शिशु- बपतिस्मावाद - लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़
पूर्व निर्धारण और मानवीय कार्य
2 नवम्बर 2021
सेवात्मक और घोषणात्मक अधिकार
9 नवम्बर 2021

शिशु- बपतिस्मावाद

सम्पादक की टिप्पणी: यह टेबलटॉक पत्रिका श्रंखला का पांचवा अध्याय है: त्रुटिपूर्वक समझे गए सिद्धान्तद

एक प्रेस्बिटेरियन सेवक के रूप में, मुझ से प्रायः पूछा जाता है कि मैं शिशुओं को बपतिस्मा देने में क्यों विश्वास करता हूँ। मुझे जिस संख्या में प्रश्न मिलते हैं, वह मुझे बताता है कि इस सिद्धान्त के विषय में बहुत बड़ी भ्रान्ति है। इस भ्रान्ति के कारण का एक भाग यह है कि शिशु-बपतिस्मावादी कलीसियाओं के कई सदस्य अपने विश्वास के लिए बाइबलीय स्पष्टिकरण नहीं दे पाए हैं। ऐसा सम्भवतः इसलिए है क्योंकि शिशु-बपतिस्मावादी कलीसियाएं अपने सदस्यों को ऐसा करने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं कर रहे हैं, या केवल इसलिए हो सकता है क्योंकि बपतिस्मा शिशु-बपतिस्मावादियों के लिए निर्धारक सिद्धान्त नहीं है, जैसे यह कई अन्य लोगों के लिए है। उदाहरण के लिए, हमारे बपतिस्मावादी भाई और बहनें, अधिकांश अन्य मसीही परम्पराओं से स्वयं को बपतिस्मा पर अपनी विचार पद्धति के द्वारा अलग करते हैं, जिसका अर्थ है कि उनके सामान्य कलीसिया सदस्य प्रायः इस सिद्धान्त पर अधिक गहन शिक्षण प्राप्त करते हैं हमारे सदस्यों से।

लोगों में शिशु-बपतिस्मावाद के विषय में भ्रान्ति का एक और कारण है कि वे इसके पीछे निहित वाचा ईश्वरविज्ञान को सही से नहीं समझते हैं। मैंने कुछ ही समय पहले एक सेमिनेरी में बपतिस्मा विषय पर पढ़ाया जिसमें मैंने अपने छात्रों से एक बपतिस्मावादी भाई द्वारा लिखे गए एक लेख को पढ़ने के लिए कहा था कि वह क्यों विश्वास करता है कि शिशु-बपतिस्मावाद बाइबलीय नहीं है। इस भाई के लेख के विषय में मुझे सबसे अधिक आश्चर्य हुआ कि उसने कितनी बार वाचा के ईश्वरविज्ञान और बपतिस्मा के लिए इसके उद्धेश्यों को त्रुटिपूर्वक समझा। इससे पहले कि हम इस सिद्धान्त पर एक साथ आगे बढ़ें, हमें इस प्रकार की भ्रान्तियों को यथासम्भव स्पष्टता और अनुग्रह के साथ ठीक करने की आवश्यकता है। और इसी भावना से मैं इस लेख का शेष भाग प्रस्तुत कर रहा हूँ। 

इसे स्वीकार करने के पश्चात, मैं पहली बात यह कहूंगा कि बपतिस्मा प्राप्त करने वालों के विषय में शिशु-बपतिस्मावादी की विचार पद्धति सम्भवतः वह सब कुछ ग्रहण करती है जो विश्वास-बपतिस्मावादी की विचार पद्धति करती है। हम पूरे हृदय से पुष्टि करते हैं कि बपतिस्मा उचित रीति से वयस्कों को (जिनका बपतिस्मा पहले नहीं हुआ) दिया जाता है जब वे ख्रीष्ट में विश्वास का अंगीकार करते हैं। इस प्रकार शिशु-बपतिस्मावादी  शब्द एक प्रकार से अनुपयुक्त नाम है। हम केवल छोटे बच्चों को ही बपतिस्मा नहीं देते; हम विश्वासियों और उनके छोटे बच्चों दोनों को बपतिस्मा देते हैं, और इस अर्थ में, हम विश्वास-बपतिस्मावादी और शिशु-बपतिस्मावादी दोनों हैं। जो बात हमें हमारे विश्वास-बपतिस्मावादी भाईयों और बहनों से अलग करती है, वह है केवल  शब्द। विश्वास-बपतिस्मावादी केवल  अंगीकार करने वाले विश्वासियों को ही बपतिस्मा देते हैं, जबकि हम अंगीकार करने वाले विश्वासियों और उनके बच्चों को बपतिस्मा देते हैं।  

