क्षमादानपत्र विवाद
कलीसिया के भीतर ईश्वरवैज्ञानिक वाद-विवाद प्रायः होते रहते हैं। कई बार ख्रीष्ट में भाइयों और बहनों के बीच के मतभेद विभाजन और यहाँ तक कि वैरभाव का कारण बन जाते हैं जो सामान्यतः अनुचित आचरण और नम्र आत्मा की कमी के कारण बढ़ते हैं।
आज के पाठ में हम उस निर्णायक क्षण को देखते हैं जिससे प्रोटेस्टेन्ट धर्म-सुधार आन्दोलन का आरम्भ हुआ। फिर भी हम देखते हैं कि मार्टिन लूथर योहानेस टेट्ज़ेल की व्यापारिक विधियों के प्रति अपनी आपत्ति को विनम्रता के साथ व्यक्त करते हैं।
प्रचलित धारणा के विपरीत क्षमादानपत्रों की बिक्री के विषय में सुनते ही लूथर ने रोमन कलीसिया के विरुद्ध उग्रतापूर्वक आक्रमण नहीं किया। इसके विपरीत वे इस विषय को उचित मंच पर मर्यादा के साथ उठाना चाहते थे। यद्यपि प्रभु की लूथर के लिए अन्य योजनाएँ थीं फिर भी हम लूथर की शालीनता और उनके चारों ओर घटित ऐतिहासिक घटनाओं से एक मूल्यवान शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं।