Why-Is-Baptism-a-Means-of-Grace
बपतिस्मा अनुग्रह का एक साधन क्यों है?
5 अगस्त 2025
How-Can-I-Be-a-Godly-Mom
मैं एक ईश्वरभक्तिन माँ कैसे बन सकती हूँ?
12 अगस्त 2025
Why-Is-Baptism-a-Means-of-Grace
बपतिस्मा अनुग्रह का एक साधन क्यों है?
5 अगस्त 2025
How-Can-I-Be-a-Godly-Mom
मैं एक ईश्वरभक्तिन माँ कैसे बन सकती हूँ?
12 अगस्त 2025

क्यों  प्रचार एक अनुग्रह का साधन है?

Why-Is-Preaching-a-Means-of-Grace

पॉल लेवी

“यदि आप मेरी बात नहीं सुनेंगे, तो आप कैसे जान सकते हैं कि मैं कैसा हूँ? यदि आप मुझे बोलने नहीं देंगे, तो आप कभी कैसे समझ पायेंगे कि मैं कौन हूँ”? हम कल्पना कर सकते हैं कि दो लोगों के बीच के सम्बन्ध में ऐसा कुछ कहा जा सकता है। आप को किसी दूसरे मनुष्य को जानने के लिए, बोलने और सुनने की आवश्यक होगी। संचार ऐसे ही कार्य करता है। 

बाइबल के केन्द्र में एक ऐसा परमेश्वर है जो बोलता है, जिसने स्वयं को प्रकट किया है। मूर्तियों में और परमेश्ववर में सबसे बड़ा अंतर यही है: परमेश्वर संवाद करता है। फ्रांसिस शेफ़र के शब्दों में, “वह वहाँ है और वह मौन नहीं है।” वह स्वयं को सृष्टि में प्रकट करता है, और हम उसकी महिमा, प्रताप और सुन्दरता को उसकी रचना में देखते हैं। वह इस संसार में अपनी अदम्य सामर्थ्य का प्रदर्शन करता है, परन्तु हम सृष्टि के द्वारा इससे अधिक और कुछ नहीं जान सकते हैं। आप आकाश की ओर चिल्ला सकते हैं: “आप कौन हैं? आप कैसे हैं?” परन्तु आपको कोई प्रतिउत्तर नहीं मिलेगा।

परन्तु जब हम बाइबल के पन्नों पर आते हैं, तो हम देखते हैं कि वह स्वयं को प्रकट करता है और अपने वचन में हमसे बात करता है। परमेश्वर प्रचार करने वाला परमेश्वर है। बाइबल के प्रथम पृष्ठ पर ही बार-बार यह दोहराया गया है: “और परमेश्वर ने कहा, ऐसा हो . . . और ऐसा ही हुआ।” उसका वचन उसके उद्देश्य को पूर्ण करता है। आरम्भ से ही हम परमेश्वर के वचन की सामर्थ्य और अधिकार को देखते हैं। वह अपने वचन और अपने कार्यों के द्वारा स्वयं को अन्य सभी देवताओं से अलग करता है। यशायाह 55:11 हमारे लिए इसका सारांश देता है:

  उसी प्रकार मेरे मुँह से निकलने वाला वचन होगा। 

वह व्यर्थ ठहरकर मेरे पास न लौटेगा, 

वरन् मेरी इच्छा पूरी करेगा 

और जिस काम के लिए मैंने उसको भेजा है उसे पूरा करके ही लौटेगा। 

पवित्रशास्त्र में शुरुआत से ही, हम देखते हैं कि परमेश्वर बोलता है और उसका वचन वह सब पूरा करता है जो परमेश्वर चाहता है। परमेश्वर कहता है, “उजियाला हो,” और उजियाला होता है। वह अपने लिए लोगों को बुलाता है। वह उन्हें छुड़ाता है। वह अपने वचन से उनका मार्गदर्शन करता है। वह उन पर शासन करता है अपनी व्यवस्था और अपने नबियों के द्वारा, जिन्हें परमेश्वर ने अपने लोगों को परमेश्वर का सन्देश सुनाने के लिए भेजा— अर्थात् परमेश्वर के उसके अपने शब्दों को बोलने के लिए। वे उद्धार और न्याय का सन्देश लाते हैं।

उचित समय पर, परमेश्वर ने अपने पुत्र को संसार में भेजा—उसका पुत्र जो परमेश्वर का वचन है, वह जो परमेश्वर के साथ था और परमेश्वर था और आदि में परमेश्वर के साथ था, जिसके द्वारा सब कुछ उत्पन्न हुआ। उसमें जीवन था, और वचन देहधारी हुआ और हमारे बीच में निवास किया (यूहन्ना 1:1–4, 14)। प्रभु यीशु सबसे महान प्रचारक है। वह उस समय के धार्मिक अगुवों के समान नहीं परन्तु अधिकार के साथ  शिक्षा देता है। वह सरलता से, स्पष्ट रूप से और गहराई से प्रचार करता है। जब वह बोलता है तो भीड़ मंत्रमुग्ध हो जाती है। उसकी वाणी मरे हुओं को जीवित करती है, आँधी को शान्त करती है, दुष्टात्माओं को बाहर निकालती है, और बीमारी को दूर भगाती है। वह वही है जो परमेश्वर को प्रकट करता है। यीशु सुसमाचार के शुभ-सन्देश का प्रचार करने के लिए प्रचारकों को भेजता है, और वे उसके अधिकार से बोलते हैं। जब लोग सुसमाचार के सन्देश को ग्रहण करते हैं, तो वे यीशु को  ग्रहण करते हैं। वे मृत्यु से जीवन की ओर, अन्धकार से ज्योति की ओर बढ़ते हैं। परमेश्वर के वचन प्रचार के द्वारा ही चुने हुए लोग एकत्रित किए जाते हैं और उसकी कलीसिया का निर्माण होता है।

