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26 फ़रवरी 2026रूत कौन थी?
अधिकाँश मसीही लोग रूत से परिचित हैं, जो पुराने नियम की उस पुस्तक की एक मुख्य पात्र है जिसका नाम उसी के नाम पर है। यह एक ऐसी कहानी है जो बड़े लोगों और बच्चों को अच्छा लगती है। परन्तु भले ही हम इस कहानी से परिचित हैं, फिर भी हमारे लिए यह स्मरण रखना अच्छा है कि रूत कौन थी, जिससे कि हमें विश्वासयाग्य जीवन जीने की प्रेरणा मिले और हमारी आँखें हमारे मुक्तिदाता पर टिकी रहें, जिसकी ओर रूत सेंकेत करती है।
एक विदेशी
पहली बात जो हम रूत के विषय सीखते हैं यह है कि वह एक मोआबिन है, जिसका विवाह एलीमेलेक और नाओमी के एक पुत्रों से हुआ था, जो यहूदा के बैतलहम से थे (रूत 1:1-4)। यह बात महत्पूर्ण है, विशेषकर इसलिए क्योंकि मोआबियों को “यहोवा की मण्डली में प्रवेश करने” की अनुमति नहीं थी क्योंकि जब परमेश्वर के लोग मिस्र से निकले थे, तो मोआबियों ने उनकी आवश्यकताओं को पूरी नहीं की और क्योंकि उन्होंने परमेश्वर के लोगों को शाप देने के लिए बिलाम को रुपए दिए रखा था (व्यवस्थाविवरण 23:3–5)। इस्त्राएल को “उनकी शान्ति और समृद्धि की कामना” करने के लिए मना किया गया था (व्यवस्थाविवरण 23:6)।
एक विधवा
दूसरा, रूत के पति की मृत्यु मोआब में हो गई, जिससे वह बिना बच्चों की विधवा हो गई (रूत 1:5)। उसने न केवल अपने पति को खोने का दुख झेला, परन्तु उसके ससुर और देवर की भी मृत्यु हो गई। दुख के पश्चात्, वह अपना देश छोड़कर अपनी सास के साथ बैतलहम चली गई, जहाँ अकाल समाप्त हो गया था और पुनः भोजन उपलब्ध था (रूत 1:6–7)।
एक निष्ठावान बहू
तीसरा, जब उसकी सास ने बैतलहम पहुँचने से पहले उससे आग्रह किया के वह अपने मोआब में अपने घर को लौट जाएँ, तो रूत ने मना कर दिया। अन्त में, उसकी जेठानी लौट आई, परन्तु रूत “[नाओमी] से लिपटी रही” (रूत 1:14)। यह एक महंगा निर्णय था, विशेषकर इसलिए क्योंकि नाओमी के पास रूत को पति के रूप में देने के लिए कोई और पुत्र नहीं था। यदि रूत उसके साथ रहती, तो बहुत ही सम्भव था कि वह बिना बच्चों के विधवा रहती। फिर भी, उसने प्रतिउत्तर दिया, “मुझ से विनती न कर कि मुझे छोड़कर लौट जा, क्योंकि जिधर तू जाए उधर मैं भी जाऊँगी, और जहाँ तू टिके वहाँ मैं भी टिकूँगी” (रूत 1:16)।
एक विश्वास की स्त्री
बैतलहम जाते समय, रूत ने विश्वास का अंगीकार किया: “तेरे लोग मेरे लोग होंगे और तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा” (रूत 1:16)। आने वाले दिनों में उसके भक्तिपूर्ण कार्यों ने से इस अंगीकार की पुष्टि की। विश्वास से उसने नाओमी और स्वयं के लिए प्रावधान करने के लिए पहल किया: “मुझे खेत में जाने की आज्ञा दी कि जो मुझ पर अनुग्रह की दृष्टि करे उसके पीछे सीला बिनूँ” (रूत 2:2)। विश्वास से उसने खेतों में कड़ा परिश्रम किया (रूत 2:7)। बोअज़ ने