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एक प्रभु

One Lord

अठारह वर्ष पहले, जब मैं अपने शैक्षिक जीवन के पहले पुराने नियम की कक्षा में बैठा, तो रूपक रूप से मेरा मुँह आश्चर्य से खुला रह गया। मैं एक धर्मनिरपेक्ष विश्वविद्यालय में पढ़ रहा था, इसलिए मुझे सच्ची बाइबलीय शिक्षा की अधिक आशा नहीं थी। फिर भी, मुझे यह आशा थी कि पवित्रशास्त्र के साथ उचित व्यवहार किया जाएगा क्योंकि मेरे प्राध्यापक एक रूढ़िवादी यहूदी थे। आप कल्पना कर सकते हैं कि मुझे कितना आश्चर्य हुआ जब मेरे प्राध्यापक ने कहा कि विश्वासयोग्य प्राचीन इस्राएली अन्य ईश्वरों के अस्तित्व को नकारते नहीं थे। उन्होंने कहा कि वे यहोवा की आराधना अन्य सभी ईश्वरों से ऊपर करते थे, पर वे मानते थे कि वे अन्य ईश्वर वास्तविक थे।  

उदारवादी “उच्च-आलोचनात्मक” विद्वान मेरे प्राध्यापक के इस विचार को—जिसे एकैकाधिदेववाद (henotheism) कहा जाता है। ये आलोचक कहते हैं कि सच्चा एकेश्वरवाद—यह विश्वास कि केवल एक ही परमेश्वर का अस्तित्व है—इस्राएल के इतिहास में बहुत बाद में विकसित हुआ। एकैकाधिदेववाद का समर्थन मुख्य रूप से पंचग्रंथ में “अन्य देवताओं” के उल्लेख को इस रूप में पढ़ने पर आधारित है कि मूसा अन्य जातियों के देवताओं के वास्तविक अस्तित्व को मानता था, परन्तु मानता था कि इस्राएल को केवल यहोवा की ही आराधना करनी थी (उदाहरण के लिए, निर्गमन 20:3)।

एकैकाधिदेववाद को पवित्रशास्त्र में “ढूँढने” के लिए अविश्वासी विद्वानों को व्यापक संदर्भों को अनदेखा करते हुए सूक्ष्म बातों में उलझना पड़ता है। यह बात कि मूसा ने केवल एक ही परमेश्वर के अस्तित्व को स्वीकार किया पंचग्रंथ के पहले ही अध्याय से स्पष्ट है। प्राचीन निकट-पूर्व की अन्य सृष्टि-वर्णनाओं के विपरीत, बाइबल में हम यह नहीं पढ़ते कि अनेक देवताओं के बीच युद्ध से पृथ्वी उत्पन्न हुई। उत्पत्ति 1 एक ही परमेश्वर को प्रस्तुत करता है जिसने “आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की” (उत्पत्ति 1:1)। यहोवा ने, जो इस वृतान्त में अकेला कार्य करने वाला है—अपने वचन द्वारा समस्त विश्व को रचा।

प्राचीन निकट-पूर्व में बहुदेववाद की व्यापकता को देखते हुए, बाइबल के लेखक बार-बार यह दृढ़ता से कहते हैं कि केवल एक ही परमेश्वर है। शेमा (व्यवस्थाविवरण 6:4) में एकेश्वरवाद की पुष्टि से ठीक पहले हम पढ़ते हैं, “उसको छोड़ और कोई नहीं” (व्यवस्थाविवरण 4:39)। एलिय्याह और बाल के नबियों के बीच सामना होने पर केवल यहोवा ही उत्तर देता है—क्योंकि यहोवा अस्तित्व में है और बाल है ही नहीं (1 राजा 18:20–40)। यशायाह कहता है, “[यहोवा] छोड़ कोई ईश्वर नहीं,” और वह लकड़ी से बने मूर्तियों द्वारा दर्शाए गए देवताओं की सेवा करने की मूर्खता को दिखाता है (यशायाह 44)।

