Is Marriage Eternal?

क्या विवाह अनन्तकाल तक बना रहता है ?

27 अगस्त 2026
Is Marriage Eternal?

क्या विवाह अनन्तकाल तक बना रहता है ?

27 अगस्त 2026

क्या मरियम निष्पाप जन्मी थीं?

Was Mary Born Without Sin?

कठिन प्रश्नों के लिए जटिल उत्तरों की आवश्यकता होती है। “क्या मरियम निष्पाप जन्मी थीं?” यह कोई कठिन प्रश्न नहीं है, और इसका उत्तर बहुत ही सीधा है: नहीं। पूर्ण विराम । बाइबल स्पष्ट रूप से कहती है: “कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं” (रोमियों 3:10)। मरियम इसका अपवाद नहीं है। आगे पौलुस तर्क देता है कि “एक मनुष्य के द्वारा पाप ने जगत में प्रवेश किया, तथा पाप के द्वारा मृत्यु आई, उसी प्रकार मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, क्योंकि सब ने पाप किया” (रोमियों 5:12)।

यदि केवल बाइबल ही आधार होता, तो यह लेख यहीं समाप्त हो जाता। परन्तु, क्योंकि रोमन कैथोलिक कलीसिया पवित्रशास्त्र को सर्वोच्च अधिकार के रूप में स्वीकार नहीं करती, इसलिए वह जो उत्तर देती है, वह इससे बहुत भिन्न है। 

प्रत्येक वर्ष 8 दिसम्बर को, मरियम के निष्कलंक गर्भधारण (Immaculate Conception) का पर्व मनाया जाता है। इस अवसर पर, रोमन कैथोलिक कलीसिया इस विश्वास का स्मरण करती है कि स्वयं मरियम को मूल पाप से सुरक्षित रखा गया था। यह विचार शताब्दियों से रोमन कैथोलिक शिक्षा और भक्ति-प्रथाओं का भाग रहा था, परन्तु  1854 में पोप पायस IX ने निष्कलंक गर्भ-धारण को आधिकारिक रूप से एक निश्चित धर्मसिद्धान्त घोषित किया, जिससे यह रोमन कैथोलिक कलीसिया के लिए बाध्यकारी तथा अपरिवर्तनीय विश्वास बन गया।

पोप के धर्मादेश-पत्र इनेफाबिलिस देउस (Ineffabilis Deus) में दिए गए इस धर्मसिद्धान्त के ठीक शब्द ये हैं: 

“हम घोषणा करते हैं, निर्णय सुनाते हैं और परिभाषित करते हैं कि यह धर्मसिद्धान्त, जो दावा करता है कि धन्य कुँवारी मरियम, अपने गर्भधारण के प्रथम क्षण से ही सर्वसामर्थी परमेश्वर के एक विशिष्ट अनुग्रह और विशेषाधिकार के द्वारा, तथा मानवजाति के उद्धारकर्ता यीशु ख्रीष्ट के गुणों को ध्यान में रखते हुए, मूल पाप के प्रत्येक कलंक से सुरक्षित रखी गई थी, यह परमेश्वर द्वारा प्रकट किया गया धर्मसिद्धान्त है, इसी कारण सभी विश्वासियों के लिए इसे दृढ़ता और निरन्तरता से मानना आवश्यक है।”

इस घोषणा, परिभाषा और प्रतिपादन की दृढ़ तथा निर्णायक भाषा के बावजूद, मरियम से सम्बन्धित इस धर्मसिद्धान्त को बाइबल के दृष्टिकोण से स्वीकार करना कठिन है। बाइबल में इस विश्वास के समर्थन में एक संकेत तक नहीं मिलता। यदि परमेश्वर का वचन इस विषय पर मौन है, तो ऐसे विचार को अनिवार्य धर्मसिद्धान्त का दर्जा कैसे दिया जा सकता है?

यह सुनना सदैव रोचक होता है कि रोमन कैथोलिक ईश्वरविज्ञान किस प्रकार मरियम के निष्कलंक गर्भधारण के पक्ष में बाइबल से तर्क प्रस्तुत करने का प्रयास करता है। इस सन्दर्भ में एक महत्वपूर्ण उदाहरण 8 दिसम्बर 2016 को पोप फ्रांसिस द्वारा दिए गए भाषण में देखने को मिलता है। अपने भाषण में, पोप ने कहा कि यीशु एक “पूर्ण विकसित और दृढ़” वयस्क के रूप में नहीं आए, वरन् उसने “मनुष्य के जीवन-यात्रा का अनुसरण करने” का निर्णय लिया और “प्रत्येक बात में हमारे समान बना, केवल एक बात को छोड़कर—पाप।” इसी कारण, उनके अनुसार, उसने मरियम को चुना, जो “एकमात्र निष्पाप और निष्कलंक प्राणी” थी। उन्होंने यह भी कहा कि जब स्वर्गदूत मरियम को सम्बोधित करता है, तो “उसे ‘अनुग्रह से परिपूर्ण’ कहा जाता है। पोप ने इसका अर्थ यह निकाला कि आरम्भ से ही उनके भीतर “पाप के लिए कोई स्थान नहीं” था। फिर उसने कहा, जब हम उसकी ओर देखते हैं, तब हम भी इस सुन्दरता को पहचानते हैं: हम उसे ‘अनुग्रह से परिपूर्ण’ कहकर पुकारते हैं, जिसमें बुराई की कोई छाया नहीं है।”