उसकी सास के लिए किए गए सभी कार्यों के लिए उसकी प्रशंसा की, और उसे इन शब्दों से आशीर्वाद दिया: “यहोवा तेरे कार्य का फल दे और इस्त्राएल का परमेश्वर यहोवा जिसके पँखों तले तू शरण लेने आई है तुझे पुरा बदला दे!” (रूत 2:12)। विश्वास से रूत ने नाओमी की योजना मान ली कि वह बोअज़ से उसे छुड़ाने के लिए कहे और उसने साहस करके खलिहान में जाकर बोअज़ से उससे विवाह करने के लिए कहा (रूत 3:1–13)। विश्वास से ही उसने बुद्धिमानी से तब तक प्रतीक्षा की जब तक बात का निवारण सही नहीं हो गया (रूत 3:18)।
एक भक्तिन पत्नि और माता
यद्यपि रूत ने अपने जीवन में बहुत दुख झेले थे, प्रभु ने उसे उसी पुरूष से पुरस्कृत किया जिसने प्रार्थना की थी कि यहोवा उसके अच्छे कार्यों और विश्वासयोग्यता का बदला उसे दे (रूत 2:12)। बोअज़ ने उचित रीति से बातों का निवारण करने के बाद, रूत को अपनी पत्नी बना लिया (रूत 4:10)। बैतलहम के प्राचीनों और लोगों ने उसे आशीर्वाद दिया:
तेरे घर में आने वाली इस स्त्री को यहोवा राहेल और लिआ के समान करे जिन्होंने इस्त्राएल के घराने को बनाया… फिर जो सन्तान इस युवती के द्वारा यहोवा तुझे दे… उस से तेरा घराना पेरेस के समान हो जाए। (रूत 4:11–12)
प्रभु ने बोअज़ और रूत को एक पुत्र की आशीष दी (रूत 4:13)। यह महत्वपूर्ण है कि कि नगर की स्त्रियों उसे “छुड़ानेवाला” और “जी में जी ले आने वाला” कहती थीं (रूत 4:14–15)। उन्होंने प्रार्थना की कि उसका नाम “इस्त्राएल में बड़ा प्रसिद्ध हो” (रूत 4:14)। उन्होंने उसका नाम ओबेद भी रखा, जिसका अर्थ है “सेवक” (रूत 4:17)।
यीशु ख्रीष्ट की वंशावली
रूत का बेटा, ओबेद, “यिशै का पिता और दाऊद का दादा” हुआ (रूत 4:17)। रूत की पुस्तक दाऊद की वंशावली के साथ समाप्त होती है जिससे कि यह हमें यीशु ख्रीष्ट की वंशावली की ओर इंगित करे:
दाऊद की सन्तान यीशु ख्रीष्ट की वंशावली की पुस्तक… सलमोन और राहाब से बोअज़ उत्पन्न हुआ, बोअज़ और रूत से ओबेद उत्पन्न हुआ और ओबेद से यिशै, और यिशै से दाऊद राजा उत्पन्न हुआ। (मत्ती 1:1, 5–6)
यीशु बोअज़ और ओबेद से अधिक बड़ा छुड़ानेवाला और सेवक है। वह दाऊद से भी महान राजा है। सम्पूर्ण संसार में उसका नाम बड़ा प्रसिद्ध हैं:
यहोवा ने मुझसे कहा, “तू मेरा पुत्र है,
आज ही मैंने तुझे उत्पन्न किया है।
मुझ से मांग तो निश्चय ही मैं जाति जाति को तेरे उत्तराधिकार में,
और पृथ्वी के छोर तेरी निज भूमि होने के लिए दे दूँगा।” (भजन 2:7–8)
जब हम रूत के अंगीकार और उसके चरित्र पर विचार करते हैं, तो आइए हम विश्वासयोग्यता की ओर बढ़ें, जैसे जैसे हम अपनी आँखें यीशु पर बनाए रखते हैं, जो परमेश्वर के लोगों का छुड़ानेवाला है, वह जो “सेवा कराने नहीं, वरन् सेवा करने और बहुतों के छुटकारे के मूल्य मे अपना प्राण देने आया” (मत्ती 20:28)।
यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

