समस्त शान्ति का परमेश्वर - लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़
प्रकाशितवाक्य 3:20
30 जून 2022
अपरिवर्तनीय सुसमाचार
7 जुलाई 2022

समस्त शान्ति का परमेश्वर

सम्पादक की टिप्पणी: यह टेबलटॉक पत्रिका श्रंखला का तेरहवां अध्याय है: उस पद का अर्थ वास्तव में क्या है?

आप कितनी भली रीति से दुख उठाते हैं? मैं परमेश्वर की लेपालक सन्तान हूँ, परन्तु मैं उसमें अच्छा नहीं हूँ। मैं निश्चित हूँ कि आपको भी इस क्षेत्र में बढ़ने की आवश्यकता होगी।

परमेश्वर की लेपालक सन्तान के रूप में, हम विभिन्न कारणों से दुख उठाते हैं। पहला, आदम के पाप के कारण, हम पतित संसार में दुख का सामना करते हैं। परमेश्वर के प्रावधानिक प्रहार हमें परमेश्वर और यीशु ख्रीष्ट में विश्वास के प्रति पश्चात्ताप करने के लिए प्रेरित करने के लिए हैं (रोमियों 2:1-5; 8:18-39)। दूसरा, हम प्रायः अपने पापमय विचारों, इच्छाओं, शब्दों, और कार्यों के परिणामस्वरूप दुख उठाते हैं (1 पतरस 4:12-19)। सदैव ही पाप के परिणाम होते हैं। फिर भी, परमेश्वर की दया और अनुग्रह हमें पुनः अच्छे चरवाहे के पास बुलाते हैं (2:18-25; 1 यूहन्ना 1:5-2:2)। तीसरा, हम संसार और शैतान के निशाने के रूप में भी दुख उठाते हैं क्योंकि हम ख्रीष्ट में एक हैं।

जब हम दुख उठाते हैं, कारण भले ही जो भी हो, हमें कष्ट होता है। पेट पर एक मुक्के के समान, ऐसा प्रतीत होता है कि दुख उठाना पवित्र आत्मा को निकाल देता है। हम श्वाँस लेने में संघर्ष करते हैं। हमें किसकी आवश्यकता है? जैसे-जैसे आत्मा हमें नया करता है, हमें थामे रखने और शान्ति देने के लिए हमें समस्त शान्ति के परमेश्वर की आवश्यकता है। परमेश्वर की शान्ति दुख और संकट को घटाती है। आवश्यकता पड़ने पर, यह पश्चाताप करने के लिए सामर्थ देता और उसकी ओर ले जाता है।

पुराना नियम हमारी शान्ति की नींव रखता है। जबकि सुलैमान कहता है कि उत्पीड़ितों का कोई रक्षक नहीं है और ऐसा प्रतीत होता है कि दुष्टों के पास शक्ति है, यह निरर्थकता अन्तिम शब्द नहीं हैं। क्योंकि चरवाहा परमेश्वर की सन्तानों की देखभाल करता है (भजन 23; 50; 52; 65; 70; 82; 119)। परमेश्वर का वचन शान्ति देता है। नबियों का कहना है कि परमेश्वर का वचन उसके लोगों को बन्धुवाई में अनुशासन के पश्चात् शान्ति देगा (यशायाह 12:1; 22:4; 51:3; 19; जकर्याह 1:17)। शुभ सन्देश यह है कि परमेश्वर अपनों को शान्ति देता है (यशायाह 40:1-5)। यीशु ने इन प्रतिज्ञाओं को पूरा किया (61:1-4), जैसा कि उसने नासरत के आराधनालय में अपने उपदेश में घोषणा की थी। परमेश्वर की शान्ति अच्छे चरवाहे यीशु में पूर्ण है (यूहन्ना 10:1-21)।

यह शान्ति नए नियम में सुस्पष्ट है। आप पूरे नए नियम में शान्ति पाएँगे, परन्तु अभी के लिए 2 कुरिन्थियों 1 में पौलुस के शब्दों पर ध्यान केन्द्रित करें। परमेश्वर की शान्ति पूरी पत्री में मुख्य विषय है। पौलुस ने आपके और मेरे संयुक्त दुख से अधिक दुख उठाया, फिर भी परमेश्वर ने उसे शान्ति दी (2 कुरिन्थियों 4:7-12; 6:3-10; 11:16-20:10)। 2 कुरिन्थियों 1:3-11 को पढ़ें। पौलुस परमेश्वर को धन्य कहता है; वह उसके दो चरित्रों पर ध्यान केन्द्रित करता है। प्रथम, परमेश्वर दयालु पिता है। हमारा स्वर्गीय पिता कोमल हृदय का है, कठोर हृदय का नहीं। वह दुख और पीड़ा के मध्य भी हम पर दया करता है। यह सीनै पर्वत पर मूसा के लिए उसके अद्भुत आत्म-विवरण से उत्तम है (निर्गमन 34)। वह रोटी, मछली, और अण्डे—हाँ, यहाँ तक की आत्मा भी—देता है, न कि पत्थर, साँप, और बिच्छु (मत्ती 7:7-11; लूका 11:9-11)।