प्रेरितों ने सबसे प्रबल रूप से एकेश्वरवाद की घोषणा की जब उन्होंने यूनानी मूर्तिपूजा का सामना किया। पौलुस रोमियों 1 में पुराने नियम की इस शिक्षा को आगे बढ़ाता है कि अन्य देवताओं का कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं है, यह समझाते हुए कि बहुदेववाद तब उत्पन्न होता है जब लोग सच्चे परमेश्वर के ज्ञान को दबाते हैं और ऐसे ईश्वर गढ़ लेते हैं जिन्हें वे अपनी इच्छा के अनुसार नियन्त्रित कर सकें (रोम. 1:18–23)। यही प्रेरित तिमुथियुस को, जो एक मूर्तिपूजक परिवेश में सेवा कर रहा था, स्मरण दिलाता है कि “एक ही परमेश्वर है” (1 तीमुथियुस 2:5)। पूरे प्रकाशितवाक्य में, यूहन्ना रोमी धर्म की निरर्थकता को उजागर करता है और सर्वशक्तिमान प्रभु के सिंहासन पर बैठने वाले किसी भी झूठे दावेदार के अन्ततः पतन का वर्णन करता है।

यह तथ्य कि एकमात्र परमेश्वर अपनी सृष्टि पर स्वयं को प्रकट करता है, बाइबल के एकेश्वरवाद की नींव को दृढ़ करता है। यदि हमें केवल यह पता हो कि एक परमेश्वर का अस्तित्व है, पर उसके विषय में और कुछ न जानते हों, तो इसका क्या लाभ होता? ऐसा ईश्वर व्यवहारिक रीति से अनुपस्थित ही होता, और हमें स्वयं ही उसकी इच्छा का पता लगाना पड़ता, यदि चाहता भी कि हम उसकी इच्छा का पालन करें। परन्तु पवित्रशास्त्र का परमेश्वर स्वयं को प्रकट करता है—वास्तव में, यदि हमें उसे जानना है, तो उसका स्वयं को प्रकट करना अनिवार्य है। यह प्रकाशन स्वयं सृष्टि के माध्यम से भी आता है (भजन 19; रोमियों 1:18–32), परन्तु सृष्टिकर्ता का उद्धार-दायक ज्ञान केवल बाइबल के विशेष प्रकाशन के द्वारा ही सम्भव है (मत्ती 11:27; 2 तीमुथियुस 3:16–17)।

तो इसका क्या अर्थ है?

बाइबल का एकेश्वरवाद केवल कोई अमूर्त कल्पना नहीं है, परन्तु इसके जीवन और सेवकाई के लिए कम से कम चार व्यावहारिक परिणाम हैं:

निश्चितता — परमेश्वर स्वयं को स्पष्ट और सत्य रूप में प्रकट करता है, इसलिए हमें यह अनुमान लगाने की आवश्यकता नहीं रहती कि वह हमसे क्या अपेक्षा करता है। आधुनिक लोग स्वयं को प्रायः “खोजी” मानते हैं, जो परमेश्वर को समझने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। परन्तु केवल अनुमान पर आधारित होना किसी के अनन्त भाग्य के लिए अत्यन्त अस्थिर नींव है।

साहस — पाश्चात्य मसीहियों को अभी सिंहों के आगे नहीं फेंके जा रहा है। फिर भी, यदि हमें कभी गम्भीर दुःख सहना पड़े, तो हम दृढ़ नहीं रह पाएँगे यदि हम इस बात के प्रति आश्वस्त नहीं हैं कि पविशास्त्र का परमेश्वर ही एकमात्र परमेश्वर है। यदि हम इस सत्य पर डगमगाएँ कि एक परमेश्वर का अर्थ है संसार के लिए एक ही उद्धारकर्ता, तो हम थोड़ी-सी कठिनाई पर ही मसीह का इनकार कर देंगे। इस नींव के बिना, हम धार्मिक सापेक्षवाद के आगे झुक जाएँगे। एकेश्वरवाद के प्रति दानिय्येल के समर्मपण ने उसे मूर्तिपूजा का प्रतिरोध करने में बल प्रदान किया। परमेश्वर के अनुग्रह से, हम भी उसके उदाहरण का अनुसरण करते हैं। हम यह नहीं डरते कि हमारे शत्रु हमारी सम्पत्ति, हमारे परिजनों या हमारे नश्वर जीवन के साथ क्या कर सकते हैं, क्योंकि यदि केवल एक ही परमेश्वर है और हम उसी के पक्ष में हैं, तो सताव हमारे लिए केवल “हल्का-सा क्लेश” है, उसकी “चिरस्थायी महिमा” के तुलना में जो हमारे लिए रखी गई है (2 कुरिन्थियों 4:7–18)।

