
इतिहास में पवित्र-आत्मा का कार्य
20 जनवरी 2026
पवित्र आत्मा का फल
27 जनवरी 2026छुटकारे में पवित्र आत्मा का कार्य
क्रिस्टीना जी. रोसेटी की बच्चों के लिए लिखी एक कविता है, जो हवा के आश्चर्य और उसके ठोस कार्य की सच्चाई दोनों को एक साथ दिखाती है:
हवा को किसने देखा है?
न तुमने, न मैंने।
परन्तु जब पेड़ अपने सिर झुकाते हैं,
तो समझ लो हवा बह रही होती है।
हवा कभी दिखाई नहीं देती, परन्तु उसके कार्य से उसे स्पष्ट पहचाना जा सकता है।
यीशु ने हवा की इच्छा की तुलना परमेश्वर के आत्मा के कार्य से की (यूहन्ना 3:8)। जिन्होंने उसके कार्य को देखा है, वे उसकी सच्चाई को जानते हैं। फिर भी आज परमेश्वर के लोगों द्वारा आत्मा के बहुत थोड़े कार्य को ठीक से पहचाना जाता है। परिणामस्वरूप, उसकी आत्मा की वास्तविकता के व्यापक आयामों के स्थान पर उसके व्यक्तिपरक अनुभव पर बहुत अधिक ध्यान दिया जाता है। इसलिए आइए पहले हम आत्मा के वस्तुनिष्ठ कार्य पर और फिर उसके व्यक्तिपरक कार्य पर विचार करें।
विश्वासी के बाहर पवित्र आत्मा का अद्भुत कार्य
सबसे पहले, पवित्र आत्मा ने समस्त जीवन की सृष्टि की और वह उसे बनाए रखता है। पिता और पुत्र के समान ही, पवित्र आत्मा इस विश्व और उसमें जो कुछ है, उसका स्रोत है। उत्पत्ति की सृष्टि की कहानी हमें बताती है कि “परमेश्वर का आत्मा जल की सतह पर मण्डराता था।” जैसे उकाब जीवन देने के लिए अपने घोंसले पर बैठती है, वैसे ही परमेश्वर के आत्मा ने सृष्टि के समय जीवन देने वाले प्रतिनिधि के रूप में कार्य किया (उत्पत्ति 1:2, और व्यवस्थाविवरण 32:11)। जब भजनकार पृथ्वी को “जीवों… से भरी हुई” और समुद्र को “असंख्य जीवों से भरा हुआ” बताता है, तो वह घोषणा करता है, “जब तू अपना आत्मा भेजता है, तो वे सिरजे जाते हैं, और तू पृथ्वी के रूप को नया कर देता है” (भजन 104:24-25, 30)। अणु, परमाणु जो इस पृथ्वी पर सब कुछ गठित करते हैं, और गुरुत्वाकर्षण बल जो संसार को एक साथ बाँधे रखती है, वे सभी अपनी कार्य शक्ति संप्रभु सृजनकर्ता और बनाए रखने वाला आत्मा से प्राप्त करते हैं।
न केवल सृष्टि में परन्तु छुटकारे को पूर्ण करने में भी, परमेश्वर का आत्मा एक प्रधान भूमिका निभाता है। क्योंकि उसके अद्भुत, रहस्यमय कार्य के बिना, परमेश्वर के पुत्र का देहधारण नहीं होता। आत्मा ही वह था जिसने कुँवारी के गर्भ में यीशु के गर्भधारण को सम्भव बनाया। लूका 1:35 बताता है कि पवित्र आत्मा कुँवारी मरियम पर आया और परमप्रधान की सामर्थ्य ने उसे ढक लिया। आत्मा के बिना, कोई देहधारी उद्धारकर्ता नहीं होता।
सृष्टि और छुटकारे में पवित्र आत्मा का यह वस्तुनिष्ठ कार्य सावधानीपूर्वक ध्यान देने योग्य है। इस महान् पवित्र आत्म परमेश्वर, त्रियेक परमेश्वर के इस सर्वसामर्थी व्यक्ति की, वह जो है और जो करता है, उसके लिए सराहना की जानी चाहिए। वह कोई दुर्बल या क्षणिक उपस्थिति नहीं है जो छुटकारे की प्रक्रिया में केवल एक बाद के विचार के रूप में आता है। सृष्टि से लेकर पूर्णता तक, वही महान् कार्यकर्ता है जो निरन्तर अद्भुत कार्य को करता है।