द्वितीय, वह समस्त शान्ति का परमेश्वर है। वह हमें हमारे सभी कष्टों में शान्ति देता है। वह न केवल हम पर अनर्जित दया की वर्षा करता है परन्तु साथ ही दो उद्देश्यों के लिए शान्ति को भी उण्डेलता है। पहला, वह हमें शान्ति देता है जिससे कि हम, इसके परिणामस्वरूप, इसी दयालु शान्ति के साथ अन्य लोगों को शान्ति दे सकें। यह अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम करना है।

कठिन, असहनीय कष्टों और प्रावधानिक प्रहारों में दूसरा उद्देश्य है आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को समाप्त करना और पुनरुत्थान के परमेश्वर के प्रति अपने भरोसे और निर्भरता को स्थानान्तरित करना है। यह मृत्यु के घोर अन्धकार की तराई में हमारे भीतर के सब कुछ के साथ परमेश्वर पर भरोसा करना है। इन दोनों उद्देश्यों—पिता की शान्ति से दूसरों को शान्ति देना और हमें कष्टों से निकालने के लिए पिता की अलौकिक शक्ति पर भरोसा करना—को हमें अपनी श्वाँस पकड़ने में सहायता करनी चाहिए जब आत्मा हमें नई सामर्थ्य करता है।

हाँ, जब कष्ट और कठिन प्रयोजन प्रहार करते हैं, और जब हमें आभास होता है कि आत्मा ने हमें छोड़ दिया है, तो हमें क्या चाहिए? हमें अपने शान्ति देने वाले परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को पकड़े रहना है जब आत्मा हमें शान्ति देता है (प्रेरितों के काम 9:31)। पिता कोमल हृदय है: या कितनी ही शान्ति की बात है। अनुग्रह के सिंहासन के सम्मुख हमारा स्वागत है।

एक अन्तिम अवलोकन: पौलुस चाहता है कि हम उसका अनुकरण करें जैसा कि वह यीशु का अनुकरण करता है (1 कुरिन्थियों 11:1, 1 थिस्सलुनीकियों 1:6)। यीशु नयी वाचा का मध्यस्थ है। वह विश्वासयोग्य नयी वाचा की सेवा का आदर्श भी है (1 पतरस 2:18-24)। यीशु पिता की दया और शान्ति को उण्डेले हुए पवित्र आत्मा के माध्यम से लागू करता है। यीशु हमारा विश्वासयोग्य और दयालु महायाजक है (इब्रानियों 2:14-18; वेस्टमिन्सटर वृहद प्रश्नोत्तर 55 देखें)। वह, सभी अन्य लोगों से अधिक उत्तम रूप से, हमारे साथ सहानुभूति रख सकता है क्योंकि उसने दुख उठाया, उन दुखों के मध्य प्रलोभित हुआ, और फिर भी पाप नहीं किया (इब्रानियों 4:14-16)। उसने उन दुखों से शिक्षा ली (5:7-10)। हमें उसकी ओर विश्वास के पथप्रदर्शक और सिद्ध करने वाले के रूप में देखना चाहिए (12:1-11‌)।  वह हमें पिता के पास ले जाता है (यूहन्ना 17), और पिता की शान्ति नयी वाचा के लिए एक प्रमुख आशीष है।

प्रिय मित्रो और साथ में दुख उठाने वालो: आइए अपने दुख उठाने को व्यर्थ न करें। आइए भली रीति से दुख उठाएँ। आइए पौलुस के समान दुख उठाएँ। आइए यीशु के समान दुख उठाएँ। क्यों? जिससे कि हम स्वयं पर नहीं परन्तु दयालु पिता पर निर्भर होंगे जो मृतकों को जिलाता है। क्यों? जिससे कि हम अन्य लोगों को उसी शान्ति से शान्ति दे सकें जो हमें पिता से प्राप्त होती है। आइए प्रार्थना करें कि हम सब उसकी महिमा के लिए भली रीति से दुख उठाना सीख सकें।

हमें यह आशीष वचन प्राप्त हों:

प्रभु यीशु ख्रीष्ट का अनुग्रह और परमेश्वर का प्रेम और पवित्र आत्मा की सहभागिता तुम सब के साथ होती रहे। (2 कुरिन्थियों 13:14)

अब स्वयं हमारा प्रभु यीशु ख्रीष्ट तथा पिता परमेश्वर जिसने हमसे प्रेम किया और अनुग्रह से अनन्त शान्ति तथा उत्तम आशा दी है, तुम्हारे हृदयों की भलाई के प्रत्येक कार्य तथा वचन में दृढ़ करें और शान्ति दे                                  (2 थिस्सलुनीकियों 2:16-17)

आमीन।

यह लेख मूलतः टेबलटॉक पत्रिका में प्रकाशित किया गया