मैं इसका उल्लेख इस बात को इंगित करने के लिए करता हूँ कि विश्वास-बपतिस्मावादी की विचार पद्धति को प्रमाणित करने के लिए नये नियम में बपतिस्मा लेने वाले विश्वासियों के उदाहरणों की ओर संकेत करने से कहीं अधिक लगता है। शिशु-बपतिस्मावादी भी अंगीकार करने वाले विश्वासियों के बपतिस्मा को स्वीकार करते हैं। हमारे विश्वास-बपतिस्मावादी भाइयों और बहनों को यह वर्णन करना होगा कि बाइबल सिखाती है कि अंगीकार करने वाले विश्वासियों को छोड़ और किसी को बपतिस्मा नहीं लेना है।

दूसरी बात जो मैं कहूंगा वह यह है कि उत्पत्ति 17 स्पष्ट रूप से कहती है कि परमेश्वर ने अपनी वाचा के बाहरी चिह्न (खतना) को आठ दिन के अपने शिशु पुत्रों पर लागू करने की आज्ञा दी थी। उस तथ्य को देखते हुए, नई वाचा के अन्तर्गत विश्वासियों के बच्चों द्वारा वाचा के चिह्न को प्राप्त करने की पुष्टि करने के लिए हमें केवल यह दिखाने की आवश्यकता है कि इब्राहीम की वाचा अधिकांशतः नई वाचा के समान है और यह कि खतना का ईश्वरविज्ञान बपतिस्मा के ईश्वरविज्ञान को प्रतिबिम्बित करता है।

रोमियों 2:28-29 और 4:11, व्यवस्थाविवरण 30:6 और यिर्मयाह 9:25-26 के साथ (दूसरे खण्डों के साथ) संकेत करते हैं कि खतना का अभिप्राय कभी भी जातीय पहचान के चिह्न के रूप में नहीं था, परन्तु एक आन्तरिक आत्मिक वास्तविकता (हृदय का खतना) की ओर इंगित करते हुए एक बाहरी संकेत के रूप में अभिप्रेत था। यह पीछे की ओर इंगित करता है जो पहले से ही आन्तिरिक जीवन में कार्य हुआ था— जैसा कि इब्राहीम के घटना में, जिसने पहले विश्वास किया फिर इसके पश्चात उसका खतना किया गया— या जो भविष्य में होने की आशा की गई थी— जैसा कि अधिकतर यहूदियों के विषय में जिनका आठ दिन की उम्र में खतना किया हुआ और यह अपेक्षा की जाती थी कि वे इब्राहीम के विश्वास के पद चिह्नों पर चलेंगे (रोमियों 4:12)। कुलुस्सियों 2:11-12 खतना और बपतिस्मा के मध्य ईश्वरविज्ञानीय सम्बन्ध को स्पष्ट करता है आत्मिक खतना (हृदय का) और आत्मिक बपतिस्मा का (पवित्र आत्मा का) दोनों को मसीही पर लागू करने के द्वारा। यदि आन्तरिक खतना और आन्तरिक बपतिस्मा जुड़े हुए हैं, तो निश्चित रूप से उनके बाहरी चिह्न— अर्थात, शारीरिक खतना और जल बपतिस्मा—भी हैं।

