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5 बातें जो आपको पवित्रता के विषय में जाननी चाहिए

5 Things You Should Know About Holiness

1. परमेश्वर की पवित्रता महत्व रखती है।

सेनाओं का यहोवा, पवित्र, पवित्र, पवित्र है” (यशायाह 6:3; प्रकाशितवाक्य 4:8 भी देखें)। इन शब्दों की घोषणा स्वर्ग में की गई, जब यशायाह को प्रभु के सिंहासन के सम्मुख लाया गया था। स्वर्गीय प्राणी परमेश्वर के ईश्वरीय स्वभाव और अतुलनीय शुद्धता के प्रति भय में खड़े रहते हैं। जब हम सर्वशक्तिमान परमेश्वर से मिलते हैं और उसे वैसे ही देखते हैं जैसे वह है, तो हम उसी प्रकार प्रतिउत्तर करते हैं। हमारी भ्रष्टता सबसे उज्जवस रोशनी से उजागर हो जाती है (यशायाह 6:5) और हम पाप के कारण होने वाले भयानक और निश्चित न्याय को समझते हैं। फिर भी, आश्चर्यजनक रूप से, और निश्चित रूप से, महिमामय उद्धार भी उसकी पवित्रता से आता है (यशायाह 6:6–7)।

परन्तु बहुधा परमेश्वर की पवित्रता महत्वहीन लगती है, एक ऐसा विषय जो रोचक नहीं है। जब हम पाप के द्वारा अन्धे होते हैं, तो उसकी पवित्रता हमारे लिए कोई अर्थ नहीं रखती है।  फिर भी, परमेश्वर पवित्र बना रहता है, और उसके सब कार्य उसकी पवित्रता के अनुसार हैं, जिनमें सृष्टि, उद्धार, और न्याय सम्मिलित हैं। भले ही यह माना जाए या नहीं, उसकी पवित्रता सब के लिए अर्थ रखती है क्योंकि यह सब को प्रभावित करेगी, पाप के लिए दण्ड के रूप में, जब परमेश्वर न्याय करेगा, या फिर यीशु ख्रीष्ट “जो पवित्र और धर्मी है” (प्रेरितों के काम 3:14) के द्वारा उसके उद्धार के अनुग्रह के रूप में।

2. उद्धार के लिए पवित्रता आवश्यक है। 

हमें परमेश्वर के साथ चलने और उसके न्याय के लिए तैयार होने के लिए पवित्रता की आवश्यकता है। हमारे पापीपन का अर्थ है कि हम स्वयं के द्वारा पवित्रता को प्राप्त नहीं कर सकते हैं। परन्तु हमारे लिए अच्छा सन्देश है क्योंकि परमेश्वर इसे साझा करने की इच्छा करता है और अपने पवित्र आत्मा के द्वारा हम में इसे कार्यान्वित करता है (रोमियों 15:16)। साथ ही साथ, हमें अवश्य “सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप [रखना चाहिए], और उस पवित्रता के खोजी [बनना चाहिए], जिसके बिना प्रभु को कोई भी नहीं देख पाएगा” (इब्रानियों 12:14)। इसका अर्थ है कि अपनी पवित्रता में सुधार करना। परमेश्वर भी इसे देता है, परन्तु हम में इस कार्य करने के लिए हमें परमेश्वर को सक्रियता से खोजना होगा। हमें अवश्य ही उसे प्रसन्न करने का लक्ष्य रखना है, जबकि वह अकेला ही ऐसा करने की इच्छा और सामर्थ्य देता है (फिलिप्पियों 2:12-13)। इसमें हमारा पाप अंगीकार करना, उससे दूर जाना, और परमेश्वर की धार्मिकता के मार्गों का अनुसरण करना सम्मिलित हैं। हमारे लिए अपने पिता के जैसे देखभाल में, परमेश्वर ने अपने लोगों के लिए चाहा कि उनका उसके साथ व्यक्तिगत सम्बम्ध हो, जहाँ हम अपनी सभी आवश्यकताओं के लिए स्वतन्त्रता से उसके पास आए। यद्यपि हम बहुधा उसे निराश करते हैं, हम साहस रख सकते हैं कि वह उस कार्य को पूरा करेगा जिसे उसने आरम्भ किया है (फिलिप्पियों 1:6)।

3. पवित्रता उद्धार का केन्द्र है।

उद्धार में परमेश्वर की पवित्रता की केन्द्रीय भूमिका है, यद्यपि इसे बहुधा अनदेखा कर दिया जाता है। ख्रीष्ट में, परमेश्वर की पवित्रता का अर्थ है हमारे पाप का प्रकटीकरण और पाप से उद्धार। यह महत्वपूर्ण है कि परमेश्वर का वचन बार-बार यह आश्वासन देता है कि उसकी पवित्रता मसीही के उद्धार को निश्चित करती है (यशायाह 6:1–7; जकर्याह 3; रोमियों 5:10)।

