मठ और रोम का संकट
“पवित्र” शब्द का प्रयोग आधुनिक संस्कृति में बहुत सामान्य हो गया है। कुछ लोग इस शब्द का प्रयोग प्राचीन या पवित्र विचारों तथा बीती सभ्यताओं की वस्तुओं के लिए करते हैं, जबकि अन्य लोग इसे भय या आश्चर्य व्यक्त करने के लिए किसी संज्ञा के साथ जोड़ देते हैं। दुःखद रूप से, इस प्रकार का सामान्य प्रयोग इस शब्द के वास्तविक अर्थ और उचित प्रयोग को कम कर देता है।
वास्तव में, “पवित्र” शब्द केवल सच्चे और जीवित परमेश्वर के लिए उपयुक्त है, और विस्तार में उन लोगों तथा वस्तुओं के लिए भी, जिन्हें वह पवित्र ठहराता है। मार्टिन लूथर ने इस सिद्धान्त को भली-भाँति समझा। इस पाठ में, डॉ. स्प्रॉल इस बात को समझाते हैं कि किस प्रकार लूथर रोमन चर्च की परम्पराओं और प्रथाओं के माध्यम से अपनी दोष-भावना को परमेश्वर की पवित्रता के साथ मेल कराने में असमर्थ रहे।