
बपतिस्मा क्यों महत्वपूर्ण है?
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क्यों प्रचार एक अनुग्रह का साधन है?
7 अगस्त 2025बपतिस्मा अनुग्रह का एक साधन क्यों है?
-निक बैट्ज़िग
एक मसीही परिवार एक बार दिवंगत डॉ. जॉन गर्स्टनर के पास आया और उनसे अपने नवजात शिशु को बपतिस्मा देने का अनुरोध किया। जब बपतिस्मा का समय निकट आया, तो बच्चे की माँ ने आग्रह किया कि क्या वे तब तक प्रतीक्षा कर सकते हैं जब तक वह बच्चे के लिए श्वते गाउन न ले आए। गर्स्टनर ने उस माँ से पूछा कि श्वेत गाउन का क्या महत्व है। माँ ने उत्तर दिया, “यह शिशु की निर्दोषता का प्रतीक है।” गर्स्टनर ने प्रत्युत्तर दिया, “यदि शिशु निर्दोष है, तो हम उसका बपतिस्मा क्यों कर रहे हैं?” यह छोटी सी कहानी बपतिस्मा की प्रकृति को लेकर व्याप्त भ्रम को दर्शाती है।
बहुत से लोग बपतिस्मा को मात्र एक धार्मिक और अनुष्ठानिक संस्कार मानते हैं। वहीं, कुछ लोग बपतिस्मे के बाहरी कार्य के रूप में इसे अत्यधिक प्रभावी मानते हैं, यह सोचते हुए कि यह हर एक बपतिस्मा लेने वाले को बचाने वाला अनुग्रह प्रदान करता है। सत्यता तो यह है कि बपतिस्मा एक साथ सरल और जटिल दोनों है। यह सरल है क्योंकि यह त्रिएक परमेश्वर के नाम में किया गया एक जल शुद्धिकरण है, जिसे प्रभु यीशु ने शिष्यता की पहचान के रूप में स्थापित किया है। परन्तु यह जटिल भी है, क्योंकि इसकी प्रकृति, उसके पात्रों और उसकी प्रभावकारिता के सटीक अर्थ पर विचार करना आवश्यक है। यदि हमें समझना है कि बपतिस्मा परमेश्वर के लोगों के जीवन में कैसे कार्य करता है, तो सबसे पहले हमें इसके मूल स्वभाव को समझना होगा।
बपतिस्मा पुराने नियम के खतना के समकक्ष, अनुग्रह की वाचा का एक चिह्न और मुहर है (रोमियों 4:11), जो ख्रीष्ट में विश्वास के द्वारा परमेश्वर की धार्मिकता के दिए जाने की प्रतिज्ञा की ओर संकेत करता है। यह एक चिह्न है जो स्वयं से परे पवित्र आत्मा की प्रतिज्ञा किए गए पुनरुज्जी वन और ख्रीष्ट के लहू द्वारा शुद्धिकरण की ओर संकेत करता है। यह एक मुहर है जिसके द्वारा परमेश्वर विश्वासियों और उनके बच्चों से इस प्रतिज्ञा की सत्यता की पुष्टि करता है। मसीही बपतिस्मा परमेश्वर द्वारा नियुक्त एक चिन्ह और परमेश्वर की वाचा की प्रतिज्ञाओं की मुहर है। यह बपतिस्मा को अनुग्रह का साधन बनाता है।
जब हम बपतिस्मा को अनुग्रह का साधन मानते हैं, तो हमें सबसे पहले इसे एक ईश्वरीय कार्य के रूप में पहचानना होगा। त्रिएक परमेश्वर इस चिह्न और मुहर को नये नियम में अपने लोगों पर लागू करता है। कई लोग बपतिस्मा को सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण, कुछ ऐसा करने का एक संकेत मानते हैं जो उन्होंने किया है (अर्थात्, ख्रीष्ट में अपने व्यक्तिगत विश्वास की घोषणा का एक बाहरी चिन्ह)। इसी कारण से, कई लोग बपतिस्मा को “आन्तरिक विश्वास की बाहरी अभिव्यक्ति” कहते हैं। यद्यपि विश्वासी और उनके बच्चे इसे यीशु की आज्ञा का पालन करते हुए शिष्य की पहचान के रूप में प्राप्त करते हैं (मत्ती 28:18–20; 1 कुरिन्थियों 7:14), फिर भी वाचा का यह चिह्न मुख्य रूप से हमारे कार्य की ओर संकेत नहीं करता है। वरन् यह उस कार्य की ओर संकेत करता है जो परमेश्वर ने ख्रीष्ट में आत्मा के द्वारा करने की प्रतिज्ञा की है। यदि हम यह समझना चाहते हैं कि बपतिस्मा अनुग्रह के साधन के रूप में किस प्रकार कार्य करता है, तो इसके विषय में निश्चित समझ प्राप्त करना अत्यन्त महत्वपूर्ण है।
