लूथर से बिजली के आघात तक

 
 
 

 

 

आज संसार भर के प्रोटेस्टेन्ट रोमन कैथोलिक चर्च से अपनी भिन्नता का गर्व से उल्लेख करते हैं। परन्तु वास्तव में कितने लोग इस विभाजन के इतिहास को जानते हैं? यह पुरानी कहावत कि “जब तक आप यह न जानें कि आप कहाँ से आए हैं, तब तक आप यह नहीं जान सकते कि आप कहाँ जा रहे हैं,” भले ही हर परिस्थिति में पूरी तरह लागू न हो फिर भी आज प्रोटेस्टेन्ट कलीसियाओं में बाइबिलीय सत्य की गिरावट इस कहावत के महत्व को स्पष्ट करती है।

सोलहवीं शताब्दी का धर्मसुधार उस समय हुआ जब रोमन कैथोलिक चर्च में परमेश्वर के वचन के प्रति समझ और व्यवहार भ्रष्ट हो चुके थे। इस प्रथम व्याख्यान में डॉ. स्प्रॉल उस व्यक्ति का परिचय कराते हैं जिसने इस त्रुटिपूर्ण व्यवस्था को चुनौती दी और परिवर्तन की ऐसी ज्योति प्रज्वलित की जो आज भी जल रही है: मार्टिन लूथर।