
परमेश्वर के वचन को सुनने वालों के छह प्रकार
6 अक्टूबर 2026बच्चों के लिए वाचाई ईश्वरविज्ञान: एक आरम्भिक मार्गदर्शिका
जब हम अपने बच्चों को सण्डे स्कूल या वीबीएस (VBS) में भेजते हैं, तो हमारी आशा क्या होती है कि वे वहाँ से क्या सीखें? हम उनकी सहायता कैसे कर सकते हैं कि वे बाइबल में अपरिचित प्रतीत होने वाले पात्रों को उसकी समग्र कहानी से जोड़ सकें? आखिर वे कौन-से मूलभूत सत्य हैं जिन्होंने मसीहियों के जीवन को पूरी तरह बदल दिया है?
लिगोनियर मिनिस्ट्रीज़ का नया बाल-पाठ्यक्रम, ग्रोइंग इन गॉड्स वर्ड (Growing in God’s Word), एक वर्ष तक चलने वाले अध्ययन में बाइबल की मूल बातों को खोलकर समझाता है। इसकी विशेषता यह है कि यह पवित्रशास्त्र की वाचा-आधारित रूपरेखा पर आधारित है, जो हमें परमेश्वर की उद्धार-योजना और मानवजाति के साथ उसके व्यवहार का समग्र चित्र दिखाती है। हमें अपने बच्चों के बड़े होने तक बाइबल के आधारभूत सत्यों को बाँटने या उन्हें ईश्वरविज्ञान से परिचित कराने की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है। यह संसाधन विकासात्मक रूप से उपयुक्त गतिविधियों और प्रश्नों के द्वारा वाचा के ईश्वरविज्ञान के मुख्य तत्वों को बच्चों के लिए सुगम बनाने का प्रयास करता है।
कलीसियाओं, माता-पिताओं और शिक्षकों को गम्भीरता के साथ यीशु की इस आज्ञा का पालन करने के लिए बुलाया गया है: “बालकों को मेरे पास आने दो और उन्हें मना न करो, क्योंकि स्वर्ग का राज्य ऐसों ही का है” (मत्ती 19:14)। जब हम अपने बच्चों की प्रारम्भिक शिक्षा के समय बाइबल को निरन्तर और विश्वासयोग्य रीति से उनके लिए सुगम बनाने का प्रयास करते हैं, तो यहाँ कुछ ऐसे विषय हैं जिनसे हम आरम्भ कर सकते हैं।
1. सृष्टिकर्ता
जब हम बच्चों को वाचा के ईश्वरविज्ञान से परिचित कराते हैं, तो हम सरलता से आरम्भ ही से प्रारम्भ कर सकते हैं। परमेश्वर सृष्टिकर्ता है। उसने अपनी वाणी के द्वारा शून्य में से सारी सृष्टि की रचना की। वह अपनी सृष्टि के द्वारा अपने आपको प्रकट करता है, परन्तु केवल उसके वचन के द्वारा ही हम जीवन, मृत्यु, पाप और ख्रीष्ट के व्यक्ति के महत्व को समझ सकते हैं। मार्टिन लूथर ने कहा था, “यदि मैं परमेश्वर के कार्यों और उसकी सामर्थ्य को नहीं जानता, तो मैं स्वयं परमेश्वर को नहीं जानता; और यदि मैं परमेश्वर को नहीं जानता, तो मैं उसकी आराधना, स्तुति, धन्यवाद या सेवा नहीं कर सकता।”¹
परमेश्वर ने सब वस्तुओं की रचना की और वाचा के द्वारा अपनी सम्पूर्ण सृष्टि की सार्वभौमिक रीति से देखभाल करता है (रोमियों 5; 1 कुरिन्थियों 15 देखें)। वाचा ऐसी प्रतिज्ञा है जिसमें आशीषें और उत्तरदायित्व सम्मिलित होते हैं।² परमेश्वर की वाचाएँ मनमानी या केवल लेन-देन पर आधारित नहीं हैं; वरन् वे उसकी पवित्रता और उसकी सृष्टि में उसके कार्यों के द्वारा उसके आत्म-प्रकाशन को प्रकट करती हैं। वह अपने त्रिएक स्वरूप के अनुरूप कार्य करता है, न कि अस्थिर भावनाओं, सुविधा या व्यावहारिकता के अनुसार। बाइबल तीन आधारभूत वाचाओं को प्रकट करती है—उद्धार की वाचा, कार्य की वाचा और अनुग्रह की वाचा।
2. ख्रीष्ट
सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र ख्रीष्ट की ओर संकेत करता है। उत्पत्ति से लेकर प्रकाशितवाक्य तक, बाइबल विविध घटनाओं और कथाओं से परिपूर्ण है। ये सभी मिलकर अब तक सुनाई गई सबसे महान् कथा का ताना-बाना बुनती हैं—परमेश्वर का अपनी सृष्टि के प्रति अनुग्रह, जो अन्ततः ख्रीष्ट के कार्य में पूर्ण रूप से प्रकट हुआ। वाचा का ईश्वरविज्ञान पुराने और नए नियम को एक सूत्र में बाँधता है, जिससे परमेश्वर की पवित्रता उसकी व्यवस्था और ख्रीष्ट के एक बार सर्वदा के लिए सम्पन्न किए गए कार्य, दोनों में प्रकट होती है (गलातियों 3:24–29)। ख्रीष्ट व्यवस्था को समाप्त करने नहीं, वरन् उसे पूरा करने आया। उसने अपने सिद्ध जीवन, बलिदानी मृत्यु और मृतकों में से पुनरुत्थान के द्वारा कार्य की वाचा को पूरा किया और अपने पीछे चलने वाले सब लोगों को अनुग्रह की वाचा में प्रवेश कराया (मत्ती 5:17)।
