार क्या है? अन्त में, यह सब इस पर निर्भर होगा कि आप क्या सोचते हैं कि परमेश्वर कैसा है। यह बात कि परमेश्वर कौन है सब कुछ को आगे बढ़ाता है।

आप किस परमेश्वर को चाहेंगे? आप किस परमेश्वर की उद्घोषणा करेंगे? बिना पुत्र यीशु के, हम नहीं जान सकते हैं कि परमेश्वर सच में एक प्रेमी पिता है। बिना पुत्र यीशु के, हम परमेश्वर को अपने प्रेमी पिता के रूप में नहीं जान सकते हैं। पर जैसे मार्टिन लूथर ने जाना, यीशु के द्वारा हम जान सकते हैं कि परमेश्वर हमारा पिता है, और “हम उसके पिता सदृश हृदय में देख सकते हैं और समझ सकते हैं कि वह कितनी असीम रीति से हम से प्रेम करता है। यह हमारे हृदयों को गरमाएगा, और उन्हें उत्तेजित करेगा।”


  1.  त्रिएकतावादी ईश्वरविज्ञान में, संगति वह सनातन, प्रेमपूर्ण सम्बन्ध है जो त्रिएकता के तीन व्यक्तियों का एक दूसरे के साथ है। सनातन काल से, त्रिएकता के प्रत्येक व्यक्ति ने प्रेम किया है और उससे प्रेम किया गया है। हमारे छुटकारे में, केवल अनुग्रह के द्वारा, हम एस सहभागिता को साझा करते हैं। हम पिता के द्वारा अपनाए जाते हैं, उसी प्रेम को प्राप्त करते हुए जो उसने पुत्र के लिए पवित्र आत्मा की एकता में रखा है (यूहन्ना 17:20-26)।
यह लेख मूलतः टेबलटॉक पत्रिका में प्रकाशित किया गया।
माइकल रीव्ज़
माइकल रीव्ज़
डॉ माइकल रीव्ज़ वेल्स में यूनियन स्कूल ऑफ थियोलॉजी के अध्यक्ष और ईश्वरविज्ञान के प्रोफेसर हैं। वे यूरोपीयन थियॉलोजियन्स नेटवर्क के निर्देशक भी हैं। वे कईं पुस्तकों के लेखक हैं, जिनमें, रिजॉसिंग इन क्रीइस्ट है। वे लिग्निएर शिक्षण श्रृंखला द इंग्लिश रेफर्मेशन ऐण्ड द प्योरिटन्ज़ के मुख्य शिक्षक हैं।