3 Things You Should Know About Joel
3 बातें जो आपको योएल के विषय में जाननी चाहिए
2 अप्रैल 2026
3 Things You Should Know About Joel
3 बातें जो आपको योएल के विषय में जाननी चाहिए
2 अप्रैल 2026

क्या मनुष्य का स्वभाव मूलतः अच्छा है या पूर्णतः पापमय है?

Is Human Nature Basically Good or Completely Sinful?

यह विचार कि मनुष्य स्वभाव से मूलत: अच्छे होते हैं, प्राचीन पेलेजियसवाद विधर्मता की प्रतिध्वनि है, जिसने यह सिखाया कि आदम का पाप केवल उसी तक सीमित था। इस मत के अनुसार, आदम के पतन से मानव स्वभाव प्रभावित नहीं हुआ। परन्तु पवित्रशात्र इसके विपरीत सिखाता है और स्पष्ट करता है कि आदम का पाप उसके सभी स्वाभाविक वंशजों को प्रभावित करता है (रोमियों 5:12-14)। स्वभाव से मनुष्य “क्रोध की सन्तान” हैं (इफिसियों 2:3)। यही वह ईश्वरवैज्ञानिक सत्य है जो सम्पूर्ण भ्रष्टता (total depravity) वाक्याँश के पीछे है। दूसरे शब्दों में, पाप ने हम सबको (यीशु को छोड़कर) हृदय, मन, शरीर और आत्मा से भ्रष्ट कर दिया है। यह धर्मसिद्धान्त पुराने तथा नए नियम दोनों में पाया जाता है (उदाहरण के लिए: उत्पत्ति 6:5; भजन 14:1–3; 143:2; सभोपदेशक 7:20; यशायाह 64:6; मरकुस 7:18–23; रोमियों 1:21–32; 3:10–18, 23; 8:5–8; गलातियों 4:3; इफिसियों 2:1–3; 4:17–19; तीतुस 3:3)।

मसीही लोग कभी-कभी इस कारण भ्रमित हो जाते हैं, क्योंकि पवित्रशास्त्र यह भी सिखाता है कि मनुष्य परमेश्वर के स्वरूप में रचे गए थे (उत्पत्ति 1:26–27), और परमेश्वर ने जो कुछ बनाया उसे “अच्छा” कहा (पद 31)। यदि परमेश्वर की रची गई प्रत्येक वस्तु अच्छी है, और यदि मानव स्वभाव भी परमेश्वर ने ही बनाया, तो क्या मानव स्वभाव अनिवार्य रूप से अच्छा नहीं होना चाहिए? उत्तर है—हाँ, अपनी मूल सृष्टि में मानव स्वभाव अच्छा था। परन्तु मानव स्वभाव का एक भाग मनुष्य की इच्छा (will) भी है। पहले मनुष्यों के पास यह उत्तरदायित्व था कि वे अपनी सृजित इच्छा को पूर्णतः परमेश्वर की इच्छा के साथ मिलाएँ—अर्थात् उसकी आज्ञा का पालन करें। परन्तु उन्होंने परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन किया। शैतान के समान उन्होंने अपनी इच्छा को मानो परमेश्वर की इच्छा से हटाकर विपरीत दिशा में मोड़ दिया, और इस प्रकार पाप और दुःख को संसार में और अपने स्वभाव में ले आए। दूसरे शब्दों में,  उन्होंने पाप किया। जब ऐसा हुआ, तो मानव स्वभाव विकृत और भ्रष्ट हो गया। जैसा बीज, वैसा फल—अब सभी मनुष्य विकृत तथा भ्रष्ट मानव स्वभाव के साथ जन्म लेते हैं। मनुष्य अब पाप के दास बनकर जन्म लेते हैं। 

इस कारण यह दावा कि “प्रत्येक जन केवल थोड़ा बहुत पाप करता है” त्रुटिपूर्ण है। हम प्राय: अपने आप को दूसरे मनुष्यों से तुलना करके आँकते हैं, और तुलना करने के लिए सबसे बुरे उदाहण चुनते हैं। हम अपने आप को हिटलर, स्टालिन या माओ ज़ेदोंग जैसे लोगों से तुलना करने में रुचि रखते हैं। यदि मानक केवल लाखों लोगों की हत्या करने से बचना ही है, तो अपने विषय में अच्छा अनुभव करना सरल है। परन्तु परमेश्वर का वचन पाप को इस प्रकार नहीं मापता। उसका मानक परमेश्वर की इच्छा है और अपेक्षा है उस इच्छा के प्रति पूर्ण आज्ञाकारिता। “क्योंकि जो कोई सम्पूर्ण व्यवस्था का पालन करता हो और फिर भी किसी एक बात में चूक जाए तो वह सारी व्यवस्था का दोषी ठहरता है” (याकूब 2:10; देखें गलातियों 3:10)। प्रश्न यह नहीं है कि, क्या आपने आज लाखों लोगों को मारने से स्वयं को रोका? किन्तु प्रश्न यह है कि आज आपने “अपने प्रभु परमेश्वर को अपने सारे हृदय और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि से प्रेम किया”, तथा क्या आपने “अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम किया” (मत्ती 22:37-39)? आप कितनी बार इसे पूर्ण रूप से करने में असफल हुए? क्या यह केवल “थोड़ा बहुत” था? नहीं। हम इसमें बार-बार असफल होते हैं, और इसका अर्थ है कि हम बहुत पाप करते हैं। इसी कारण हमें यीशु ख्रीष्ट की पूर्ण धार्मिकता की आवश्यकता है। केवल ख्रीष्ट ही है जिसने व्यवस्था को पूर्ण रूप से पूरा किया है।

 यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

लिग्निएर संपादकीय
लिग्निएर संपादकीय
हम डॉ. आर. सी. स्प्रोल का शिक्षण संघ हैं। हम इसलिए अस्तित्व में हैं ताकि हम जितने अधिक लोगों तक सम्भव हो परमेश्वर की पवित्रता को उसकी सम्पूर्णता में घोषित करें, सिखाएं और रक्षा करें। हमारा कार्य, उत्साह, और उद्देश्य है कि हम लोगों को परमेश्वर के ज्ञान और उसकी पवित्रता में बढ़ने में सहायता करें।