यीशु ख्रीष्ट पूर्णतः मनुष्य और पूर्णतः परमेश्वर है। वही सिद्ध परमेश्वर और पतित मानवजाति के बीच एकमात्र मध्यस्थ है। पिता द्वारा अपने एकलौते पुत्र को भेजने, पुत्र के प्रायश्चित्तकारी जीवन, मृत्यु और पुनरुत्थान, तथा पवित्र आत्मा के नया जीवन देने वाले कार्य की सामर्थ्य के द्वारा ही हमें अनुग्रह की वाचा के सभी लाभ प्राप्त होते हैं। विश्वास के द्वारा ख्रीष्ट से एक होकर मसीही अब परमेश्वर को “पिता” कह सकते हैं और इस सम्बन्ध रखने वाले परमेश्वर में मिलने वाली शान्ति, आश्वासन और पूर्ण विश्राम का अनुभव कर सकते हैं।
3. कलीसिया
अनुग्रह की वाचा प्रत्येक जाति, राष्ट्र और भाषा के विश्वासियों के समुदाय के लिए है। इसमें न तो कोई अकेला चलने वाला है और न ही कोई पक्षपात का पात्र। कलीसिया को समझने के लिए वाचा के ईश्वरविज्ञान और उस ऐतिहासिक विश्वास के महत्व को समझना आवश्यक है जिसमें सामूहिक आराधना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। सुसमाचार वाचा के लोगों को एक ही ध्वज के अधीन एक करता है: यीशु ही एकमात्र मार्ग है (यूहन्ना 14:6)। पहले आदम में सम्पूर्ण मानवजाति पाप में मर गई, और अन्तिम आदम में हम विश्वास के द्वारा धर्मी ठहराए जाते हैं (1 कुरिन्थियों 15:45)। यही विश्वास हमें अन्धकार के अधिकार से निकालकर ज्योति में ले आता है, जहाँ ख्रीष्ट के नाम को पुकारने वाला कोई भी व्यक्ति फिर कभी न तो उससे अलग होगा और न ही अकेला रहेगा।
यद्यपि यह एक वर्तमान वास्तविकता है, फिर भी हम ख्रीष्ट के लौटने या हमें अपने पास बुला लेने तक इस पतित संसार में रहते हैं। रविवार की आराधना केवल सप्ताहान्त की हमारी पसन्दीदा गतिविधियों में से एक नहीं है; वरन् यह उस महान उद्देश्य का चित्र है जिसके लिए हमारी सृष्टि की गई है—अपने सृष्टिकर्ता परमेश्वर के ज्ञान में बढ़ना और उस त्रिएक विश्राम में सहभागी होना, जिसमें वह हमें ख्रीष्ट में आमन्त्रित करता है।
4. बुलाहट
वाचा की सन्तान—सुसमाचार की घोषणा सुनने वाले सभी लोगों के समान—एक अद्वितीय विशेषाधिकार और आशीष प्राप्त करते हैं: प्रभु के मार्ग पर बने रहने के लिए बार-बार दी जाने वाली बुलाहट। जब हम अपने बच्चों को वाचा का ईश्वरविज्ञान सिखाते हैं, तो हम उन्हें अनन्त सत्य पर आधारित जीवन का एक ढाँचा प्रदान करते हैं। परन्तु यदि हमारा शिक्षण केवल स्मरण करने या व्यवहार में परिवर्तन लाने तक ही सीमित रह जाता है, तो हम उन्हें दाखलता, अर्थात् प्रभु यीशु ख्रीष्ट में बने रहने के लिए नहीं बुलाएँगे। हमारी इच्छा यह होनी चाहिए कि हमारे बच्चे विश्वास के साथ यीशु के प्रतिउत्तर दें और अनुग्रह के साधनों के द्वारा उसी दाखलता में बने रहते हुए बढ़ते जाएँ। स्थानीय कलीसिया के सन्दर्भ में दी जाने वाली यही बुलाहट बाइबल की उन विविध कहानियों का सार है—विश्वास की वह बुलाहट जो हमें परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर विश्वास करने के लिए बुलाती है।
इस सन्देश में एक ऐसी तात्कालिकता है जिसे हम अपने बच्चों के सामने रखते हुए भी धैर्यपूर्वक उन्हें शिक्षा और चेतावनी दे सकते हैं कि “जब तक यहोवा मिल सकता है, तब तक उसे खोजो” (यशायाह 55:6)। जब हम अपने बच्चों को वाचा का ईश्वरविज्ञान सिखाते हैं, तो हम उनका ध्यान उस अन्तिम गन्तव्य की ओर ले जाते हैं जहाँ वे पूर्णतः जाने जाएँगे, सुरक्षित रहेंगे, और इस जीवन तथा आने वाले जीवन में शान्त जल के पास उसकी अगुवाई का आनन्द लेंगे।
यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