विश्वासी के भीतर पवित्र आत्मा का अद्भुत कार्य
इसी प्रकार, छुड़ाये गए लोगों के जीवन में आत्मा के कार्य के व्यापकता को उसकी सम्पूर्णता में सहराना होनी चाहिए। प्रभु के चुने हुए के बीच आत्मा के सात कार्यों पर ध्यान दें:
पहला, आत्मा पुनरुज्जीवन देता है। यीशु के स्पष्ट वचनों को कितनी बार त्रुटिपूर्वक रूप से समझा गया है। लोग “तुम्हें फिर से जन्म लेना होगा” को बदलकर ऐसा पढ़ लेते हैं मानो लिखा हो, “तुम्हें स्वयं को फिर से जन्म देना होगा।” यह व्याख्या न केवल व्याकरण के की दृष्टि से त्रुटिपूर्ण है (एक अकर्मक क्रिया का कोई कर्म नहीं होता), परन्तु यह एक गहरे आत्मिक सत्य को भी विकृत कर देती है। जैसे हमने इस पतित संसार में जन्म लेने के लिए कुछ नहीं किया, वैसे ही हम स्वयं को छुटकारे की ईश्वरीय रूप से नवीनीकृत संसार में लाने के लिए कुछ नहीं कर सकते। हमें “आत्मा से” जन्म लेना होगा (यूहन्ना 3:5, 8)। हम परमेश्वर के आत्मा को अपने नए जन्म के लिए विवश नहीं कर सकते। हवा वहाँ बहती है जहाँ चाहती है—और यह आत्मा की इच्छा है, हमारी नहीं, जो व्यक्ति को ऊपर से जन्म लेने का कारण बनती है (पद 3)। सच में, यदि हमारी इच्छाएँ आत्मा के नए जन्म से नई होती हैं, तो हम उद्धार के लिए परमेश्वर को पुकारने का चुनाव करेंगे, जैसे एक नवजात शिशु जन्म लेने के बाद रोता है। परन्तु पवित्र आत्मा परमेश्वर को वह महिमा दें जिसके वह योग्य है। उद्धार के लिए पुकार नए जन्म के परिणाम के रूप में आती है और कभी भी नए जन्म का कारण नहीं हो सकती। आत्मा स्वयं ही संप्रभुता से पूर्णतः नवीनीकरण का यह महान् कार्य करता है।
दूसरा, आत्मा आश्वासन देता है। हम नया जन्म पाने के बाद भी पाप करते रहते हैं? तब हम इतने निश्चित कैसे हो सकते हैं कि हम परमेश्वर की सन्तान हैं?
हम आत्मा के आश्वासन के कारण इतने साहसी हो सकते हैं। इस सबसे अद्भुत कार्य में, “आत्मा स्वयं हमारी आत्मा के साथ मिल कर साक्षी देता है कि हम परमेश्वर की सन्तान हैं” (रोमियों 8:16)। आत्मा के नियमित कार्य के बिना पापी अपने उद्धार के विषय में निश्चित नहीं रह सकता। आखिरकार, परमेश्वर की अपनी आत्मा की साक्षी का विरोध करने की हिम्मत कौन करेगा? हमारी अपनी आत्माओं के भीतर उसकी व्यक्तिगत साक्षी के कारण, हम शांति से रह सकते हैं। यदि उसकी साक्षी है, तो निश्चय जानिए कि आप परमेश्वर के पुत्र हैं।
तीसरा, आत्मा मुहर लगाता है। आज हम साधारण पत्रों पर जो गोंद लगी मुहरें प्रयोग करते हैं, वे इतनी प्रभावशाली नहीं होतीं। उन्हें आसानी से अनदेखा किया जा सकता है और तोड़ भी जा सकता है। परन्तु प्राचीन समय में, राजा की आधिकारिक छाप लगी मोम की मुहर को तोड़ना अत्यन्त जोखिमपूर्ण माना जाता था।
