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–एमिली वैन डिक्सहॉर्न
हमारे बुद्धिमान पास्टर ने मुझे सम्मत्ति दी, “उनसे प्रेम करो।” अनुशासन, समय-सारणी और विकासात्मक चरणों के विषय में मेरी सब पढ़ाई के मध्य में, उसने इस नई माँ को सबसे महत्वपूर्ण बात बताई: प्रेम (1 कुरिन्थियों 13:1)। दशकों के आगे बढ़ने के साथ, मैं उनकी सम्मत्ति की बुद्धिमत्ता की सराहना करती आई हूँ। प्रेम को सबसे आगे रखते हुए, मैं माताओं को पवित्रता पर बारह बाइबलीय सिद्धान्त देना चाहती हूँ।
1. हमारी पवित्रता परमेश्वर की प्राथमिकता है।
जैसा कि स्कॉटलैण्ड के पास्टर रॉबर्ट मुर्रे मैकशेन (1813-1843) ने कहा था, “मेरे लोगों के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता मेरी व्यक्तिगत पवित्रता है।” माताओं के लिए भी यही सच है। हम विनम्रतापूर्वक इस रीति से जीवन जी सकते हैं कि हम अपने बच्चों से कह सकें, “मेरे पीछे चलो जैसे मैं ख्रीष्ट का अनुसरण करती हूँ” (1 कुरिन्थियों 11:1)। इस प्रयास के द्वारा, हमारे बच्चे हमारी अपेक्षा से अधिक सीखेंगे।
2. हमारी पवित्रता केवल ख्रीष्ट में है।
जब हम पाप करते हैं, जैसा कि हम सभी करते हैं (रोमियों 3:23, 1 यूहन्ना 1:8), तो हम पश्चात्ताप का भी उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं। जब आप अपने बच्चों के विरुद्ध पाप करते हैं, तो अपने बच्चों से क्षमा माँगें। हमारे आदि माता-पिता के जैसे न बनें और अपने पाप को ऐसे न छिपाएँ जैसे कि वह है ही नहीं (उत्पत्ति 3:7-8)। अपने पापों से पर्ताव करने की रीति के द्वारा अपने बच्चों को सिखाएँ कि वे अपने पापों से कैसे बर्ताव करें। जब आप अपने पापों को अंगीकार करते हैं, आपके बच्चे सीखेंगे कि परमेश्वर न केवल हमारी पवित्रता की चिन्ता करता है, वरन् वह सुसमाचार में ख्रीष्ट पर भरोसे के माध्यम से पवित्रता के मार्ग का भी प्रावधान करता है (1 यूहन्ना 1:9)।
3. अपने बच्चों की सेवा करना एक पवित्र आह्वान है।
हम यह सोचने के लिए प्रलोभित किए जा सकते हैं कि लंगोट बदलने, बच्चों के लिए सामान खरीदने या अपने बच्चों के साथ कोई खेल खेलने से अधिक महत्वपूर्ण कुछ और है। परिवरिश के कई कार्य उबाऊ होते हैं, परन्तु जब विश्वास से किए जाते हैं, तो वे गौरवमय होते हैं! जब यीशु ने अपने शिष्यों के पैर धोए, तो उसने विनम्र सेवा को सम्मान दिया। इससे बढ़कर, उसने कहा कि जो कुछ तुमने मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी के भी साथ किया, वह मेरे साथ किया (मत्ती 25:40)। आइए हम विनम्रतापूर्वक अपने बच्चों को उसके नाम में एक गिलास ठण्डा पानी पिलाएँ (मत्ती 10:42), यह जानते हुए कि यह प्रेमपूर्ण देखभाल उसके बच्चों के लिए परमेश्वर की देखभाल को प्रदर्शित करती है (मत्ती 7:9–11)।