दृढ़विश्वास — दृढ़विश्वास और साहस अविभाज्य और परस्पर निर्भर हैं। साहस हमें एकमात्र सच्चे परमेश्वर के प्रति प्रेम में दृढ़ बने रहने में सक्षम बनाता है। दृढ़विश्वास हमें इस योग्य बनाता है कि हम कठिनाई आने से पहले ही दृढ़ता से खड़े रहें। यदि हमारा विश्वास इस सत्य पर आधारित है कि केवल एक ही परमेश्वर है और इसलिए एक ही सत्य है, तो हमारी प्रचार-सेवा, शिक्षा, सुसमाचार-प्रचार और सांस्कृतिक सहभागिता सब दृढ़ होंगे। हम पतित मानवता के गढ़ों का सामना करेंगे, और आत्मा हमारे शब्दों का उपयोग करके पापियों के हृदयों को नरम करेगा। कलीसिया को ईश्वरभक्त दृढ़विश्वास वाले पुरुषों और स्त्रियों की अत्यन्त आवश्यकता है। ऐसा दृढ़विश्वास बाइबल के एकेश्वरवाद के प्रति अडिग समर्पण से आरम्भ होता है।

स्पष्टता — बाइबलीय एकेश्वरवाद को समझना हमें इसमें स्पष्ट होने में सहायता करता है कि हम क्या मानते हैं और हमें क्या सिखाना चाहिए। हम यह नहीं मानते कि एक ही परमेश्वर है जो कई नामों से जाना जाता है और जो उद्धार के अनेक मार्ग प्रदान करता है। हम यह भी पुष्टि नहीं करते कि केवल इतना विश्वास करना पर्याप्त है कि एक परमेश्वर का अस्तित्व है। हम यह अंगीकार करते हैं कि हमें बाइबल में प्रकट परमेश्वर पर भरोसा करना आवश्यक है, जिसकी आराधना सबसे सद्भावी मुसलमान, मॉर्मन, यहोवा के साक्षी, जीववादी, या आधुनिक यहूदी भी नहीं करते।

एकेश्वरवाद एकलव्यक्तिईश्वरवादी नहीं है

स्पष्टता के लिए, बाइबल का एकेश्वरवाद एकलव्यक्तिईश्वरवादी (unitarianism) नहीं है। परमेश्वर के एक होने के सम्बन्ध में शेमा की साक्षी का पूर्ण अर्थ बाइबल की इस शिक्षा में है कि परमेश्वर की एकता कोई अविभाजित एकता नहीं है। उसकी एकता उसके ईश्वरीय सारतत्व से सम्बन्धित है, पर यह एक ही ईश्वरीय सारतत्व तीन विशिष्ट व्यक्तियों द्वारा सम्पूर्ण रूप से और समान रूप से साझा किया गया है। पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा—तीनों पूर्ण और समान रूप से परमेश्वर हैं, परन्तु पिता पुत्र नहीं है, पुत्र आत्मा नहीं है, और आत्मा पिता नहीं है (यूहन्ना 1:1; 14:16–17; 2 कुरिन्थियों 13:14)।

उद्धार त्रिएक परमेश्वर का कार्य है। पिता पुत्र को भेजता है; पुत्र पाप के लिए प्रायश्चित करता है; और आत्मा इस प्रायश्चित को हम पर लागू करता है। आत्मा अपने लोगों को नया जन्म देता है; इस प्रकार वे केवल पुत्र पर भरोसा करते हैं; और पुत्र प्रभु के चुने हुए लोगों के राज्य को पिता के सम्मुख प्रस्तुत करता है, जिससे कि “परमेश्वर सब में सब कुछ हो” (यूहन्ना 3:5, 16; 1 कुरिन्थियों 15:20–28; इब्रानियों 1:1–4)।

उद्धार पाने के लिए हमें त्रिएकता को पूर्ण रूप से समझना आवश्यक नहीं है। ऐसी समझ सृजे गए प्राणियों के लिए असम्भव है। परन्तु, जैसा कि एथनेसियस का विश्वास-वचन कहता है, कोई भी व्यक्ति उद्धार नहीं पा सकता जो इस सत्य का नकरता है कि हम त्रिएकता में एक परमेश्वर और एकता में त्रिएकता की आराधना करते हैं।

 यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

रॉर्बट रॉथवेल
रॉर्बट रॉथवेल
रेव रॉबर्ट रोथवेल लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ के वरिष्ठ लेखक, टैबलेटटॉक पत्रिका के एसोसिएट एडिटर, रिफॉर्मेशन बाइबिल कॉलेज में रेजिडेंट एडजंक्ट प्रोफेसर और पोर्ट ऑरेंज, फ्लोरिडा में स्प्रूस क्रीक प्रेस्बिटेरियन चर्च के एसोसिएट पास्टर हैं।