उसी प्रकार, यह राजसी आत्मा प्रत्येक विश्वासी को छुटकारे की समस्त आशीषों के अधिकार में मुहरबन्द करता है। यहाँ यह राजाओं के राजा की मुहर है जिसे तोड़ा नहीं जा सकता। पवित्र आत्मा न केवल हमें वर्तमान में यह निश्चय देता है कि हम छुड़ाए गए हैं, वरन् हमें हमारे उद्धार के स्थायी अधिकार में भी सुरक्षित करता है। क्योंकि “और जिस पर तुमने विश्वास किया—प्रतिज्ञा किए हुए पवित्र आत्मा की छाप लगी। वह हमारे उत्तराधिकार के बयाने के रूप में इस उद्देश्य से दिया गया है” और यह ख्रीष्ट के लौट आने के दिन तक है (इफिसियों 1:13-14)। यह एक स्थिर और निश्चित बात है। उसका मुहर लगाने वाला कार्य कभी रद्द नहीं किया जा सकता—और यह सब “उसकी महिमा की स्तुति के लिए”(पद 14)।
चौथा, पवित्र आत्मा पवित्रीकरण करता है। प्रेरित पौलुस आत्मा के इस कार्य का वर्णन करने के लिए एक अनोखी तुलना और विपरीतता का उपयोग करता है। वह कहता है, “दाखरस पीकर मतवाले न बनो, … [परन्तु] आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ” (5:18)। जब कोई व्यक्ति मदिरापान करता है, तो क्या होता है? “आत्माओं” का मदिरा उसके खून के प्रवाह में मिल जाता है और उसके शरीर के हर भाग में फैल जाता है। वह अलग ढंग से चलता है और अलग ढंग से बात करता है, और वह अलग ढंग से देखता है, सुनता है और व्यवहार करता है। ऐसा ही अनुभव हर उस व्यक्ति का होता है जो आत्मा से “परिपूर्ण हुआ” होता है। परमेश्वर की पवित्रता, पवित्र आत्मा की पवित्रता, उसके उसके जीवन के हर पक्ष में व्याप्त हो जाती है। वह आनन्दपूर्वक आराधना, स्तुति और प्रार्थना की स्थानों पर जाता है—ऐसे स्थान जहाँ वह अन्यथा नहीं जाता। वह यीशु ख्रीष्ट के विषय में साहसपूर्वक बात करता है। अपमान के प्रत्युत्तर में, वह प्रेम से प्रतिउत्तर देता है।
आत्मा से परिपूर्ण होने का यह अनुभव ऐसा नहीं है जो एक बार घटित होता है और फिर समाप्त हो जाता है। इस वाक्याँश का शाब्दिक अर्थ है, “आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ।” पौलुस हमें नियमित, निरंतर, और अधिक व्यापक रूप से हमारे सोचने, कहने और करने में ईश्वरीय आत्मा के स्थायी प्रभाव से भरे रहने के लिए कहता है। यह जीवन का सबसे बड़ा संभव अनुभव है।
पाँचवा, आत्मा प्रत्येक विश्वासी के जीवन में फल उत्पन्न करता है। और वह कैसा अद्भुत फल उत्पन्न करता है। गलातियों 5:22-23 में आत्मा के कम से कम नौ विशिष्ट उत्पादों को सूचीबद्ध किया गया है। इनमें से केवल पहले तीन फलों के लिए ही संसार सब कुछ देने को तैयार हो जाएगा: “प्रेम, आनंद, शांति।” परन्तु संसार को यह कम ही पता है कि केवल परमेश्वर का पवित्र आत्मा ही पापियों के हृदयों में सच्चा प्रेम, आनंद और शांति उत्पन्न करने में सक्षम है। जब कोई और या कुछ और यह नहीं कर सकता, तब वह यह करता है और अवश्य करेगा।
छठा, पवित्र आत्मा वरदान बाँटता है। ऐसा कभी नहीं हुआ कि प्रत्येक विश्वासी को सभी वरदान मिले हों, परन्तु हर विश्वासी को दूसरों की सेवा करने के लिए कोई न कोई वरदान आवश्य मिला है (1 कुरिंथियों 12:7–11)। कुछ लोगों ने दावा किया है कि जब तक व्यक्ति में “अन्य भाषाओं में बोलने” का वरदान दिखाई नहीं पड़ता, तब तक उसे पवित्र आत्मा से बपतिस्मा नहीं मिला हो सकता। परन्तु पौलुस इसे बहुत स्पष्ट रूप से खण्डित करता है: सभी विश्वासियों