धन्य हैं वे जो धार्मिकता के कारण सताए जाते हैं | लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़
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धन्य हैं वे जो धार्मिकता के कारण सताए जाते हैं

सम्पादक की टिप्पणी: यह टेबलटॉक पत्रिका श्रंखला का नौववां अध्याय है: धन्यवाणियाँ

धन्य वाणियां ईश्वरोन्मुख दृष्टिकोण के साथ प्रारम्भ होते हैं—आत्मिक दरिद्रता, शोकित होना, नम्रता, और भूख—और मानवाभिमुख विषयों की ओर बढ़ती हैं—दया, शुद्धता,और मेल कराना—मत्ती 5:10 में सताव और निन्दा की अनिवार्य वास्तविकता के साथ समाप्त होने से पहले (मत्ती10:22; यूहन्ना 15:20 भी देखें)। परन्तु यह अप्रिय अनिवार्यता अपने साथ ईश्वरीय जीवन में हिस्से की प्रतिज्ञा ले कर आती है, क्योंकि वास्तविक “धन्यता” यही है: “परमधन्य” परमेश्वर के साथ सहभागिता (1 तीमुथियुस 1:11; तीतुस 2:15)।

यहाँ वर्णित दु:ख सामन्य रूप से पाप के परिणाम के कान्टे और ऊंटकटारे नहीं है (रोमियों 8:18-25); न ही यह सताव है पाखण्ड, न्यायवाद, या सामान्य हानिप्रदता के कारण। यह निश्चित रूप से बढ़ी हुई सन्वेदनशीलता का वह कल्पित सताव नहीं है जिसका शिष्यता के मोल से अधिक पहचान की राजनीति से लेना देना है। हमें उस रीति से सताव को तुच्छ समझने का दुस्साहस नहीं करना चाहिए जब भाई और बहनें अत्याचारी प्रशासनों के द्वारा बन्दी बना दिए जाते हैं और उग्रवादियों के हाथों मारे जाते हैं। यहाँ जो धन्य दु:ख उठाना है वह ऐसा दु:ख उठाना है जो धार्मिकता के कारण है—अपने स्वामी की इच्छा को पूरा करने के लिए सताया जाना। इस धन्य वाणी की प्रतिज्ञा को ग्रहण करने के लिए, सताव उसकी धर्मी इच्छा पूरी करने के लिए होना चाहिए (1 पतरस 3:8-17)। यह तभी होगा कि “स्वर्ग का राज्य” हमारा है। मत्ती का वाक्यांश, जो “स्वर्ग के राज्य” का पर्यायवाची है, उसके द्वारा वह हमें स्मरण दिलाने का कि परमेश्वर का धर्मी शासन (स्वर्ग में) मनुष्य के विचार जैसा नहीं है (यशायाह 55:9)। जो लोग धार्मिकता के लिए सताए जाते हैं, वे परमेश्वर के मार्ग पर चल रहे हैं एक ऐसे संसार के बीच में जो उनका सम्मान नहीं करता और यहाँ तक कि उनको अस्वीकार भी कर देगा। “पीछा करना” मूल अर्थ होने के कारण, सताया जाना हिंसक और उग्र रूप होने के साथ-साथ छोटे रूप जैसे ठट्ठा, उपेक्षा, अधिकारहीनता और बहिष्करण रूप भी ले लेगा।

ख्रीष्ट की आशीष यहाँ पर हमारी कई प्रकार से सहायता करती है। प्रथम, यह हमारा है। जब हम धार्मिकता के लिए सताए जाते हैं और आश्चर्य करते हैं कि इसका क्या लाभ है, हम दृढ़ रह सकते हैं कि स्वर्ग का राज्य हमारा है। दूसरा, यह आनन्द का स्रोत है क्योंकि इसमें हम अपने प्रभु के साथ पहचाने जाते हैं (मत्ती 10:25; प्रेरितों के काम 5:41)। तीसरा, यह एक दिशासूचक है जो हमें यीशु के मार्ग के साथ मार्गदर्शन करता है। क्रूस का मार्ग ख्रीष्ट के विद्यालय में वैकल्पिक नहीं है (मत्ती 10:24-25)। जीवन के लिए और कोई मार्ग नहीं है सिवाय क्रूस के मार्ग के। चौथा, यह हमें आमन्त्रित करता है स्वयं को जांचने के लिए जब हम सताव का अनुभव नहीं कर रहे होते।  सभी जो ईश्वरभक्ति का जीवन जीते हैं सताए जाएंगे (2 तीमुथियुस 2:12)। हमें स्वयं से सावधान रहना है जब संसार के पास हमारे बारे में कहने के लिए केवल अच्छाई हो (लूका 6:26)। सताव की अनुपस्थिति इसलिए हो सकती है क्योंकि हम संसार के साथ बहुत अच्छे से उपयुक्त बैठ रहे हैं। जैसा कि डीट्रिक बॉनहोफर ने इसे व्यक्त किया, इसका अर्थ यह हो सकता है कि हमने नागरिकता के लिए शिष्यता का आदान-प्रदान किया है।

अन्ततः, सताव ख्रीष्ट के साथ हमारे मिलन की साक्षी देता है। फिलिप्पियों 3:8-11 में, पौलुस इसे बताता है कि कैसे सताने वाला सताया जाने वाला बना और हालांकि उसने वह सब खो दिया जो उसे एक बार प्रिय था, उसने ख्रीष्ट और उस धार्मिकता को प्राप्त किया जो विश्वास द्वारा आती है (पद 9)। शेष सब वस्तुओं को हानि में गिनने का उद्देश्य या लक्ष्य ख्रीष्ट के दु:ख में संगति के साथ साथ ख्रीष्ट को और ख्रीष्ट के पुनरुत्थान की सामर्थ को जानना है, क्योंकि उसकी मृत्यु में ख्रीष्ट के जैसे बनना आवश्यक है यदि हम उसके जीवन में हिस्सेदारी चाहते हैं। ख्रीष्ट के साथ मिलन का अर्थ है उन सभी वस्तुओं में हिस्सेदारी होना जो ख्रीष्ट की हैं, जिनमें अस्वीकृति, निन्दा, और सताव भी सम्मिलित हैं, जो उसके साथ हुआ था। क्योंकि यदि हमारी उसमें हिस्सेदारी है, स्वर्ग का राज्य वास्तविकता में हमारा है। और इस ज्ञान के साथ, हम परीक्षाओं में आनन्द के साथ बने रहने के सक्षम रहेंगे और हमारे सताने वालो को आशीष वचन के साथ उत्तर देंगे (याकूब 5:1; 1 पतरस 3:9)।  

यह लेख मूलतः टेबलटॉक पत्रिका में प्रकाशित किया गया।
मयकल जे. ग्लोडो
मयकल जे. ग्लोडो
रेव. मयकल जे. ग्लोडो ओरलैण्डो, फ्लॉरिडा में रिफॉर्म्ड थियोलॉजिकल सेमिनेरी में बाइबलीय अध्ययन के सहायक प्राध्यापक हैं। उन्होंने छः वर्षों के लिए इवैन्जेलिकल प्रेस्बिटेरियन चर्च में प्रशासनीय अधिकारी के रूप में सेवा की।