पूर्व निर्धारण और मानवीय कार्य - लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़
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पूर्व निर्धारण और मानवीय कार्य

सम्पादक की टिप्पणी: यह टेबलटॉक पत्रिका श्रंखला का चौवथा अध्याय है: त्रुटिपूर्वक समझे गए सिद्धान्तद

ईडिपस की कथा को प्राय: यूनानी भाग्यवाद का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। अपने पितृत्व एवं मातृत्व के विषय में सन्देह से व्याकुल, कथा का नायक एक भविष्यवक्ता की परामर्श लेता है जो घोषणा करता है कि उसे अपने पिता की हत्या करने और अपनी माता से विवाह करने के लिए पूर्वनिर्धारित है। यद्यपि ईडिपस इस भयंकर भविष्यवाणी का खण्डन करता है, फिर भी घटनाएं क्रूर रूप से इसकी पूर्ति को सम्पन्न करते हैं। भाग्य से बचने की उसके सभी प्रयास व्यर्थ प्रमाणित होते हैं।

प्रावधान और पूर्व निर्धारण के धर्मसुधारवादी या कैल्विनवादी सिद्धान्तों पर प्रायः भाग्यवादी होने का आरोप लगाया जाता है। फिर भी यह विवरण कुछ गहरे भ्रमों पर आधारित है। कैल्विनवाद वास्तव में इस बात की पुष्टि करता है कि सृष्टि की सभी घटनाएं परमेश्वर द्वारा पूर्वनिर्धारित हैं। जैसा कि वेस्टमिंस्टर का विश्वास अंगीकार कहता है, “परमेश्वर ने, अनन्त काल से, अपनी इच्छा के सबसे बुद्धिमान और पवित्र परामर्श से, स्वतंत्र रूप से, और अपरिवर्तनीय रूप से जो कुछ भी होता है, उसे निर्धारित किया है” (3:1)। फिर भी, अंगीकार शीघ्र यह विचार जोड़ती है कि यह ईश्वरीय पूर्वनिर्धारण परमेश्वर के प्राणियों के इच्छाओं को अर्थहीन नहीं करती हैं। इसके विपरीत, परमेश्वर सामान्य रूप से अपने अनन्त उद्धेश्यों माध्यमिक कारण के द्वारा जैसे कि मानवीय प्रतिनिधि और प्राकृतिक प्रक्रियाओं को पूरा करता है। परमेश्वर द्वारा मानवीय कार्यों को अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए निर्देशित करते हुए वाले बाइबलीय उदाहरण में यूसुफ (उत्पत्ति 45:5-8; 50:20), इस्राएल के राज्य पर अश्शूरियों का विजय (यशायाह 10:5-11), और प्रभु यीशु के क्रूसीकरण (प्रेरितों के काम 4:27-28) की घटनाएं सम्मिलित हैं।

तो फिर, कैल्विनवाद भाग्यवाद से किस प्रकार भिन्न है? क्या एक कैल्विनवादी को यह स्वीकार नहीं करना चाहिए कि यहूदा के द्वारा यीशु को धोखा देने के लिए भाग्य द्वारा निर्धारित किया गया था (यूहन्ना 17:12; प्रेरितों के काम 1:16) जैसे ईडिपस को अपने पिता की हत्या करने के लिए भाग्या द्वारा निर्धारित किया गया था? हमें पहले ध्यान देना चाहिए कि प्राचीन समय के लोगों द्वारा “भाग्य” को एक व्यक्तित्वहीन सामर्थ्य या सिद्धान्त के रूप में समझा जाता था जो मनुष्यों और देवताओं पर समान रूप से लागू होता था। जिस प्रकार यूनानियों ने एक सर्वोपरि व्यक्तिगत सृष्टिकर्ता को स्वीकार करने में विफल रहे, उसी प्रकार उनके पास एक सम्प्रभु परमेश्वर के किसी भी विचार का अभाव था जो सभी वस्तुओं को “अपने पवित्र उद्देश्यों के लिए” निर्देशित करता है (WCF 5.4)। अन्यजाति भाग्यवाद के लिए, ईश्वरीय प्रावधान का कोई ईश्वरीय हाथ नहीं है, परमेश्वर की कोई व्यापक योजना नहीं है। नियत परिणामों के लिए कोई तुक या कारण नहीं है; संसार अर्थहीनता और त्रासदी का रंगमंच है। इसकी तुलना बाइबलीय विश्वावलोकन से करें, जिसके अनुसार परमेश्वर “सब कुछ अपनी इच्छा के अनुसार करता है” (इफिसियों 1:11) और “सब बातों के द्वारा भलाई को उत्पन्न करता है, अर्थात, उन्हीं के लिए जो उसके अभिप्राय के अनुसार बुलाए गए हैं” (रोमियों 8:28)।