इसके अतिरिक्त, गलातियों 3:16 और रोमियों 4:11-12 हमें सिखाते हैं कि इब्राहीम की वाचा वास्तव में नई वाचा के समान ही है। गलातियों 3:16 कहता है कि ख्रीष्ट इब्राहीम की सन्तान है, जिसका अर्थ है कि केवल वे जो “ख्रीष्ट में” हैं, इब्राहीम की सन्तान हैं— चाहे पुराने नियम में हों या नये नियम में (देखें गलातियों 3:7, 14, 29)। रोमियों 4:11-12 इसकी पुष्टि करता है जब यह कहता है कि इब्राहीम प्रत्येक अन्यजाति (खतनारहित) का पिता है जो विश्वास करता है और प्रत्येक ख़तना किए गए यहूदी का पिता है जो “विश्वास के पदचिह्नों पर चलते हैं… जो कि इब्राहीम के ख़तना से पहले था।” यह विश्वास, जैसा कि यूहन्ना 8:56 हमें बताता है, ऐसा विश्वास है जो ख्रीष्ट की ओर देखता है। यह एक ऐसा विश्वास है जो एक सांसारिक प्रतिज्ञा की हुई भूमि और अस्थाई वास्तविकताओं और आशीषों की ओर देखने के बदले स्वर्ग और आत्मिक वास्तविकताओं और आशीषों की ओर देखता है (इब्रानियों 11:10, 16)।

इसलिए, इब्राहीम की वाचा एक भौतिक या अस्थाई वाचा नहीं थी जिसे इब्राहीम के जैविक वंशजों के साथ बनाया गया था। यह आत्मिक वाचा थी जिसे इब्राहीम के आत्मिक वंशजों के साथ बनाया गया था। यह ऐसी वाचा थी जो अधिकांशता नई वाचा के समान थी। ख्रीष्ट— इब्राहीम का वंश — यह सुनिश्चित करता है कि स्थिति यह है। इसके अतिरिक्त, ख़तना जातिय पहचान का चिह्न नहीं था, परन्तु एक ऐसा चिह्न जो इब्राहीम के जैविक वंशजों को उस विश्वास में उसका अनुसरण करके उसके आत्मिक वंशज बनने के लिए बुलाता है उस विश्वास में जो उसके पास था।

इन वास्तविकताओं को देखते हुए, इसमें कोई आश्वर्य नहीं होना चाहिए कि नया नियम “घराना” बपतिस्मा की बात करता है। वाचाओं के बीच—और वाचा के चिह्नों के बीच—निरन्तरता इंगित करती है कि ठीक वही है जिसकी हम अपेक्षा करते हैं। उत्पत्ति 17 के बाद से, परमेश्वर के लोग “घराना” खतना का अभ्यास कर रहे थे, परमेश्वर की आन्तरिक वाचा का बाहरी चिह्न को वयस्क विश्वासियों (जिन्होंने इस पहले कभी प्राप्त नहीं किया) और अपने बच्चों के लिए लागू किया। वास्तव में, हम नए नियम में कुछ उल्लेख प्राप्त करने की अपेक्षा करेंगे यदि, वाचा के चिह्न के प्राप्तकर्ता के रूप में वाचा समुदाय में बच्चों को सम्मिलित करने के हजारों वर्षों के बाद, नई वाचा के युग में विचार इतनी मौलिक रूप से भिन्न होनी चाहिए थी। क्या हम वास्तव में यह विश्वास करते हैं कि बच्चे अब वाचा समुदाय से पृथक हो गए हैं और इस कारण पुरानी वाचा नई से बड़ी और अधिक संयुक्त किया हुआ है? इसका आधार क्या है? जब हम पुराने से नए नियम की ओर बढ़ते हैं तो यह विस्तार के सिद्धांत के विपरीत चलता है जिसे हम हर स्थान पर कार्य करते हुए देखते हैं। शिशु-बपतिस्मावाद न केवल उस निरन्तरता के अनुरूप है जिसे हम वाचाओं के बीच और वाचाओ के चिह्नों के बीच देखते हैं, परन्तु यह विस्तार के इस सिद्धांत के अनुरूप भी है क्योंकि यह पुरुषों और महिलाओं दोनों और उनके नर और नारी बच्चों के लिए वाचा के चिह्नों को लागू करता है।

यह लेख मूलतः टेबलटॉक पत्रिका में प्रकाशित किया गया।
गाय एम. रिचर्ड
गाय एम. रिचर्ड
डॉ. गाय एम. रिचर्ड, अटलांटा में रिफॉर्म्ड थियोलॉजिकल सेमिनरी में विधिवत ईश्वरविज्ञान के कार्यकारी निदेशक और सहायक प्रोफेसर हैं। वह बपतिस्मा: ऑन्सर्स टू कॉमन क्वेस्चन्स सहित कई अन्य पुस्तकों के लेखक हैं।