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23 अक्टूबर 2024प्रभु की मेज़ पर आना
क्या आपने कभी इस विषय पर सोचा है कि प्रभु की मेज़ पर आने की आज्ञा मृत्यु की चेतावनी के साथ आती है? फिर भी हम 1 कुरिन्थियों 11:23-25 में प्रभु भोज के विषय में पौलुस के निर्देशों में इसी बात को बहुत स्पष्ट रूप से पढ़ते हैं। सबसे पहले, पौलुस विधि के संस्थापन का शब्द देता है:
जो बात मैंने तुम्हें सौंपी है वह मुझे प्रभु से मिली थी, कि प्रभु यीशु ने जिस रात वह पकड़वाया गया, रोटी ली और उसने धन्यवाद देकर रोटी तोड़ी और कहा “यह मेरी देह है जो तुम्हारे लिए है मेरे स्मरण के लिए यही किया करो।” इसी प्रकार भोजन के पश्चात् उसने यह कहते हुए कटोरा भी लिया “यह मेरे लहू में नई वाचा का कटोरा है। जब जब तुम इसमें से पीओ तब तब मेरे स्मरण के लिए यही किया करो।”
ध्यान दें कि यीशु शिष्यों को आज्ञा देता है कि उन्हें क्या करना चाहिए और कैसे करना चाहिए: “मेरे स्मरण में यही किया करो”। मसीहीयों के लिए, प्रभु भोज वैकल्पिक नहीं है। उन्हें यह करने के लिए बुलाया गया है। इसलिए, जब हमारी कलीसिया प्रभु भोज को मनाती है, तो हमें वहाँ उपस्थित होने को प्राथमिकता बनाना चाहिए। सभी आज्ञाओं के समान ही, “यही किया करो” का निर्देश हमारी भलाई के लिए है। प्रभु भोज को हमें यह स्मरण दिलाना चाहिए कि यीशु ने हमारे लिए क्या किया है, जब उसकी देह बलिदान की गयी और हमारे पापों के लिए उसका लहू बहाया गया। इसे स्मरण रखने से हमारा विश्वास दृढ़ होगा। और प्रभु भोज को मनाने के लिए एक कलीसिया के रूप में एक साथ आना कलीसिया की एकता को दृढ़ करना चाहिए और हमारे शिष्यता की एक सामूहिक साक्षी होनी चाहिए, जब संसार एक दूसरे के लिए हमारे प्रेम को देखता है।
और फिर भी, भले ही प्रभु भोज उन लोगों के लाभ के लिए दिया गया था जो वास्तव में विश्वास करते हैं, यह उन लोगों के लिए मृत्यु की बहुत गम्भीर चेतावनी के साथ आता है जो इसे चिन्ताहीन रीति से या बिना सच्चे पश्चाताप के ग्रहण करते हैं। पौलुस 1 कुरिन्थियों 11:27–30 में लिखता है:
इसलिए जो कोई अनुचित रीति से यह रोटी खाता और प्रभु के इस कटोरे में से पीता है, वह प्रभु की देह और लहू का दोषी ठहरेगा। अतः मनुष्य अपने आप को परखे तब इस रोटी को खाए और इस कटोरे में से पीए। क्योंकि जो खाता और पीता है, यदि उचित रीति से प्रभु की देह को पहिचाने बिना खाता पीता है तो अपने ऊपर दण्ड लाने के लिए ही ऐसा करता है। इसी कारण तुम में से बहुत से निर्बल और रोगी हैं, और बहुत से सो भी गए।
हम जिस प्रकार से प्रभु की मेज़ पर आते हैं, उसके गम्भीर परिणाम हो सकते हैं। कुरिन्थियों ने इसे उपेक्षित किया था। वे स्वार्थी व्यवहार के साथ आए थे, जो किसी भी प्रकार से उस अर्थ को नहीं दर्शाता था जो प्रभु भोज का होना चाहिए।
भाइयो और बहनो, आइए हम मृत्यु की चेतावनी को गम्भीरता से लें और हमारे पापों के लिए अर्पित प्रभु की देह और लहू के प्रति कृतज्ञतापूर्वक पहचानते हुए मेज़ पर आएँ, और आइए हम ऐसे भाई–बहनों के रूप में आएँ जो जानते हैं कि “हम जो बहुत हैं, एक देह हैं” (1 कुरिन्थियों 10:17), यह दिखाते हुए कि हम एक-दूसरे के लिए जो प्रेम रखते हैं, उसके द्वारा हम ख्रीष्ट के शिष्य हैं।
यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