कैल्विनवाद और भाग्यवाद के बीच एक दूसरे बड़े अन्तर पर थोड़ी बात हो चुकी है। कौल्विनवाद मानता है कि परमेश्वर ने केवल अन्त—घटनाओं का अन्तिम लक्ष्य—को निर्धारित करता है, परन्तु उन लक्ष्यों के साधनों को भी निर्धारित करता है। दूसरे शब्दों में, परमेश्वर के प्रावधान में साधनों को अन्त के साथ इस प्रकार समन्वित किया जाते हैं कि अन्त साधनों पर निर्भर होता है। इस प्रकार, परमेश्वर ने केवल यह निर्धारित नहीं किया कि यूसुफ फिरौन के अधिकार में दूसरे स्थान पर होगा; उसने उन घटनाओं की पूरी श्रृंखला को निर्धारित किया जो उस परिणाम में समाप्त हुईं, यहाँ तक कि यूसुफ के भाईयों के पापपूर्ण कार्य भी सम्मिलित थे। हमें यह कल्पना नहीं करना चाहिए कि परमेश्वर ने यूसुफ को फिरौन के लिए इतना महत्वपूर्ण बनने की योजना बनाई थी, भले ही उसके भाइयों ने उसके साथ कैसा व्यवहार किया हो। 

दूसरी ओर, भाग्यवाद, अन्त को साधनों से पृथक कर देता है, जिसका अर्थ है कि हमारा जीवन एक निश्चित प्रकार के होंगे, चाहे हम कुछ भी करें। चलचित्रों की एक नई श्रृंखला द्वारा एक समकालीन उदाहरण प्रदान किया गया है जिसमें लोगों का एक समूह आरम्भ में मृत्यु को धोखा देता है, परन्तु उनका सुरक्षित बच कर निकला जाना सदा अल्पकालिक होता है। मृत्यु अन्ततः उनमें से प्रत्येक को साथ पकड़ लेता है, भले ही वे उसके हंसिया से बचने का प्रयास करते हैं। भाग्यवाद बताता है कि हमारे कार्य वास्तव में व्यर्थ है; वे परिणाम को व्यावहारिक रीति से प्रभावित नहीं करते हैं। फिर भी यह विचार ईश्वरीय प्रावधान के धर्मसुधारवादी सिद्धान्त से पूर्ण रीति से अलग है। हमारे भविष्य के परिणाम निश्चित रूप से इस जीवन में हमारे द्वारा किए गए चुनावों पर निर्भर होते हैं। दोनों की पुष्टि करने में कोई विरोधाभास नहीं है कि भविष्य के परिणाम हमारे चुनाव पर महत्वपूर्ण रूप से निर्भर होते हैं और यह कि परमेश्वर सभी बातों को सम्प्रभुता से आदेश देता है, जिसमें भविष्य के परिणाम और उनकी ओर ले चलने वाले चुनाव सम्मिलित हैं। हाँ, परमेश्वर अपने प्राणियों के कार्यों का पूर्वनिर्धारण करता है, परन्तु वह यह भी पूर्वनिर्धारित करता है कि उनके कार्यों के महत्वपूर्ण परिणाम होंगे।

एक खेल का उदाहरण इस विचार को स्पष्ट करने में सहायता कर सकता है। कल्पना कीजिए कि आप एक मित्र, जैकब के साथ गोल्फ खेल रहे हैं, जिसे कैल्विनवाद और भाग्यवाद को मिलाने की आदत है। पांचवे स्तर पर, आपने मैदान में अच्छा शोट मारा। गेंद वर्गाकार रूप से हरी घास पर उतरती है और एक ही शोट में गड्डे में विजयी रूप से लुढ़कती है।

