What Is an Assurance of Pardon?
पापों की क्षमा का आश्वासन क्या है?
10 मार्च 2026
What Is an Assurance of Pardon?
पापों की क्षमा का आश्वासन क्या है?
10 मार्च 2026

पाप-अँगीकार क्या है?

What Is a Confession of Sin?

जब आप किसी धर्मसुधारवादी  मण्डली की आराधना सभा में जाते हैं, तो वहाँ का पास्टर आपको पाप-अँगीकार की प्रार्थना में अगुवाई करता हुआ दिखाई दे सकता है। वह पहले परमेश्वर का वचन पढ़ सकता है और फिर प्रार्थना कर सकता है या ख्रीष्ट के लहू के द्वारा क्षमा की घोषणा कर सकता है। इस पाप-अँगीकार की प्रार्थना का क्या अर्थ है? इसकी उत्पत्ति कहाँ से हुई? और आप इसमें और अधिक विश्वासयोग्यता के साथ कैसे सहभागी हो सकते हैं? 

पाप-अँगीकार का अर्थ 

1 यूहन्ना 1:9 कहता है, “यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है।” यहाँ यूहन्ना “मान लेना” (confess) के लिए जिस शब्द का प्रयोग करता है, उसका अर्थ है “उसी बात को कहना।” अपने पापों को मान लेना अर्थात् यह स्वीकार करना कि परमेश्वर अपने वचन में हमारे पाप को जैसा बताता है, हम भी उसी से सहमत हैं।

सामूहिक आराधना में, पाप-अँगीकार का सेवा में एक निश्चित समय होता है, जब सेवक ख्रीष्ट की देह को उनके पापों को स्वीकार करने में अगुवाई करता है। इसके पश्चात् वह प्रार्थना करता है कि वे ख्रीष्ट में प्रदान की गई प्रभु की दया को ग्रहण करें। 

पाप-अँगीकार की उत्पत्ति 

पुराने नियम के मिलापवाले तम्बू और मन्दिर में, यहोवा ने आज्ञा दी थी कि आँगन का द्वार पूर्व दिशा की ओर हो (निर्गमन 27:13)। यह दिशा इसलिए चुनी गई क्योंकि आदम और हव्वा को पाप में गिरने के बाद वाटिका से पूर्व दिशा की ओर से निकाल दिया गया था (उत्पत्ति 3:24)। यह द्वार इस्राएल के लिए परमेश्वर की ओर लौट आने का एक अनुग्रहपूर्ण निमंत्रण था। 

जब आराधक भीतर प्रवेश करते, तो सबसे पहले वे वेदी को देखते। प्रवेश करते ही वे रुकते, बलिदान के पशु पर हाथ रखते, तथा जब याजक उसे पवित्र परमेश्वर के लिए चढ़ा रहा होता था, उसी समय वे अपने पापों को स्वीकारते थे। यह विधि उन्हें स्मरण दिलाती थी कि “लहू बहाए बिना पापों की क्षमा नहीं होती” (इब्रानियों 9:22;साथ ही देखें लैव्यव्यवस्था 17:11)। 

इब्रानियों 9:10-22 में, लेखक इन बलिदानों का उल्लेख यह दिखाने के लिए करता है कि पशुओं का लहू वास्तव में शुद्ध करने की सामर्थ्य नहीं रखता था। इसके विपरीत, हम पढ़ते हैं: “तो ख्रीष्ट का लहू, जिसने अपने आप को सनातन आत्मा द्वारा परमेश्वर के सम्मुख निर्दोष चढ़ा दिया, तुम्हारे विवेक को मरे हुए कामों से और भी अधिक क्यों न शुद्ध करेगा कि तुम जीवित परमेश्वर की सेवा करो” (इब्रानियों 9:14)। 

परमेश्वर के पास आने के लिए ख्रीष्ट के लहू की आवश्यकता को दर्शाने के लिए, कई धर्मसुधारवादी आराधना विधियों में सामूहिक आराधना के आरम्भ या मध्य में पाप-अँगीकार की प्रार्थना राखी जाती है। 

जॉन कैल्विन ने जिनेवा और स्ट्रासबर्ग की कलीसियाओं को इस आह्वान के साथ आराधना आरम्भ करने का निर्देश दिया: 

“हमारी सहायता तो यहोवा ही के नाम से है, जिसने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की।” (भजन 124:8)

इसके बाद सार्वजनिक पाप-अँगीकार किया जाता था। जैसा कि कैल्विन ने कहा: 

“निश्चय ही, सभी सुव्यस्थित कलीसियाओं में, एक उपयोगी रीति के अनुसार, प्रत्येक प्रभु के दिन, सेवक अपने और लोगों के नाम से अँगीकार की एक प्रार्थना तैयार करता है, जिसमें वह सामूहिक रूप से अधर्म का अँगीकार करता है और प्रभु से क्षमा की याचना करता है।” (इंस्टिट्यूट्स 3.4.11) 

कैल्विन और अन्य लोगों के प्रभाव के द्वारा यह अभ्यास फैलता चलता गया। वेस्टमिंस्टर डायरेक्टरी ऑफ पब्लिक वर्शिप (Westminster Directory of Public Worship) में कहा गया कि आराधना का आरम्भ इस प्रकार होनी चाहिए कि लोग “प्रभु की अगम्य महानता और महिमा को स्वीकार करें (जिसकी उपस्थिति में वे उस समय विशेष रूप से उपस्थित होते हैं), और साथ ही अपनी हीनता और उसके निकट आने की अयोग्यता को पहचानें।”

