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अब्राहम कौन था?

Who Was Abraham?

लगभग 2000 ईसा पूर्व के समय में जीवित रहने वाला कुलपिता अब्राहम बाइबल के इतिहास के सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों में से एक है। उसे असाधारण विश्वास वाले व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है, और वह परमेश्वर की उद्धार-योजना का एक केन्द्रीय पात्र है। उत्पत्ति में वर्णित धर्मी पितृवंश का एक अभिन्न सदस्य होने के नाते, वह उन ईश्वरीय प्रतिज्ञाओं का प्राप्तकर्ता है जो एक राजवंश की स्थापना के द्वारा सभी  जातियों पर आने वाले आशीष की ओर संकेत करती थीं, और जिनकी परिपूर्णता यीशु ख्रीष्ट के आगमन में हुई।

ईश्वरीय प्रतिज्ञाओं द्वारा आकार पाया हुआ अब्राहम का जीवन

अब्राहम की कहानी उत्पत्ति 11 से आरम्भ होती है, जहाँ वह तेरह के पुत्र अब्राम के नाम से जाना जाता है और कसदियों के ऊर में रहता है। जब परमेश्वर उसे बुलाता है, तब अब्राम एक ऐसी यात्रा पर निकल पड़ता है जिसका सम्पूर्ण मानवजाति के लिए गहरा महत्त्व था। यह विशेष बुलाहट, जिसका वर्णन उत्पत्ति 12:1–3 में किया गया है, इस अद्भुत आश्वासन पर पहुँचकर चरम पर पहुँचती है कि पृथ्वी के सभी कुल अब्राम के द्वारा आशीष पाएँगे।

विश्वासयोग्य आज्ञाकारिता में, अब्राहम अपने परिचित परिवेश को छोड़कर अज्ञात देश की ओर निकल पड़ता है। यही परमेश्वर के साथ उसके गहरे सम्बन्ध का आरम्भ था। भविष्यद्वक्ता यशायाह के द्वारा परमेश्वर इस कुलपिता को स्नेहपूर्वक “मेरा मित्र अब्राहम” कहकर सम्बोधित करता है (यशा 41:8)।

अब्राहम के जीवन की कहानी चुनौतियों, यात्राओं और ईश्वरीय भेंटों से परिपूर्ण है। वह कनान की यात्रा करता है, अकाल का सामना करता है, मिस्र में प्रवास करता है, और आसपास के लोगों के साथ जटिल सम्बन्धों से होकर गुजरता है। वह राजाओं के सम्पर्क में आता है, फिर भी अर्ध-घुमन्तू जीवन व्यतीत करता है, जिसके कारण इब्रानियों का लेखक कहता है कि अब्राहम “वह उस स्थिर नींव वाले नगर की प्रतीक्षा में था जिस का रचने और बनाने वाला परमेश्वर है” (इब्रा. 11:10)।

उसकी पत्नी सारै (जिसका बाद में नाम सारा रखा गया) बाँझपन का सामना करती है, और इस कारण उनके जीवन में तनाव तथा गहरा दुःख उत्पन्न हुआ। परमेश्वर अब्राहम को आश्वासन देता है कि उसके वंशज आकाश के तारों के समान असंख्य होंगे और अन्ततः कनान देश के अधिकारी होंगे (उत्प. 15)। किन्तु वर्षों बीत जाने पर भी सारै निःसन्तान रहती है। अधीर होकर सारै अपनी दासी हाजिरा को अब्राम को दे देती है, और उसके द्वारा इश्माएल उत्पन्न होता है (उत्प. 16)। फिर भी, परमेश्वर पुष्टि करता है कि अब्राहम का वास्तविक उत्तराधिकारी सारा के द्वारा ही होगा।

इसहाक अर्थात् प्रतिज्ञा के पुत्र का जन्म उत्पत्ति की पुस्तक में एक निर्णायक घटना है। परन्तु इसके बाद परमेश्वर ने अब्राहम से इसहाक को बलिदान करने की आज्ञा देकर उसके विश्वास की परीक्षा ली (उत्प. 22)। ऐसी हृदयविदारक आज्ञा के होते हुए भी आज्ञा मानने की उसकी तत्परता परमेश्वर पर उसके भरोसे को प्रकट करती है। अन्तिम क्षण में परमेश्वर हस्तक्षेप करता है, बलिदान के लिए एक मेढ़ा उपलब्ध कराता है, और अब्राहम के साथ अपनी वाचा की पुष्टि करता है कि पृथ्वी की सब जातियाँ उसकी सन्तान में से एक के  द्वारा आशीष पाएँगी (उत्प. 22:18)।

अब्राहम का जीवन त्रुटियों से रहित नहीं था। उत्पत्ति की पुस्तक उसकी शंकाओं, छल और नैतिक अस्पष्टता के प्रसंगों का भी वर्णन करती है। फिर भी परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर उसका अटल विश्वास ही उसकी स्थायी विरासत की सबसे प्रमुख विशेषता है।

