
मसीही शिष्यता क्या है?
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– डेरिक ब्राइट
बपतिस्मा प्रारम्भ से ही मसीही विश्वास के केन्द्र में रहा है। परन्तु बपतिस्मा की जड़ें नए नियम की कलीसिया की स्थापना से कहीं अधिक गहरी हैं। वे पुराने नियम और उस वाचा में गहराई से जुड़ी है जो परमेश्वर ने अपने लोगों के साथ बाँधी थी। वस्तुतः, यदि हम पुराने नियम के चिन्हों और मुहरों समझ नहीं रखते हैं, तो हम नई वाचा के बपतिस्मा को सही ढँग से नहीं समझ सकते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो, वाचा को पूरा करने वाले परमेश्वर ने अपने लोगों को आरम्भ से ही दृश्यमान संकेत और चिन्ह दिए हैं, जो अदन की वाटिका के दो वृक्षों से आरम्भ होता है। परन्तु दुर्भाग्य से आज हम एक ऐसे यूग में जी रहे हैं जहाँ बाइबल सम्बन्धी अज्ञानता बहुत बढ़ गई है। परमेश्वर के स्वभाव से लेकर मनुष्य के बारे बाइबलिय समझ तक, और हाँ, यहाँ तक कि बपतिस्मा के विषय में भी, बाइबल क्या कहती है, इस बारे में बहुत अधिक भ्रम व्याप्त है। ऐसे में यह और भी आवश्यक हो जाता है कि हम यह जानें कि बपतिस्मा क्या है जिससे कि हम समझ सकें कि यह क्यों महत्वपूर्ण है और यह मसीही लोगों के लिए कैसे अनिवार्य है।
चिन्ह और मुहर
सबसे पहले, बपतिस्मा परमेश्वर द्वारा अपनी प्रजा के साथ बाँधी गई वाचा का एक चिन्ह और मुहर है। यह एक बड़ी वास्तविकता की ओर एक दृश्यमान संकेत है। आरम्भ में परमेश्वर ने उत्पत्ति 17 में अब्राहम को खतने का वाचा-चिन्ह दिया था। शरीर के माँस को काटने का यह कार्य परमेश्वर के वाचा के लोगों को चिन्हित करता था और उन्हें उन प्रतिज्ञाओं का स्मरण कराता था जो परमेश्वर ने उनसे की थी। फिर भी, उत्पत्ति 17:10 में, परमेश्वर स्वयं खतना को “मेरी वाचा” कहता है। जैसे प्रभु यीशु ने, जब उसने प्रभु भोज की स्थापन करते समय दाखरस उण्डेला और कहा कि, “यह वाचा का मेरा लहू है” (मत्ती 26:28)। न तो खतना और न ही दाखरस स्वयं में वाचा थे, परन्तु वे वाचा की सच्चाई की ओर संकेत करते थे। संकेत और संकेतित वस्तु (जिसे वेस्टमिंस्टर कॉन्फेशन ऑफ़ फेथ 27.2 “संस्कारिक मिलन” कहता है) के बीच इतना घनिष्ठ सम्बन्ध होता है कि हम एक बात की ओर संकेत करते है और दूसरे का अर्थ निकल जाता है।
इसे हम विवाह की अँगूठी के उदाहरण से समझ सकते हैं। विवाह की अँगूठी स्वयं में विवाह नहीं है, वरन् यह इस बात का संकेत है कि इसे पहनने वाला व्यक्ति विवाहित है। यह अँगूठी एक दृश्य अनुस्मारक के रूप में कार्य करती है कि विवाहित व्यक्ति अपना नहीं है, वरन् किसी और का हो चुका है। बपतिस्मा के साथ भी ऐसा ही है। बपतिस्मा में हमें नई वाचा के लोगों का चिन्ह दिया जाता है, जो उस त्रिएक परमेश्वर के साथ हमारे वाचाई के सम्बन्ध की ओर संकेत करता है, जिसके हम हैं। मसीही लोग त्रिएक परमेश्वर के हैं, और जो उसके हैं उन्हें उसका चिन्ह धारण करने की आवश्यकता है।
एक नया नाम