इसके बाद उस निर्देशिका में विशेष रूप से बताया गया है कि किन-किन रीतियों से पापों को स्वीकार किया जाना चाहिए।  इस प्रकार यह परम्परा हमारे पास आत्मिक उत्तराधिकार  के रूप में पहुँची है।

पाप-अँगीकार का अभ्यास

यहाँ तीन व्यावहारिक बातें दी गई हैं, जिनके द्वारा हम अपने पापों का अँगीकार और भी विश्वासयोग्य रीति से कर सकते हैं।

1. अपने पाप की गम्भीरता को स्वीकार करें। 

प्राय: हम केवल पाप के कार्य के विषय में सोचते हैं। किन्तु बड़ा प्रश्न यह है कि हमने किसके विरुद्ध पाप किया है।

यदि आप मेरे बनाए चित्र पर हास्यजनक मूँछ बना दें, तो यह छोटी त्रुटि मानी जाएगी। क्यों? क्योंकि मैं बहुत खराब चित्रकार हूँ। परन्तु यदि आप लूव्र संग्रहालय में जाकर दा विंची की मोना लिसा पर वही मूँछ बना दें, तो आप बड़ी समस्या में पड़ जाएँगे। वही कार्य यहाँ गम्भीर परिणाम लाता है, क्योंकि आपने एक उत्कृष्ट कृति का अपमान किया है।

इसी प्रकार, सारी सृष्टि के स्वामी के विरुद्ध पाप करना अत्यन्त गम्भीर बात है। जब दाऊद ने बतशेबा के साथ व्यभिचार करने और उसके पति की हत्या करने के अपने पाप को स्वीकार किया—जो दोनों परमेश्वर के स्वरूप में रचे गए थे—तो उसने कहा,

“मैं ने केवल तेरे ही विरुद्ध पाप किया है” (भजन संहिता 51:4)।

2. अपने पापों के सामूहिक स्वरूप पर दुःखी हों। 

प्रभु की प्रार्थना में हम प्रार्थना करते हैं, “हमारे अपराधों को क्षमा कर” (मत्ती 6:12) ख्रीष्ट की आत्मा के द्वारा हम कलीसिया के अन्य विश्वासियों के साथ एक किए गए हैं। हमारा पाप सम्पूर्ण मण्डली को प्रभावित करता है, इसलिए हमें मिलकर अपने पापों का अँगीकार करना चाहिए।

 पौलुस ने कहा, “क्या तुम नहीं जानते कि तुम परमेश्वर का मन्दिर हो और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है?” (1 कुरिन्थियों 3:16)। इस पद में “तुम” बहुवचन है। ख्रीष्ट की देह में पाप स्वभाव से ही परमेश्वर के लिए अपमानजनक है, क्योंकि पवित्र परमेश्वर वहाँ वास करता है। कलीसिया परमेश्वर के कला-संग्रहालय के समान है, और जो “रंग” हमें सुशोभित करता है, वह ख्रीष्ट का लहू है (इब्रानियों 10:28–31)। जैसा कि थॉमस वॉटसन ने कहा: “दुष्टों के पाप परमेश्वर को क्रोधित करते हैं। परन्तु उसके अपने लोगों के पाप उसे शोकित करते हैं।”

3. अपने पापों के लिए सच्चा पश्चाताप व्यक्त करें। 

बाइबल में इस्राएल द्वारा अपने पापों को स्वीकार करने की अनेकों घटनाओं का वर्णन मिलता है, जैसे जब इस्राएली जंगल में कुढ़कुढ़ाए और इसके कारण परमेश्वर ने उनके मध्य विषैले सर्प भेजे (गिनती 21:7), या जब लोग बन्धुवाई ले लौटकर यरूशलेम की दिवारों का पुन: निर्माण करने लगे (नहेम्याह 9:1-3)। जब आप घटनाओं को पढ़ते हैं तो आप परमेश्वर के लोगों के सच्चे पश्चातापों को सुन सुकते हैं। 

भले ही, आपकी मण्डली इतनी गहरी स्थिति में न हो, फिर भी प्रभु के विरुद्ध किया गया प्रत्येक पाप हमें सच्चे दु:ख में ले जाना चाहिए।  भजनों में, जिन्हें हम प्राय: आराधना में पढ़ते या गाते हैं, पाप के प्रति गहरा दु:ख और विलाप की भाषा पाई जाती है (जैसे भजन 32, 38, 51, 130)। इस प्रकार की अँगीकार की भाषा कलीसिया का नियमित और अपेक्षित अभ्यास होना चाहिए। जैसा कि मार्टिन लूथर ने कहा, “इसलिए जब मैं तुम्हें अँगीकार करने की शिक्षा देता हूँ, तो मैं तुम्हें मसीही होने की शिक्षा देता हूँ।”

 यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

बैरी जे. यॉर्क
बैरी जे. यॉर्क
ड़ा. बैरी जे. यॉर्क रिफोर्मेशन प्रेस्बिटेरियन थियोलॉजिकल सेमिनरी, पिट्सबर्ग में अध्यक्ष और पास्टोरल थियोलॉजी के शिक्षक हैं। वह हिटिंग द मार्क्स पुस्तक के लेखक हैं।