पोप जिस बाइबलीय सन्दर्भ का उल्लेख करते है, वह लूका 1:28 है, जहाँ स्वर्गदूत जिब्राईल मरियम को “प्रभु की कृपापात्री” कहकर सम्बोधित करता है। चौथी शताब्दी के उत्तरार्ध में अनुवादित लैटिन वल्गेट बाइबल ने इस अभिव्यक्ति का अनुवाद अनुग्रह से परिपूर्ण (“gratia plena”) किया। इससे अनेक प्रकार की भ्रान्त धारणाओं का मार्ग खुल गया  जैसे कि मरियम के भीतर स्वयं अनुग्रह की परिपूर्णता विद्यमान थी। इसी से यह निष्कर्ष निकाला गया कि वह इतनी अधिक अनुग्रह से भरी थी कि उसका मूल पाप के बिना गर्भ धारण हुआ होगा।

परन्तु  मूल पाठ में ऐसा कोई संकेत नहीं है कि मरियम अनुग्रह से “परिपूर्ण” थी और इसलिए पाप से “अन्जान” थीं। “अनुग्रह प्राप्त करने वाली” होने का अर्थ यह है कि वह परमेश्वर के अनुग्रह की एक अयोग्य प्राप्तकर्ता थी, ठीक वैसे ही जैसे हम सभी हैं। इस बात की पुष्टि इस तथ्य से होती है कि मरियम परमेश्वर को अपना “उद्धारकर्ता” कहती है (लूका 1:47)। इससे स्पष्ट होता है कि वह स्वयं को परमेश्वर के उद्धार की आवश्यकता रखने वाली समझती थी, ठीक वैसे ही जैसे सम्पूर्ण मानवजाति। उसमें ऐसा कोई अन्तर्निहित अनुग्रह नहीं था जो परमेश्वर के दैवीय अनुग्रह और उसके साथ उसकी उपस्थिति से अलग होकर विद्यमान हो।

इसलिए ऐसा प्रतीत होता है कि मरियम के निष्कलंक गर्भधारण के पक्ष में दिया गया तर्क उस पद के एक त्रुटिपूर्ण अनुवाद पर आधारित है। इसके परिणामस्वरूप  एक ऐसा धर्मसिद्धान्त सामने आता है जो मनुष्य के स्वभाव और उद्धार से सम्बंधित बाइबिल की शिक्षाओं को प्रभावित करता है तथा बाइबलीय  सुसमाचार के मूल सन्देश को ही विचलित करता है। पवित्रशास्त्र की यह स्पष्ट शिक्षा है कि “सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं” (रोमियों 3:23)।किसी के लिए किसी विशेष व्यवस्था का कोई उल्लेख नहीं है। मरियम को पाप से “सुरक्षित रखे जाने” के द्वारा उद्धार नहीं मिला। वह हर दूसरे मनुष्य के समान पापी थी, और उसके पाप का प्रायश्चित्त पुत्र के द्वारा किया गया, क्योंकि वह उस पतित मानवजाति का भाग थी जिसने आदम का पाप विरासत में पाया था। यीशु नया आदम है, जो पापरहित जन्मा, जिससे कि आदम की पापी सन्तान का उद्धार करे—और इसमें मरियम भी सम्मिलित है।

यह तथ्य कि रोमन कैथोलिक कलीसिया आज भी मरियम के निष्कलंक गर्भधारण के धर्मसिद्धान्त को दृढ़ता से मानती है, उन सभी लोगों के लिए एक गम्भीर प्रश्न बना हुआ है जो अपने विश्वास को बाइबल की शिक्षाओं पर आधारित करना चाहते हैं। रोमन कैथोलिक मत, विशेष रूप से अपनी विकसित मरियम-विज्ञान, केवल पवित्रशास्त्र पर आधारित नहीं है, वरन ऐसी परम्पराओं और भक्ति-प्रथाओं पर आधारित है जो अन्ततः बाइबल से ऊपर—और कभी-कभी उसके विपरीत—अन्तिम अधिकार का स्थान ले लेती हैं।

 यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।