आपको बधाई देने के स्थान पर, जैकब के मुख पर एक नटखट मुस्कान है। “आप एक कैल्विनवादी हैं, है ना?” आप उत्तर देते हैं, “हाँ मैं हूँ।” यह सुनने के लिए उत्सुकता के साथ कि यह विचार कहाँ जा रहा है। “तो आप मानते हैं कि परमेश्वर ने अनन्त काल से सभी घटनाओं को पूर्वनिर्धारित किया है, जिसमें एक ही बार में गेंद को गड्डे में डालना सम्मिलित है। ठीक है, यदि परमेश्वर ने इसे पहले से निर्धारित किया है, तो इससे कोई प्रभाव नहीं पड़ता कि आपने गेंद को कैसे मारा। गेंद का गड्डे में पहुँचना पूर्वनिर्धारित था।”

जैकब उतना बुद्धिमान नहीं है जितना वह सोचता है। उसके भ्रमित तर्क से, गेंद गड्डे में उतर जाती, भले ही आपने उसे नहीं भी मारा होता। परन्तु स्पष्ट रूप से यह असंगत है। एक ही प्रहार में गेंद का अन्दर जाना आपकी गेंद पर प्रहार करने और उसे अच्छी रीति से प्रहार करने पर निर्भर था। सुसंगत कैल्विनवादी कहेगा कि परमेश्वर ने न केवल गेंद को एक ही प्रहार में गड्डे में पहुंचाने को पूर्वनिर्धारित किया है परन्तु यह भी कि यह तब ही सम्भव हैं जब आप गेंद पर सटीक रूप से प्रहार करेंगे। आपका सुनियोजित रूप से गेंद को मारना वास्तव में महत्वपूर्ण है।

यह केवल दार्शनिक बात की बाल की खाल उतारना नहीं है। कैल्विनवाद और भाग्यवाद के बीच के अन्तर का मसीही जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण प्रभाव हैं। इसका अर्थ है कि हमारी प्रार्थनाओं से वास्तव में प्रभाव पड़ता है, क्योंकि परमेश्वर ने निर्धारित किया है हमारी प्रार्थनाओं के उत्तर में भविष्य की घटनाएं होंगी। इसका अर्थ है कि सुसमाचार प्रचार आवश्यक है, क्योंकि परमेश्वर ने यह आदेश दिया है कि उसके चुने हुए लोग सुसमाचार सुनने और उस पर विश्वास करने के द्वारा बचाए जाएंगे। इसका अर्थ है कि हमें अपनी बुलाहट और चुनाव की पुष्टि करने के लिए परिश्रमी होना चाहिए (2 पतरस 1:10), क्योंकि यद्यपि चरवाहा अपनी भेड़ों में से किसी को भी नहीं खोएगा, वे भेड़ें अन्त में तभी बचाई जाएंगी जब वे अन्त तक विश्वास में बने रहेगें।

यह समझते हुए कि परमेश्वर साधन और अन्त दोनों को निर्धारित करता है, कैल्विनवादी वास्तव  में कह सकते हैं, “यदि हम प्रार्थना न करते, तो ऐसा नहीं होता; यदि हम सुसमाचार न सुनाते, तो वे इसे न सुनते; यदि हम विश्वास में दृढ़ न रहें, तो हमें जीवन का मुकुट नहीं मिलेगा।” फिर भी साथ ही साथ, कैल्विनवादी इन सबका अन्तिम श्रेय परमेश्वर के सम्प्रभु अनुग्रह को देंगे।

यह लेख मूलतः टेबलटॉक पत्रिका में प्रकाशित किया गया।
जेम्स ऐन्डर्सन
जेम्स ऐन्डर्सन
डा. जेम्स एन. ऐन्डर्सन, शार्लट्ट, नॉर्थ कैरोलाइना के रिफॉर्म्ड थियोलॉजिकल सेमिनरी में कार्ल डब्ल्यू मक्मर्रे प्रोफेसर ऑफ थियोलॉजी ऐन्ड फिलॉसफी तथा एसोसिएट रिफॉर्म्ड प्रेस्बिटेरियन चर्च में एक सेवक हैं। वे इस्लाम की खोज लिग्निएर शिक्षण श्रृंखला के लिए विशेष रूप से शिक्षक हैं और व्हाट इज़ यॉर वर्ल्डव्यू ? के लेखक हैं।