 जब वृद्ध प्रेरित पौलुस अपने जीवनकाल के परे देखता है और प्रेरितकालीन समय के बाद की कलीसिया के लिए प्राथमिकताएँ निर्धारित करता है, तब वह तीमुथियुस को एक प्रमुख आज्ञा देता है: “कि वचन का प्रचार कर, समय और असमय तैयार रह, बड़े धैर्य से शिक्षा देते हुए ताड़ना दे, डाँट और समझा (2 तीमुथियुस 4:2)। यह परमेश्वर का वचन जो प्रचार किया जाना है, जीवित और प्रभावशाली है, और किसी भी दोधारी तलवार से भी अधिक तीक्ष्ण है। परमेश्वर मौन नहीं है। वह बोलने वाला परमेश्वर है, और आज वह अपने प्रचार किए गए वचन के माध्यम से बोलता है। हमारे प्रचार के ईश्वरविज्ञान की जड़ें और आधार अवश्य ही इस बात में निहित होनी चाहिए कि त्रिएक परमेश्वर कौन है।

हम  प्रायः अपने आप से यह पुछना भूल जाते हैं, प्रचार क्या है? यह परमेश्वर के जन द्वारा, परमेश्वर के वचन का, परमेश्वर के आत्मा की सामर्थ्य में उद्घोषणा करना है। परमेश्वर उसके प्रचार किए गए वचन को अपने लोगों को आशीषित करने के लिए उपयोग करता है। परमेश्वर ने कुछ पुरुषों को प्रचारक के रूप में वरदान दिया और बुलाया (अलग किया) है जिससे कि वे उसका वचन जो कहता है उसकी घोषणा करें। परमेश्वर निश्चित रूप से से सीधे भी बोल सकता है, परन्तु वह दुर्बल और नाशवान मनुष्यों को अपना वचन बोलने के लिए चुनता है। वे लोग परमेश्वर के वचन का प्रचार करने के लिए बाध्य हैं, अपने स्वयं के सन्देश को सुनाने के लिए नहीं, न ही उस सन्देश को जो उनके श्रोता सुनना पसन्द करते हैं। वे परमेश्वर की ओर से बोलने वाले हैं। उन्हें परमेश्वर के वचन को समझने के लिए अध्ययन और तैयारी का कठिन कार्य करने की आवश्यकता है। परमेश्वर अपने वचन में उनसे बातें करता है और उनके माध्यम से अपने लोगों से बात करता है।

जब हम परमेश्वर के प्रचारित वचन को सुनते हैं, तो यह अनुग्रह का एक माध्यम होता है। स्वर्ग और पृथ्वी के सम्प्रभु प्रभु के द्वारा सम्बोधित किया जाना एक महान् आशीष और अवसर है। रोमियों 10 में, पौलुस प्रचारकों की महत्वपूर्ण आवश्यकता के विषय में बात करते हुए कहता है: 

14 फिर वे उसे क्यों पुकारेंगे जिस पर उन्होंने विश्वास ही नहीं किया? और वे उस पर कैसे विश्वास करेंगे जिसके विषय में उन्होंने सुना ही नहीं? भला वे प्रचारक के बिना कैसे सुनेंगे? 15 और वे प्रचार कैसे करेंगे जब तक कि भेजे न जाएं? ठीक जैसा कि लिखा है, “उनके पाँव कैसे सुहावने हैं जो *भली बातों का सुसमाचार लाते हैं!” (रोमियों 10:14-15)।

जब परमेश्वर का वचन परमेश्वर के लोगों के द्वारा पवित्र आत्मा के सामर्थ्य में प्रचार किया जाता है और विश्वास के द्वारा ग्रहण किया जाता है, तो यह जीवन देता है। बाइबल का परमेश्वर बोलने वाला परमेश्वर है, और प्रचार उसका प्रवक्ता है। 

परमेश्वर के वचन का प्रचार वह साधन है जिसके द्वारा हम परमेश्वर के अयोग्य दया को प्राप्त करते हैं। परमेश्वर ने अपने वचन को आशीषित करने की प्रतिज्ञा की है। वेस्टमिन्सटर लघु प्रश्नोत्तरी को लिखने वालों ने प्रश्नोत्तर 89 में यही बात कही है: “परमेश्वर का आत्मा वचन को पढ़ने को, परन्तु विशेष रूप से वचन का प्रचार को, पापियों को कायल करने और परिवर्तित करने, और उन्हें  पवित्रता और सान्त्वना में,  विश्वास के माध्यम से, उद्धार के लिए निर्माण करने एक प्रभावी साधन है।

इसलिए, जब हम प्रत्येक रविवार को परमेश्वर के वचन को सुनने के लिए आते हैं, तो हम आनन्द और सुनने और प्राप्त करने की अपेक्षा के साथ आते हैं। परन्तु हम भजन 95 के शब्दों को भी अपने कानों में गूँजते हुए सुनते हैं: “आज, यदि तुम उसकी आवाज़ सुनो, तो अपने हृदयों को ऐसा कठोर न करो” (भजन 95:7–8)।    

 यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

पॉल लेवी
पॉल लेवी
रेव पॉल लेवी पश्चिम लंदन में इन्टर्नैश्नल प्रेस्बिटेरियन चर्च में सेवक हैं।