डैनिएल डोरियानी, Author at लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़

लिग्निएर का ब्लॉग

हम डॉ. आर. सी. स्प्रोल का शिक्षण संघ हैं। हम इसलिए अस्तित्व में हैं ताकि हम जितने अधिक लोगों तक सम्भव हो परमेश्वर की पवित्रता को उसकी सम्पूर्णता में घोषित करें, सिखाएं और रक्षा करें। हमारा कार्य, उत्साह, और उद्देश्य है कि हम लोगों को परमेश्वर के ज्ञान और उसकी पवित्रता में बढ़ने में सहायता करें।

 
7 सितम्बर 2021

धन्य हैं वे जो धार्मिकता के भूखे और प्यासे हैं

प्रथम चार धन्य वाणी सब एक चेले की आवश्यकताओं का वर्णन करती हैं। “धन्य हैं वे जो धार्मिकता के भूखे और प्यासे हैं” शृंखला में अन्तिम है (मत्ती 5:3-6)। यीशु ने सर्वप्रथम कहा, “धन्य हैं वे जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है”(पद 3)। मन का दीन होने का अर्थ है स्वयं की आत्मिक आवश्यकता और परमेश्वर पर निर्भरता को जानना (भजन 34:6; सपन्याह 3:12)।