हमें आगे पवित्रशास्त्र में ख्रीष्ट के जीवन, मृत्यु, पुनरुत्थान और नए जन्म के वर्णन द्वारा यह आश्वासन दिया जाता है कि परमेश्वर की पवित्रता मसीही उद्धार के केन्द्र में है। भजन 16:10 उसके जीवन और मृत्यु में उसकी पवित्रता का उल्लेख करता है: “तू नहीं छोड़ेगा…न अपने पवित्र जन को सड़ने देगा।” उसका पुनरुत्थान “पवित्रता के आत्मा के अनुसार” हुआ था (रोमियों 1:4)। हम परमेश्वर द्वारा पवित्र आत्मा के प्रावधान से नया जन्म पाते हैं (यूहन्ना 3:5-8)। परमेश्वर की पवित्रता इन सभी महत्वपूर्ण बिन्दुओं—वास्तव में प्रत्येक बिन्दु पर—हमारे उद्धार में जुड़ी हुई है। यीशु ख्रीष्ट में हम पर परमेश्वर के अनुग्रह के माध्यम से, हम उसकी पवित्रता को अपना उद्धार मान सकते हैं।

4. पवित्रता “दूसरों से अधिक पवित्र” होना नहीं है।

अंग्रेजी मुहावरा “दूसरों से अधिक पवित्र” ऐसे व्यक्ति के लिए उपयोग किया जाता है जो अपने पड़ोसी के साथ नैतिक रूप से स्वयं को उच्च समझता है। यह पवित्रता नहीं है, परन्तु यह इसके विपरीत है। मनुष्य में पवित्रता का अर्थ परमेश्वर के स्वरूप को प्रकट करना है, जो, जैसे यीशु ने प्रकट किया, “हृदय से नम्र और दीन” है (मत्ती 11:29)। ख्रीष्ट, जो पवित्रता में सिद्ध है, स्वेच्छा से सबसे दीन बना, और क्रूस पर श्रापित बना। हमारे लिए उसने हमारे पापों की लज्जा को सहा। विश्वासयोग्यता से उसकी शिक्षाओं का पालन करने का अर्थ है दूसरों के साथ सम्बन्धों में, नीचा स्थान लेना, न कि ऊँचा, (लूका 14:10-11; 22:24-30; यूहन्ना 13:14-17; 1 पतरस 5:6)।

स्वयं को “दूसरों से अधिक पवित्र” समझना स्व-धार्मिकता का स्वभाव है। यीशु द्वारा सुनाए गए फरीसी और चुंगी लेने वाले यीशु के दृष्टान्त में (लूका 18:9–14), स्व-धर्मी फरीसी का मानना था कि वह परमेश्वर के समीप है, परन्तु उसने स्वयं को अपने पड़ोसी से नैतिक रूप से उच्च समझा। उसने परमेश्वर को धन्यवाद दिया कि वह चुंगी लेने वाले के जैसा नहीं है, परन्तु चुंगी लेने वाला ही था जो धर्मी ठहराए जाकर घर लौटा, क्योंकि उसने परमेश्वर से दया मांगी। पवित्रता नैतिक गुणों से दिखती है, परन्तु जैसे ख्रीष्ट ने सिखाया और उदाहरण प्रस्तुत करता है, यह सदैव नम्रता के साथ और कभी भी आत्मिक घमण्ड के साथ नहीं होती है।

5. ईश्वरीय प्रावधान मसीहियों को पवित्रता में बढ़ने के लिए है।

क्योंकि परमेश्वर की प्रकट इच्छा है कि उसके बच्चे पवित्रता में उसके स्वरूप को प्रकट करे, इसलिए उसकी ईश्वरीय प्रावधान हमें यह उपलब्ध कराने और इसमें बढ़ने के लिए बनाई गई है। अपने ईश्वरीय प्रावधान में, वह हमारी सहायता करता है कि यीशु ख्रीष्ट में विश्वास करे। ईश्वरीय प्रावधान में वह हमारे पापों के लिए हमारी ताड़ना देता है कि हम उसकी पवित्रता में सहभागी हो जाएँ। यद्यपि यह कुछ समय के लिए दुखदायी प्रतीत होती है, यह धार्मिकता का फल देती है (इब्रानियों 12:10–11)। वह अपना पवित्र आत्मा, अपनी पवित्र बाइबल और “पवित्र” कही गई कलीसिया देता है, जिससे कि पवित्रता का मार्ग उपलब्ध और सिखाया जा सके। यहाँ तक परमेश्वर ने पवित्रता में हमारी बढ़ोतरी के लिए सप्ताह का भी निर्माण किया है: “विश्राम दिन को पवित्र मानने के लिए स्मरण रखना” (निर्गमन 20:8)। यह ऐसा दिन है जिसे उसने पवित्र ठहराया है (निर्गमन 20:11)। परमेश्वर ने प्रभु के दिन के विषय में जो कहा है, उसे मानने से हमें आने वाले सप्ताह के लिए सामर्थ्य और सहायता मिलती है, जैसे- जैसे हम उस पवित्र नगर में अपने उद्धारकर्ता को देखने के समीप पहुँचते हैं, जिसे हमारा स्वर्गीय पिता अनुग्रहपूर्वक हमारे लिए तैयार कर रहा है।

 यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

जॉन फर्ग्यूसन
जॉन फर्ग्यूसन
डॉ. जॉन सी.ए. फर्ग्यूसन स्कॉटलैंड के इनवरनेस में स्थित इनवरनेस एसोसिएटेड प्रेस्बिटेरियन चर्च के पादरी हैं।