बहुत-सी जातियों का पिता: खतने की वाचा

अब्राहम के जीवन में परमेश्वर के साथ हुई सबसे महत्त्वपूर्ण घटनाओं में से एक खतने की वाचा की स्थापना है (उत्प. 17)। इस वाचा का केन्द्र परमेश्वर की यह प्रतिज्ञा है कि वह अब्राहम को “बहुत-सी जातियों का पिता” बनाएगा, जो एक ऐसी प्रतिज्ञा है जिसमें राजकीय अर्थ निहित हैं। इससे पहले परमेश्वर एक अन्य वाचा के द्वारा यह सुनिश्चित कर चुका था कि अब्राहम एक जाति का पिता होगा, और उसके शारीरिक वंशज कनान देश के अधिकारी होंगे (उत्प. 15)। उल्लेखनीय बात यह है कि खतने की वाचा अब्राहम के पितृत्व के अर्थ का विस्तार करती है, जिससे कि उसमें रूपकात्मक रूप से अनेक जातियाँ भी सम्मिलित हो जाएँ। वह उनका आत्मिक पिता होगा। जिन लोगों का विश्वास अब्राहम के समान है, वे उसके सन्तान हैं (गलातियों 3:1–9)। 

उत्पत्ति 17 में परमेश्वर अब्राहम को आज्ञा देता है कि वह अपने घर के प्रत्येक पुरुष का, यहाँ तक कि विदेशियों से मोल लिए गए दासों का भी, खतना करे, क्योंकि यह “वाचा का चिन्ह” होगा (उत्प. 17:10–14)। उत्पत्ति के आरम्भिक अध्यायों की पृष्ठभूमि में देखें, तो खतना परमेश्वर की उस प्रतिज्ञा का निरन्तर स्मरण कराता है कि अब्राहम, इसहाक और याकूब के द्वारा चलने वाला यह विशिष्ट वंश अन्ततः ऐसे राजा में परिपूर्ण होगा जो बुराई की शक्तियों पर विजय प्राप्त करेगा और पृथ्वी पर परमेश्वर के राज्य की स्थापना करके जातियों को आशीष देगा। इन बातों को ध्यान में रखते हुए, मत्ती का सुसमाचार इस बात पर बल देता है कि अब्राहम से की गई प्रतिज्ञाएँ यीशु में पूरी होती हैं, क्योंकि वह अपने सुसमाचार का आरम्भ एक राजवंशीय वंशावली से करता है जो अब्राहम तक पहुँचती है (मत्ती 1:1–17)।

विश्वास के द्वारा धार्मिकता: अब्राहम की स्थायी विरासत

अब्राहम के जीवन का विवरण विश्वास के द्वारा अभ्यारोपित धार्मिकता की अवधारणा को स्पष्ट करता है। उत्पत्ति 15:6 घोषित करती है, “तब उसने यहोवा पर विश्वास किया और इसे यहोवा ने उसके लिए धार्मिकता गिना।” यह पद बाद के ईश्वरविज्ञानिक चिन्तन की आधारशिला बन जाता है, विशेषकर पौलुस के लेखनों में, जहाँ अब्राहम को विश्वास के आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया गया है (रोमियों 4)।

यह अब्राहम की उपलब्धियाँ या उसकी सिद्धता नहीं थीं जिन्होंने परमेश्वर के सामने उसकी धार्मिक स्थिति को सुनिश्चित किया, परन्तु परमेश्वर के वचन पर उसका भरोसा और उसके अनुसार कार्य करने की उसकी तत्परता थी। व्यवस्था के पालन के स्थान पर विश्वास पर आधारित धार्मिकता की यह गहन समझ, यीशु ख्रीष्ट के अनुयायियों के लिए आज भी एक मार्गदर्शक सिद्धान्त बनी हुई है।

फिर भी, अब्राहम का विश्वास निष्क्रिय नहीं था; उसने उसे धार्मिकता के कार्य करने के लिए प्रेरित किया। अपनी मातृभूमि छोड़ने की उसकी तत्परता, अदृश्य प्रतिज्ञाओं पर भरोसा करना, और परमेश्वर की आज्ञा पर अपने प्रिय पुत्र को अर्पित करने की उसकी तैयारी ऐसे विश्वास को प्रकट करती है जो अपने कार्यों के द्वारा स्पष्ट दिखाई देता है (याकूब 2:20–24 देखें)। अब्राहम केवल विश्वास के द्वारा आरोपित धार्मिकता का ही नहीं, परन्तु परमेश्वर की आज्ञाओं के प्रति विश्वास-प्रेरित आज्ञाकारिता से आकार पाए जीवन का भी आदर्श है।

निष्कर्ष

अब्राहम ऐसा व्यक्ति है जिसका जीवन स्थायी महत्त्व रखता है। उसकी कहानी केवल अतीत की एक घटना नहीं है; यह परमेश्वर और उस कुलपिता के बीच के सम्बन्ध का वर्णन है जिसने संसार के लिए परमेश्वर की उद्धार की योजना में एक प्रमुख भूमिका निभाई। यीशु ख्रीष्ट में पूरी होने वाली ईश्वरीय प्रतिज्ञाओं का प्राप्तकर्ता और विश्वास के द्वारा प्राप्त धार्मिकता का आदर्श होने के कारण, अब्राहम की विरासत आज भी प्रत्येक गोत्र, भाषा और जाति के असंख्य लोगों को प्रेरित करती है, उन्हें चुनौती देती है, और उन्हें एक करती है।

 यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

टी. डेसमंड अलेक्ज़ेंडर

टी. डेसमंड अलेक्ज़ेंडर

डॉ. टी. डेसमंड अलेक्ज़ेंडर उत्तरी आयरलैंड के बेलफ़ास्ट स्थित यूनियन थियोलॉजिकल कॉलेज में बाइबिल अध्ययन के वरिष्ठ शोधकर्ता हैं। वे द न्यू डिक्शनरी ऑफ बिब्लिकल थियोलॉजी के सह-संपादक हैं।