बपतिस्मा में जिन लोगों ने इस वाचा-चिन्ह को प्राप्त किया है, उन्हें एक नया नाम भी प्राप्त होता है जो एक नई पहचान से सम्बन्धित होता है। बपतिस्मा में हमें जो नाम दिया जाता है वह उस व्यक्ति से मेल खाता है जिसमें हम बपतिस्मा दिया गया है। यीशु की आज्ञा पर विचार करें कि जाओ पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो (मत्ती 28:19)। प्रेरित पौलुस इस पर विचार करते हुए कहता है कि “हम सब जो बपतिस्मा के द्वारा ख्रीष्ट यीशु के साथ एक हुए, बपतिस्मा द्वारा उसकी मृत्यु में भी सहभागी हुए” (रोमियों 6:3)। गलातियों 3:27 में भी वह ऐसी ही भाषा का प्रयोग करता है। जैसे पुरानी वाचा में जब निर्गमन की घटना के समय लोगों को “मूसा का” बपतिस्मा दिया गया था (1 कुरिन्थियों 10:2), हम नए निर्गमन में “ख्रीष्ट का” बपतिस्मा लेते हैं।
इसका अर्थ यह है कि विश्वासियों की सबसे बड़ी पहचान ख्रीष्ट के साथ उनका मिलन है। हम इतनी निकटता से “ख्रीष्ट में” हैं कि यह कहा जा सकता है कि जब वह मरा, तो हम भी मर गए (गलातियों 2:20), और जब वह जी उठा और पिता के दाहिने हाथ बैठने के लिए ऊपर स्वर्ग पर चढ़ा, तो हम भी उठाए गए (इफिसियों 2:6)। आज ऐसे बहुत से लोग हैं जो अपनी पहचान को लेकर भ्रमित हैं। इसके कारण बहुत से लोग भ्रम, हताशा एवं निराशा के दलदल में फँस चुके हैं। परन्तु, प्रिय विश्वासियों, आपके ऊपर त्रिएक परमेश्वर का नाम अंकित है। आपकी पहचान यह है कि आप प्रभु यीशु ख्रीष्ट के साथ एक हैं, एक नई सृष्टि हैं जो बपतिस्मा के द्वारा उसके साथ गाड़े गए हैं और जीवन की नई चाल चलने के लिए जी उठे हैं (रोमियों 6:4-5)। हमें इस बात पर ध्यान नहीं देना चाहिए कि संसार या हमारा अपना शरीर हमारे विषय में क्या कहता है, परन्तु हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि परमेश्वर हमारे बपतिस्मा के माध्यम से हमारे विषय में क्या कहता है।
अनुग्रह का साधन
अन्त में, बपतिस्मा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अनुग्रह का साधन है। हम स्वर्गीय सिय्योन की ओर जाने वाले दुर्बल और थके हुए मसीही यात्री हैं, और हमें अपनी इस मसीही यात्रा के लिए सामर्थ्य के स्रोतों की आवश्यकता होती है। बपतिस्मा सामर्थ्य के उन्हीं स्रोतों में से एक है। परमेश्वर ने अपने लोगों को दृढ़ तथा आत्मिक पोषण के लिए कलीसिया को यह विधि दी थी। इसका अर्थ यह नहीं है कि बपतिस्मा में अपने आप में कोई सामर्थ्य है, परन्तु इसका अर्थ यह है कि पवित्र आत्मा बपतिस्मा के कार्य का उपयोग परमेश्वर के लोगों तक अनुग्रह पहुँचाने के लिए करता है, जब चिन्ह विश्वास के साथ मिलता है। बपतिस्मा ख्रीष्ट के प्रति हमारे हृदयों को प्रेम में दृढ़ करता है, जो हमें स्मरण कराता है कि जिस प्रकार जल किसी को शुद्ध करता है, उसी प्रकार ख्रीष्ट ने हमें अपने लहू से धोकर शुद्ध किया है। जब हम किसी प्राप्तकर्ता पर जल को उण्डेले जाते हुए देखते हैं तो हमारा विश्वास आश्वासन पाता है, जो हमें स्मरण कराता है कि पवित्र आत्मा हम पर उण्डेला गया है और हमारे भीतर वास करता है। परीक्षा और प्रलोभन के क्षणों में, जब शैतान हमारे सबसे दुर्बल भाग पर आक्रमण करता है, तथा हमें बताता है कि हम कभी भी बचाये नहीं जा सकते और परमेश्वर हम से कभी प्रेम नहीं कर सकता है, तो हम भरोसे से मार्टिन लूथर के शब्दों के साथ प्रतिउत्तर दे सकते हैं: “मेरा बपतिस्मा हुआ है! मेरा बपतिस्मा हुया है!”
यह लेख मसीही शिष्यता की आधारभूत बातों के संग्रह का भाग है।
यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

