परमेश्वर का अदृश्य हाथ
यूसुफ को मिस्र में एक दास के समान रहते हुए जिन कठिनाइयों और संघर्षों को सहना पड़ा, उनके बावजूद, वह यह पहचानने से नहीं चूका कि उसके जीवन की हर एक घटना में सर्व-प्रभुता सम्पन्न परमेश्वर का हाथ है। उसके भाइयों के पश्चाताप के प्रत्युत्तर में, यूसुफ की प्रतिक्रिया थी, “तुमने तो मेरे साथ बुराई करने की ठानी थी, परन्तु परमेश्वर ने उसी को भलाई के लिए ले लिया।” ईश्वरीय विधान का यही विषय निर्गमन की पुस्तक के आरम्भ में दर्ज की गई घटनाओं में भी दिखाई देता है। जिस प्रकार यूसुफ के भाई उसे नाश करना चाहते थे, फिरौन ने सभी इब्रानी नर बालकों को नष्ट करना चाहा। परन्तु इसके विपरीत, परमेश्वर ने इस दुष्ट आज्ञा का उपयोग अपने सेवक मूसा को उस एक घर में रख देने के लिए किया, जहाँ पर उसे “मिस्रियों की समस्त विद्या” की शिक्षा प्राप्त हो सके (प्रेरितों 7:22)। हमारी इस श्रृंखला का यह पहला पाठ पुरानी वाचा के मध्यस्थ का परिचय प्रदान करता है और उस ऐतिहासिक सन्दर्भ को समझाता है, जिसमें परमेश्वर ने उसे रखा था।