बपतिस्मा नई वाचा के समुदाय में प्रवेश करने का चिह्न है। जब कोई व्यक्ति बपतिस्मा का चिह्न प्राप्त करता है, तो परमेश्वर उसे दृश्यमान कलीसिया की सीमा में ले आता है। इस प्रकार, वे संसार से अलग कर दिए जाते हैं और एक आराधना करने वाले समुदाय के सदस्य बना दिए जाते हैं, जो परमेश्वर के वचन, कलीसियाई विधियों और कलीसियाई अनुशासन की सेवकाई के अधीन एक साथ जीवन व्यतीत करते हैं। इसका यह अर्थ नहीं है कि जो कोई भी बपतिस्मा प्राप्त करता है, वह अनिवार्य रूप से उस अनुग्रह का भागी होता है, जो इस चिह्न और मुहर में प्रदर्शित होता है। यह पूर्णतः सम्भव है कि कोई व्यक्ति इस चिह्न को धारण करे, फिर भी उस वास्तविकता का सहभागी न हो, जिसका यह संकेत देता है। यह जादूगर शमौन की घटना (प्रेरितों के काम 8:9–24) से स्पष्ट होता है। फिर भी, बपतिस्मा अपने नई वाचा के समकक्ष प्रभु भोज के जैसे है, यह केवल एक निरर्थक चिह्न नहीं है। यह वास्तव में परमेश्वर का अनुग्रह उन लोगों को प्रदान करता है, जिनके लिए यह नियत किया गया है—अर्थात्, चुने हुए विश्वासियों को। जैसा कि वेस्टमिंस्टर कन्फेशन ऑफ़ फेथ (28.6) में कहा गया है –
बपतिस्मे की प्रभावकारिता उस क्षण पर निर्भर नहीं करती जब इसे सम्पन्न किया जाता है; फिर भी, इस विधि के सही उपयोग के माध्यम से प्रतिज्ञात अनुग्रह न केवल दिया जाता है, किन्तु वास्तव में प्रदर्शित किया जाता है और पवित्र आत्मा के द्वारा उन लोगों (चाहे वे वयस्क हों या शिशु) को प्रदान किया जाता है, जिनके लिए यह अनुग्रह परमेश्वर की अपनी इच्छा की योजना के अनुसार, उसके ठहराए गए समय में निर्धारित किया गया है।
वेस्टमिंस्टर सभा के सदस्यों ने बपतिस्मे की प्रभावकारिता से सम्बन्धित इन सैध्दान्तिक विवरणों में कई महत्वपूर्ण चेतावनियों को सम्मिलित किया। सर्वप्रथम, वे समझाते हैं कि बपतिस्मे की प्रभावकारिता उसके सम्पन्न होने के क्षण से बँधी नहीं होती। कलीसियाई विधियाँ अपने आप सभी प्राप्तकर्ताओं को अनुग्रह प्रदान नहीं करती हैं। दूसरी बात, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि बपतिस्मा की विधि केवल पवित्र आत्मा के कार्य के द्वारा ही अनुग्रह प्रदान करती है। जब तक पवित्र आत्मा सम्प्रभु रूप से आत्मिक पुनरुज्जीवन और प्रदीपन प्रदान नहीं करता, तब तक वचन और कलीसियाई विधियाँ किसी व्यक्ति को परमेश्वर का अनुग्रह नहीं प्रदान करेंगे। तीसरी बात, बपतिस्मे की प्रभावकारिता केवल उन्हीं लोगों (चाहे वे वयस्क हों या शिशु) पर लागू होती है, जिनके लिए यह अनुग्रह निर्धारित है। वेस्टमिंस्टर के ईश्वरविज्ञानियों ने यह स्पष्ट किया कि यह केवल चुने हुए लोग हैं जिन्हें बपतिस्में में परमेश्वर का अनुग्रह प्रदान किया जाता है।
अनुग्रह के एक साधन के रूप में, बपतिस्मा पवित्र आत्मा के सम्प्रभु पुनरुज्जीवन के द्वारा चुने हुओं के जीवन में प्रभाकारी होता है। यह किसी व्यक्ति के जीवन में “चाहे वह वयस्क हो या शिशु” कभी भी हो सकता है। परन्तु, यह पुनरुज्जीवन चुने हुए लोगों के जीवन में परमेश्वर के आत्मा के द्वारा उनके हृदयों में किए गए स्वतंत्र और अनुग्रह के उस कार्य के द्वारा होता है जिसके हम योग्य नहीं है। यदि कोई व्यक्ति त्रिएक परमेश्वर के नाम में शिशु अवस्था में बपतिस्मा प्राप्त करता है, परन्तु वह बचाने वाले विश्वास और पश्चाताप तक वयस्क होने के बाद ही पहुँचा, तो यह कहना उचित होगा कि उसका “बपतिस्मा उसके पश्चाताप के समय प्रभावकारी हुआ”––इसलिए नहीं कि पश्चाताप और विश्वास में कोई सामर्थ है, परन्तु परमेश्वर के आत्मा के अनुग्रहपूर्ण कार्य के कारण जो क्रूसित और पुनरुत्थित हुए ख्रीष्ट के कार्य को उनके आत्माओं पर लागू कर रहा था।
यह लेख ख्रीष्टीय शिष्योन्नति की मूल बातें संग्रह का भाग है।
यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

