12 मार्च 2026
नम्र हृदय से अपने पापों को स्वीकार करते हुए हम परमेश्वर की पवित्रता को मानते हैं और मसीह के लहू पर निर्भर रहते हैं। सच्चे पश्चाताप और विश्वास के साथ किया गया पाप-अँगीकार हमें शुद्ध करता है, नम्र बनाता है और हमें जीवित परमेश्वर की सेवा में नया जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित करता है।





