लेख
15 जनवरी 2026
द्वारा आर.सी. स्प्रोल — 15 जनवरी 2026
भक्ति-पूर्ण सेवकाई और अगुवाई का पहला सिद्धान्त यही होना चाहिए—कि हम हमारे बोलने में, हमारे आचरण में, या हमारे दृष्टिकोण में, अपने आप को ऊँचा मानने के भाव को न अपनाएँ।
13 जनवरी 2026
द्वारा आर.सी. स्प्रोल — 13 जनवरी 2026
जब हम नये नियम में ख्रीष्ट के छुटकारे के कार्य को समझते हैं, तो हम मुख्यतः उसके दो पक्षों पर ध्यान केन्द्रित करते हैं। एक ओर, हम प्रायश्चित को देखते हैं। नया नियम स्पष्ट करता है कि प्रायश्चित्त में यीशु अपने लोगों के पापों को उठाता है और हमारे स्थान पर उनके लिए दण्ड भोगता है।
8 जनवरी 2026
द्वारा आर.सी. स्प्रोल — 8 जनवरी 2026
जब कलीसिया यह अंगीकार करती है कि परमेश्वर की धार्मिकता के सन्तुष्ट होने की आवश्यकता है, तो यह आवश्यकता कोई ऐसी बात नहीं है जो परमेश्वर पर बाहर से लादी गई हो, वरन् यह आवश्यकता उसके अपने ही चरित्र और स्वभाव से उत्पन्न होती है।
लेख
15 जनवरी 2026
द्वारा आर.सी. स्प्रोल — 15 जनवरी 2026
भक्ति-पूर्ण सेवकाई और अगुवाई का पहला सिद्धान्त यही होना चाहिए—कि हम हमारे बोलने में, हमारे आचरण में, या हमारे दृष्टिकोण में, अपने आप को ऊँचा मानने के भाव को न अपनाएँ।
13 जनवरी 2026
द्वारा आर.सी. स्प्रोल — 13 जनवरी 2026
जब हम नये नियम में ख्रीष्ट के छुटकारे के कार्य को समझते हैं, तो हम मुख्यतः उसके दो पक्षों पर ध्यान केन्द्रित करते हैं। एक ओर, हम प्रायश्चित को देखते हैं। नया नियम स्पष्ट करता है कि प्रायश्चित्त में यीशु अपने लोगों के पापों को उठाता है और हमारे स्थान पर उनके लिए दण्ड भोगता है।