को अन्य भाषाओं में बोलने का वरदान नहीं मिला है, परन्तु सभी को पवित्र आत्मा द्वारा ख्रीष्ट के एक ही शरीर में बपतिस्मा दिया गया है (1 कुरिंथियों 12:13, 29–30)। प्रेरितों के युग में, परमेश्वर ने अन्य भाषाओं और भविष्यवाणी जैसे प्रकट करने वाले वरदान दिए जो कलीसिया के जीवन के लिए युगों-युगों तक एक अचूक मार्गदर्शक स्थापित करने के लिए प्रकट सत्य की एक ठोस नींव प्रदान करने के लिए आवश्यक थे (इफिसियों 2:19–20)। ये वरदान कलीसिया को ठोस, अटूट प्रकट सत्य पर स्थापित करने के लिए आवश्यक थे। परन्तु जबकि इस नींव को हर नई पीढ़ी में फिर से रखने की आवश्यकता नहीं है, इसलिए नए प्रकाशन से संबंधित ये विशिष्ट वरदान प्रेरितों के दिनों के बाद से दिखाई नहीं पड़े।
फिर भी, ख्रीष्ट के देह के हर एक सदस्य को पवित्र आत्मा दूसरों की सेवा करने के लिए आत्मिक क्षमताएँ प्रदान करता है। कुछ को परमेश्वर के वचन का प्रचार करने या सिखाने का वरदान मिलता है (इफिसियों 4:11)। दूसरों को प्रोत्साहन देने का वरदान मिलता है (रोमियों 12:8)। और कुछ को प्रबंधन करने का वरदान मिल सकता है (पद 8)। जीवन में इससे बढ़कर किसी तृप्ति का अनुभव नहीं होता, जितना कि तब होता है जब हम अपने आत्मिक वरदानों का पूर्ण रूप से उपयोग करते हैं। जब हम दूसरों के लिए आशीष बनते हैं, तो हम जानते हैं कि हम सबसे आधिक आशीषित हैं। और यह सबसे संतोषजनक अनुभव केवल परमेश्वर के वरदानों के कार्यान्वयन के द्वारा ही प्राप्त होता है, जिन्हें उसने अपने पवित्र आत्मा के द्वारा हमें दिया है।
सातवाँ, पवित्र आत्मा संसार भर में साक्षी होने के लिए सामर्थ्य प्रदान करता है। पुनरुत्थित ख्रीष्ट ने इसकी प्रतिज्ञा की थी: “जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ्य पाओगे, और पृथ्वी की छोर तक तुम मेरे साक्षी होगे” (प्रेरितों के काम 1:8)। पवित्र आत्मा पिन्तेकुस्त का दिन आया, और तब से संसार के लिए साक्षी देने की उसकी सामर्थ्य निरन्तर विद्यमान रही है। दो हज़ार वर्षों से, मसीही सुसमाचार प्रत्येक महाद्वीप और प्रत्येक देश में फैलता चला आ रहा है।
परमेश्वर के आत्मा के हमारे जीवन में आने के द्वारा हमें न केवल स्थानीय स्टर पर साक्षी, वरन् संसार-व्यापी साक्षी देने की सामर्थ्य मिलती है, और यह साक्षी हमारी प्रार्थना के द्वारा, हमारी साक्षी देने के द्वारा, हमारी भेंट देने के द्वारा और हमारे जाने के द्वारा प्रकट होती है। ख्रीष्ट की आत्मा के सामर्थ्य से सम्पूर्ण संसार के लिए साक्षी बनने का साधन बनना कितना बड़ा सौभाग्य है।
निश्चय ही, पवित्र आत्मा बाहर भी और भीतर भी महान् कार्य करता है। उसके सामर्थ्यशाली कार्यों की उचित समझ हमारे भीतर आज्ञाकारिता और स्तुति की भावना उत्पन्न करनी चाहिए, क्योंकि उसका कार्य केवल कभी-कभार विश्वासियों की सभाओं में स्वतःस्फूर्त वचनों को प्रेरित करने तक सीमित नहीं है। सृष्टि, छुटकारा और पूर्णता, ये सभी पवित्र आत्मा के अद्भुत कार्य का ही भाग हैं।
यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

