रोम की आपत्तियों का उत्तर
धर्मनिरपेक्ष संस्कृति और यहाँ तक कि स्वयं को सुसमाचारवादी कहने वाले कुछ लोग भी परमेश्वर का वर्णन ऐसे परमेश्वर के रूप में करते हैं, जो सबको क्षमा करने वाला है और जीवन के हर क्षेत्र से आने वाले लोगों को अपनी सदा स्वीकार करने वाली बाहों में लेने के लिए तत्पर रहता है। इस प्रकार यह दृष्टिकोण मनुष्य को अपनी इच्छानुसार आचरण करने की स्वतन्त्रता का समर्थन करता है क्योंकि यदि परमेश्वर प्रेम का परमेश्वर है, तो वह कभी किसी का न्याय नहीं करेगा।
परन्तु यह चित्रण सत्य से बहुत दूर है। इसके विपरीत, स्वर्गीय सेनाओं का प्रभु अपनी सृष्टि से कठोर नैतिक अनुशासन की अपेक्षा करता है। यद्यपि अपनी सन्तानों के धर्मीकरण में केवल परमेश्वर ही कार्य करता है फिर भी जब वे अनुग्रह की दशा में प्रवेश करते हैं, तब वह उनसे अपेक्षा करता है कि वे उसकी आज्ञाओं और विधियों का पालन करें।
लूथर और धर्म-सुधार आन्दोलन पर आधारित इस अन्तिम पाठ में डॉ. स्प्रॉल धर्मीकरण के द्वारा अनुग्रह की दशा में प्रवेश करने के परिणामों पर गहराई से विचार करते हैं।