लेख
22 अक्टूबर 2026
द्वारा किम रिडलबर्गर — 22 अक्टूबर 2026
विश्वासी की मृत्यु के बाद आत्मा तुरन्त प्रभु की उपस्थिति में जाती है, जहाँ वह परमेश्वर की आराधना और स्तुति करती हुई शरीर के पुनरुत्थान की प्रतीक्षा करती है। इसलिए मृत्यु का सामना ख्रीष्ट की सामर्थ्य और अनन्त जीवन की आशा के भरोसे के साथ किया जा सकता है।
20 अक्टूबर 2026
द्वारा कैरी हैन — 20 अक्टूबर 2026
मनुष्य का मुख्य उद्देश्य परमेश्वर की महिमा करना और उसमें आनन्दित रहना है। बाइबल सिखाती है कि जीवन की सच्ची सार्थकता सृष्टिकर्ता को जानने, उसकी आज्ञाओं का पालन करने और दैनिक कार्यों में भी उसके साथ संगति रखने में मिलती है।
15 अक्टूबर 2026
द्वारा रॉर्बट रॉथवेल — 15 अक्टूबर 2026
सच्चा पश्चात्ताप पाप के परिणामों पर मात्र दुखी होना नहीं, बल्कि पाप को परमेश्वर के विरुद्ध अपराध मानना, ख्रीष्ट की दया पर भरोसा करना, उससे फिरना और उसकी आज्ञाकारिता में नया जीवन जीने का प्रयास करना है।
लेख
22 अक्टूबर 2026
द्वारा किम रिडलबर्गर — 22 अक्टूबर 2026
विश्वासी की मृत्यु के बाद आत्मा तुरन्त प्रभु की उपस्थिति में जाती है, जहाँ वह परमेश्वर की आराधना और स्तुति करती हुई शरीर के पुनरुत्थान की प्रतीक्षा करती है। इसलिए मृत्यु का सामना ख्रीष्ट की सामर्थ्य और अनन्त जीवन की आशा के भरोसे के साथ किया जा सकता है।
20 अक्टूबर 2026
द्वारा कैरी हैन — 20 अक्टूबर 2026
मनुष्य का मुख्य उद्देश्य परमेश्वर की महिमा करना और उसमें आनन्दित रहना है। बाइबल सिखाती है कि जीवन की सच्ची सार्थकता सृष्टिकर्ता को जानने, उसकी आज्ञाओं का पालन करने और दैनिक कार्यों में भी उसके साथ संगति रखने में मिलती है।