4. हमारे बच्चे परमेश्वर के हैं।
वे सबसे पहले उसके हैं (इफिसियों 1:4)। वह उनका स्वर्गीय सृष्टिकर्ता है। उसने उन्हें अपने उद्देश्यों के लिए बनाया है, हमारे अपने उद्देश्यों के लिए नहीं। माता-पिता भण्डारी हैं जो अपने बच्चों को उनकी सबसे बड़ी आवश्यकता की ओर इंगित करने के लिए बुलाये गये हैं (इब्रानियों 12:5-11)। इसका अर्थ है कि हमें अपने बच्चों के लिए अपनी योजनाओं को सदैव परमेश्वर की योजना के अधीन सौंपना है (नीतिवचन 16:9)। परमेश्वर चुनता है कि वे कहाँ रहेंगे (प्रेरितों के काम 17:26), वे क्या भला करेंगे (इफिसियों 2:10), और उनके जीवन की दिशा क्या होगी (भजन 139:16)।
5. परमेश्वर अपने पवित्र उद्देश्य के लिए कष्ट का उपयोग करता है।
परमेश्वर यहाँ तक कि हमारे बच्चों के लिए कष्ट भी चुनता है। परमेश्वर एक अच्छा पिता है, जो बिना शान्ति दिए कष्ट की अनुमति नहीं देता (यशायाह 41:10; 1 कुरिन्थियों 10:13; 1 पतरस 4:19; प्रकाशितवाक्य 21:4)। स्वाभाविक रूप से, जब हम अपने बच्चों को कष्ट उठाते देखते हैं तो हमारे हृदय टूटते हैं। परन्तु अपने पवित्र और अच्छे प्रावधान में, परमेश्वर हमारे बच्चों को (और हमें) अपने पुत्र यीशु ख्रीष्ट के चरित्र के स्वरूप में ढालने के लिए परीक्षाओं से होकर ले जाता है (रोमियों 8:29)। इस अच्छे उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, हम कष्ट में आनन्दित होने के लिए, और समय के साथ, हमें अपने बच्चों को भी ऐसा सिखाने के लिए बुलाये गये हैं (याकूब 1:2–4)।
6. पवित्रता अनुशासन की माँग करती है।
परमेश्वर जिससे प्रेम करता है उसको अनुशासित भी करता है और हमें भी ऐसा करना चाहिए (इब्रानियों 12:6, नीतिवचन 13:24, 23:13)। किसी को भी नहीं, यहाँ तक कि माताओं को भी उस समय पर अनुशासन अच्छा नहीं लगता, फिर भी यह इसके द्वारा प्रशिक्षित लोगों को बाद में धार्मिकता का शान्तिदायक फल प्राप्त होता है (इब्रानियों 12:11)। अपने बच्चों को अच्छी रीति से अनुशासित करने लिए बुद्धि के लिए प्रार्थना करें और पूरी रीति से अपेक्षा करें कि परमेश्वर इसे देगा (याकूब 1:5, 1 यूहन्ना 5:14-15)।
7. पवित्रता परमेश्वर के दृष्टिकोण की माँग करती है।
मनुष्य तो बाहरी रूप को देखता है, परन्तु परमेश्वर हृदय को देखता है (1 शमूएल 16:7)। जब हमारे बच्चे दुर्व्यवहार करते हैं, तो बाहरी रूप से न्याय करने के लिए प्रलोभित किए जा सकते हैं। बाइबल हमें सावधान करती है कि “सुनने के लिए तत्पर, बोलने में धीरजवन्त, और क्रोध करने में धीमें हो” (याकूब 1:19) और हमें बताती है, “बुद्धिमान के कान ज्ञान की खोज में लगे रहते हैं” (नीतिवचन 18:15)। कभी-कभी हमें तुरन्त अनुशासित करने से रुके रहने की आवश्यकता होती है। कुछ प्रकरणों में, हमें पहले अधिक समझ की खोज करनी चाहिए जिससे कि हम हृदय को सही ढंग से सम्बोधित कर सकें (नीतिवचन 14:29)।
