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लेख

14 सितम्बर 2021

धन्य हैं वे जिनके मन शुद्ध हैं

शुद्धता सभी संस्कृतियों को अलग-अलग रीतियों से चिन्हित करती है। समाजशास्त्री हमें बताते हैं कि प्रत्येक जनजाति या समूह रीति-विधियों और व्यवहार से सम्बन्धित अपनी अपेक्षाएं विकसित करता है। शुद्धता की बात करते हुए, न तो यीशु और न ही बाइबल विचित्र और अपरिचित क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं।
9 सितम्बर 2021

धन्य हैं वे जो दयावन्त हैं

दया वह उदारता, हृदय की कोमलता, और आत्मा की करुणा है जो कि दूसरों के दु:खों को कम करने के लिए प्रेरित होती है। यह उन विशेषताओं में से एक है जो परमेश्वर की सन्तानों को चिन्हित करती है, क्योंकि परमेश्वर स्वयं “दया का धनी” है (इफिसियों 2:4)।
7 सितम्बर 2021

धन्य हैं वे जो धार्मिकता के भूखे और प्यासे हैं

प्रथम चार धन्य वाणी सब एक चेले की आवश्यकताओं का वर्णन करती हैं। “धन्य हैं वे जो धार्मिकता के भूखे और प्यासे हैं” शृंखला में अन्तिम है (मत्ती 5:3-6)। यीशु ने सर्वप्रथम कहा, “धन्य हैं वे जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है”(पद 3)। मन का दीन होने का अर्थ है स्वयं की आत्मिक आवश्यकता और परमेश्वर पर निर्भरता को जानना (भजन 34:6; सपन्याह 3:12)।

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14 सितम्बर 2021

धन्य हैं वे जिनके मन शुद्ध हैं

शुद्धता सभी संस्कृतियों को अलग-अलग रीतियों से चिन्हित करती है। समाजशास्त्री हमें बताते हैं कि प्रत्येक जनजाति या समूह रीति-विधियों और व्यवहार से सम्बन्धित अपनी अपेक्षाएं विकसित करता है। शुद्धता की बात करते हुए, न तो यीशु और न ही बाइबल विचित्र और अपरिचित क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं।
9 सितम्बर 2021

धन्य हैं वे जो दयावन्त हैं

दया वह उदारता, हृदय की कोमलता, और आत्मा की करुणा है जो कि दूसरों के दु:खों को कम करने के लिए प्रेरित होती है। यह उन विशेषताओं में से एक है जो परमेश्वर की सन्तानों को चिन्हित करती है, क्योंकि परमेश्वर स्वयं “दया का धनी” है (इफिसियों 2:4)।

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