8. पवित्रता परमेश्वर की ओर से एक दान है।
कभी-कभी हमारे पास नहीं होता क्योंकि हम परमेश्वर से माँगते नहीं है (याकूब 4:2-3)। अपने बच्चों के लिए परमेश्वर से पवित्रता की माँग करें—प्रत्येक अच्छी वस्तु और उत्तम दान के साथः उसके वचन के प्रति प्रेम, सीखने योग्य हृदय, बुद्धि, स्वास्थ्य, मित्र, और बहुत कुछ (याकूब 1:17)। अपने संसाधनों से आप क्या दे सकते हैं उससे बढ़कर देखें कि परमेश्वर अपने संसाधनों से क्या दे सकता है (मत्ती 14:13-21)।
9. परमेश्वर बच्चों को एक पवित्र प्रतिज्ञा देता है।
“अपने माता और पिता का आदर करो… जिससे कि तेरा भला हो” (इफिसियों 6:1-4)। उनके पिता और अपने सभी अधिकारियों का आदर करने का उदाहरण स्थापित करें। मतभेदों को निजी स्तर पर सुलझाने का प्रयास करें और प्रभु के पालन-पोषण और शिक्षा में अपने बच्चों का पालन-पोषण करने में एकजुट हों (कुलुस्सियों 3:18-25)। यदि आपको अपने बच्चों के सामने असहमत होना अवश्य है, तो ऐसा आदरपूर्वक हों (इफिसियों 6:4)।
10. परमेश्वर सदैव अपना पवित्र कार्य करता रहता है (यूहन्ना 5:17)।
अपने बच्चों के जीवन में परमेश्वर के कार्य को देखने के लिए प्रार्थना करें, उसके लिए परमेश्वर का धन्यवाद करें और उन्हें इसके विषय में बताएँ। एक ईश्वरभक्तिन माँ अपने घर का निर्माण करती है (नीतिवचन 14:1)। प्रशंसा करने से पहले “सिद्धता” की प्रतीक्षा न करें। परमेश्वर तो ऐसा नहीं करता है! उसने बाइबल में कई दोषयुक्त लोगों की सराहना की है। अपने बच्चों को उनके जीवन में परमेश्वर के विश्वासयोग्य कार्यों को दिखाएँ।
11. यीशु हमारी पवित्र शांति है।
यीशु हमें आश्वासन देता हैः “संसार में तुम्हें क्लेश होता है। परन्तु साहस रखो; मैंने संसार को जीत लिया है” (यूहन्ना 16:33)। एक माँ के रूप में क्लेश की अपेक्षा करे, परन्तु निराश न हों; परमेश्वर आपके साथ है। अपने बच्चों के लिए परमेश्वर द्वारा की गई वाचा की प्रतिज्ञाओं को थामे रखते हुए दृढ़ और साहसी बनें जब आप निरन्तर परमेश्वर के वचन और परमेश्वर के लोगों के साथ प्रभु के दिन की आराधना को उनके सामने रखने के लिए परिश्रम करते हैं (यहोशू 1:9)।
12. परमेश्वर का पवित्र वचन पर्याप्त है (2 तीमुथियुस 3:14-15)।
वचन में बने रहें और प्रार्थना करें और आपको ईश्वरभक्तिन माँ बनने में सहायता के लिए कई और सत्य मिलेंगे (यूहन्ना 17:17)। जैसे आप अध्ययन करती हैं कि परमेश्वर कौन है और उसने क्या किया है, तो पवित्र आत्मा आपको दिखाएगा कि एक माँ के रूप में आपको क्या आवश्यकता है जिससे कि आप पौलुस के साथ कह सके, “जो मुझे सामर्थ्य प्रदान करता है, उसके द्वारा मैं सब कुछ कर सकती हूँ” (फिलिप्पियों 4:13)।
यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

